Manish Kumar Jain on The Founder's Dream podcast

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आयुर्वेद को लोग अक्सर सिर्फ एक प्रोडक्ट कैटेगरी मानते हैं — चूर्ण, तेल, कैप्सूल। लेकिन Manish Kumar Jain की सफलता की कहानी यह दिखाती है कि यही इंडस्ट्री एक पूरा ग्लोबल बिजनेस इकोसिस्टम बन सकती है। द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट पर होस्ट अभिषेक व्यास के साथ बातचीत में HNCO Group के फाउंडर मनीष कुमार जैन ने बताया कि कैसे 2013 में शुरू हुआ एक ट्रेडिंग बिजनेस आज मैन्युफैक्चरिंग, कंप्लायंस और ग्लोबल सोर्सिंग को जोड़ने वाला एक GCC जैसा मॉडल बन गया है।

Manish Kumar Jain की सफलता की कहानी: ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग तक

मनीष बताते हैं कि 2013 में जब उन्होंने शुरुआत की, तो बात एक साधारण ट्रेडिंग मॉडल से हुई — एक जगह से सामान लेकर दूसरी जगह बेचना। उस दौर में e-commerce का बूम शुरू हो रहा था और Amazon ने भारत में अपना पैर पसारना शुरू ही किया था।

उन्होंने बताया कि Amazon की टीम को उनकी कैटेगरी पसंद आई और साथ काम करने का ऑफर आया। इसी शुरुआती जर्नी ने उन्हें कंप्लायंस, स्केल और ग्लोबल सेलिंग की बारीकियां सिखाईं। 2015 में Amazon ने उनकी ग्रोथ की स्टोरी भी कवर की थी, जिससे और सेलर्स को भी इस इंडस्ट्री में आने का हौसला मिला।

2019-20 के आसपास एक टर्निंग पॉइंट आया। मनीष के मुताबिक उन्हें समझ आ गया कि या तो वे एक ब्रांड बना सकते हैं, या एक फैक्ट्री। दोनों साथ चलाना मुश्किल था क्योंकि ब्रांड पर फोकस करने से फैक्ट्री की क्षमता का बड़ा हिस्सा सिर्फ अपने ही प्रोडक्ट में खप जाता, और बाकी ब्रांड्स भरोसे की वजह से दूर रहते। उन्होंने अपने शब्दों में यह फैसला इस तरह समझाया — किंग बनने की बजाय किंगमेकर बनना बेहतर विकल्प लगा।

HNCO Group का इकोसिस्टम मॉडल — GCC जैसा बिजनेस

HNCO Group आज हर्बल प्रोडक्ट्स, न्यूट्रासिकल्स, ऑर्गेनिक सप्लीमेंट्स, कॉस्मेटिक्स और हर्बल टी की मैन्युफैक्चरिंग करता है। लेकिन मनीष इसे सिर्फ एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी नहीं मानते, बल्कि एक कंसल्टिंग-स्टाइल इकोसिस्टम कहते हैं जिसमें कंपनी इनकॉरपोरेशन से लेकर लाइसेंसिंग, प्रोडक्शन, क्लिनिकल ट्रायल्स और एक्सपोर्ट तक की मदद मिलती है।

यह आइडिया उन्हें रियल एस्टेट इंडस्ट्री में इस्तेमाल हो रहे GCC (Global Capability Centre) टर्म से आया। उन्होंने महसूस किया कि जो चीजें एक GCC बनाने के लिए जरूरी हैं, वे तो पहले से ही कर रहे थे — तो इसे उस तरह ब्रांड करने में क्या हर्ज है।

“हमें कुछ ऐसा बनाना है जिसकी इस इंडस्ट्री को एक्चुअली जरूरत है, या जो इस इंडस्ट्री को नेक्स्ट स्टेज पे लेके जा सकता है।”

यही सोच उन्हें एक स्टार्टअप के लिए हैंड-होल्डिंग पार्टनर बनाती है — ताकि नया आने वाला फाउंडर मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर, कंप्लायंस या मार्केटिंग की चिंता में उलझने के बजाय अपनी ग्रोथ पर फोकस कर सके।

आयुर्वेद बनाम मॉडर्न साइंस: कॉम्पिटिशन नहीं, कॉम्प्लीमेंट

पॉडकास्ट में एक सीधा सवाल आया — क्या आयुर्वेद मॉडर्न साइंस को कॉम्पिट कर सकता है? मनीष का जवाब साफ था कि यह नैरेटिव ही गलत है।

“मॉडर्न साइंस साइंस की अपनी ब्यूटी है और आयुर्वेद की अपनी ब्यूटी है। दोनों के रिजल्ट, दोनों का जो वेज़ ऑफ डिलीवरी है या फिर दोनों के स्पेशलिटीज है वो सारे अलग है।”

उनका तर्क है कि जब मार्केट इतना बड़ा है, तो कॉम्पिटिशन की जरूरत ही नहीं। बल्कि आयुर्वेद में मॉडर्न टेस्टिंग पैरामीटर्स और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को जोड़ने से एक बेहतर प्रोडक्ट सामने आता है — यही कॉम्प्लीमेंट्री सोच है जो HNCO Group अपनी मैन्युफैक्चरिंग में अपनाता है।

आयुर्वेद के बारे में सबसे बड़ा मिथ

मनीष से जब पूछा गया कि इतने सालों के अनुभव के बाद भी कोई मिथ है जो लोगों को अब भी नहीं पता, तो जवाब बिना रुके आया — आयुर्वेद स्लो होता है।

“आई पर्सनली फील कि आयुर्वेदा बिल्कुल स्लो नहीं है। शायद आपको एक राइट डॉक्टर से प्रिस्क्रिप्शन नहीं मिला है।”

उनका कहना है कि जब लोग खुद गूगल कर लेते हैं या पड़ोस के अंकल से पूछकर दवा शुरू कर देते हैं, तभी रिजल्ट धीमा या गलत लगता है। एक क्वालिफाइड आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर के प्रिस्क्रिप्शन और सही डाइट के साथ, कई इंडिकेशन में मॉडर्न मेडिसिन जैसे ही रिजल्ट मिल सकते हैं। मनीष ने अपना अनुभव भी शेयर किया — 2020 में जब उनकी टीम में आयुर्वेद डॉक्टर जुड़े, उसके बाद उन्होंने कोई मॉडर्न मेडिसिन टैबलेट नहीं ली, यहां तक कि अपेंडिक्स की समस्या में भी सर्जरी टली।

अश्वगंधा का उदाहरण देते हुए उन्होंने एडाप्टोजन का कॉन्सेप्ट समझाया — एक ही प्रोडक्ट किसी को नींद देता है और किसी को एनर्जी, क्योंकि यह शरीर की जरूरत के हिसाब से काम करता है। यही वजह है कि दुनिया में कोई एक “मास्टर प्रोडक्ट” नहीं होता जो हर किसी के लिए एक जैसा काम करे।

असली आयुर्वेदिक प्रोडक्ट कैसे पहचानें, नकली से कैसे बचें

हर्बल इंडस्ट्री में डुप्लीकेट आयुर्वेदिक प्रोडक्ट की समस्या पर मनीष का सुझाव सीधा है — किसी भी सर्टिफिकेशन लोगो को उस संबंधित सरकारी वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर पर वेरीफाई करना आसान है। लेकिन असली सवाल सिर्फ लोगो का नहीं, फैसिलिटी की क्रेडिबिलिटी का है।

  • सर्टिफिकेशन एक्रिडिटेड बॉडी से लिया गया है या नहीं, यह जांचें।
  • ISO जैसे लोगो प्रोडक्ट से रिलेवेंट हैं या सिर्फ मैनेजमेंट सिस्टम सर्टिफिकेशन हैं, यह समझें।
  • फैसिलिटी के साथ पहले से कितने बड़े ब्रांड काम कर रहे हैं, यह देखें।
  • क्लेम्स को हमेशा वेरीफाई करें — झूठे हेल्थ क्लेम पूरी इंडस्ट्री को डिफेम करते हैं।

फाइनेंशियल चैलेंज और बिजनेस को ग्रो करने का फॉर्मूला

फाउंडर बनने के सफर में हर किसी को फाइनेंशियल क्रंच का सामना करना पड़ता है, और मनीष इसे नॉर्मल मानते हैं।

“फाइनशियल क्रंचेस मेरा मानना है होने चाहिए, कैश फ्लो टाइट आपके होने चाहिए… बिकॉज़ जब पैसा घूमता है तभी रोटेशन होता है, तभी बिज़नेस बढ़ता है।”

टीम बनाने में बजट की कमी, स्टेबिलिटी के इशू और एक्सपेंशन के लिए फंडिंग न मिलना — यही तीन चैलेंज उन्होंने बार-बार झेले। लेकिन उनका सबसे बड़ा सीख वाला पॉइंट कस्टमर एक्विजिशन को लेकर था।

“आप की कोई चीज बिक नहीं रही है, वो इसलिए नहीं बिक रही है कि आप बना नहीं पा रहे हो, उसकी डिमांड नहीं है।”

यानी मार्केट में बड़ा कस्टमर हमेशा मौजूद रहता है, समस्या यह है कि आपके पास उसे संभालने के लिए रिसोर्सेज तैयार नहीं होते। मनीष का दृष्टिकोण साफ है — बिजनेस को ग्रो करना है तो पहले कैपेसिटी बनाओ, कस्टमर खुद आ जाएगा।

“इफ यू हैव गॉट द कैपेसिटी तो ही कस्टमर आपके पास में आएंगे।”

इसी सोच के तहत उन्होंने ऐसे ग्लोबल सर्टिफिकेशन भी हासिल किए जिनका मोनेटाइजेशन तुरंत नहीं हुआ, बस इस भरोसे पर कि किसी दिन कोई क्लाइंट उसी सर्टिफिकेशन को देखकर आएगा। यह एक ऐसा फैसला था जो हर उद्यमी को समझना चाहिए — क्षमता में निवेश करना कभी बेकार नहीं जाता। जिन लोगों को ऐसे और फाउंडर्स की जर्नी सुननी हो, वे पॉडकास्ट गेस्ट कैसे बनें वाले आर्टिकल से भी आइडिया ले सकते हैं कि कैसे अलग-अलग इंडस्ट्री के फाउंडर अपनी कहानी शेयर करते हैं।

फैमिली बिजनेस से प्रोफेशनल कंपनी तक का सफर

HNCO Group में फैमिली मेंबर्स की इनवॉल्वमेंट अब भी है, लेकिन मनीष इसे प्रोफेशनल तरीके से चलाते हैं। उनका मानना है कि अगर टीम में कोई बेहतर काम कर सकता है, तो उसे मौका मिलना चाहिए — सिर्फ रिश्ते की वजह से जिम्मेदारी रोकना कंपनी और उस व्यक्ति दोनों की ग्रोथ को दबा देता है।

उनका लॉन्ग-टर्म विजन साफ है — यह बिजनेस पीढ़ियों तक चले, फंडिंग लेकर एग्जिट करने के लिए नहीं बनाया गया। इसीलिए क्लाइंट्स के साथ भी वे “वन-टाइम बिजनेस” नहीं, बल्कि “लाइफ टाइम बिजनेस” की भाषा में बात करते हैं। इस तरह की स्ट्रक्चर्ड सोच और बिजनेस बातचीत के तरीके पर द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट के बाकी एपिसोड्स में भी गहराई से चर्चा होती रहती है।

निष्कर्ष: वेलनेस ब्रांड शुरू करने से पहले क्या देखें

पॉडकास्ट के आखिर में मनीष एक साफ सलाह देते हैं — किसी भी वेलनेस ब्रांड में उतरने से पहले अपना विजन क्लियर करें। क्या आपको ब्रांड बेचकर एग्जिट करना है, या पीढ़ियों तक चलने वाला बिजनेस बनाना है? यह जवाब ही तय करता है कि आपकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी कैसी होगी।

Manish Kumar Jain की सफलता की कहानी इसी बात की मिसाल है कि ट्रेडिंग से शुरू हुआ एक छोटा बिजनेस, सही कंप्लायंस, सही टीम और लॉन्ग-टर्म सोच के साथ एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बन सकता है — बिना किसी बड़ी फंडिंग या शॉर्ट-कट के।

होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

HNCO Group क्या काम करता है?

HNCO Group आयुर्वेदिक, हर्बल, न्यूट्रासिकल, ऑर्गेनिक सप्लीमेंट्स और कॉस्मेटिक्स की मैन्युफैक्चरिंग करता है और ब्रांड्स के लिए लाइसेंसिंग, कंप्लायंस, क्लिनिकल ट्रायल्स और एक्सपोर्ट में एंड-टू-एंड सपोर्ट देता है।

आयुर्वेद के बारे में सबसे बड़ा मिथ क्या है?

Manish Kumar Jain के मुताबिक सबसे बड़ा मिथ यह है कि आयुर्वेद बहुत स्लो होता है, जबकि सही डॉक्टर, सही प्रिस्क्रिप्शन और सही डाइट के साथ यह मॉडर्न मेडिसिन जैसे रिजल्ट दे सकता है।

क्या आयुर्वेद मॉडर्न साइंस को कॉम्पिट कर सकता है?

गेस्ट का मानना है कि दोनों को कॉम्पिट करने की जरूरत नहीं है, बल्कि दोनों के तरीके और स्पेशलिटी अलग हैं, इसलिए दोनों को कॉम्प्लीमेंट्री तरीके से साथ लाना बेहतर है।

असली आयुर्वेदिक प्रोडक्ट कैसे पहचानें?

सर्टिफिकेशन के लोगो को संबंधित सरकारी वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर पर वेरीफाई करना चाहिए, और यह भी देखना चाहिए कि प्रोडक्ट बनाने वाली फैसिलिटी वास्तव में कंप्लायंट है या नहीं।

बिजनेस में सबसे बड़ा फाइनेंशियल चैलेंज क्या होता है?

Manish Kumar Jain के अनुसार कैश फ्लो टाइट रहना सामान्य बात है, क्योंकि जब पैसा घूमता है तभी बिजनेस में रोटेशन और ग्रोथ होती है।

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About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

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