Dr. Yogesh Bansal on The Founder's Dream podcast

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किडनी की बीमारी अक्सर तब पकड़ में आती है जब पेशेंट पहले ही स्टेज फोर या फाइव पर पहुंच चुका होता है — और तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। द फाउंडर्स ड्रीम के होस्ट अभिषेक व्यास ने इस बार यही सवाल उठाया कि आयुर्वेद और मॉडर्न मेडिसिन साथ मिलकर क्रॉनिक बीमारियों को कैसे संभाल सकते हैं। इस Dr. Yogesh Bansal इंटरव्यू में डॉक्टर योगेश बंसल — आयुर्वेदिक फिजिशियन, रिसर्चर और Bansal’s Ayurveda के चलाने वाले — ने किडनी, लिवर, फैटी लिवर, ADHD और असली आयुर्वेदिक डॉक्टर की पहचान जैसे मुद्दों पर बिना लाग-लपेट के बात की।

यह Dr. Yogesh Bansal इंटरव्यू क्यों जरूरी है

डॉक्टर बंसल के पास BAMS, MD और PhD की डिग्रियां हैं — MD उन्होंने नेफ्रोलॉजी (वृक्क रोग) में की और PhD भी किडनी डिसऑर्डर पर ही थी। वे एक मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं जहां हर साल 100 से ज्यादा MD डॉक्टर्स को ट्रेन करते हैं, और उनका नर्सिंग होम पिछले 15 साल से चल रहा है। उनके क्लीनिक में 120 देशों से मरीज ऑनलाइन जुड़ते हैं।

वे साफ कहते हैं कि कंसल्टेशन खुद करते हैं, किसी अटेंडेंट के जरिए नहीं:

“पेशेंट को हो सकता है हफ्ता 10 दिन का टाइम मिलेगा। लगेगा उसको। बट हमारे साथ बात करके जब तक मैं उसको पर्सनली देख नहीं लूंगा, बात नहीं कर लूंगा, हम लोग कोई मेडिसिन उसको प्रिस्राइब नहीं करते हैं।”

अगर आपको हेल्थ से जुड़े ऐसे और भरोसेमंद पॉडकास्ट सुनने हैं, तो TFD के हेल्थ पॉडकास्ट्स की लिस्ट पर एक नजर डाल सकते हैं।

किडनी की बीमारी: क्रिएटिनिन, GFR और स्टेज का गणित

डॉक्टर बंसल की सबसे बड़ी चिंता यही है कि उनकी OPD में आने वाले 80-90% किडनी पेशेंट्स चौथी स्टेज पर पहुंचकर आते हैं — तब तक जब बहुत कुछ रिवर्स करना मुश्किल हो जाता है।

“अभी तो किडनी के पेशेंट फोर्थ स्टेज पे आ रहे हैं। उनको पता ही नहीं चल रहा है। लास्ट में आ रहे हैं… जब वो आगे बोलते हैं डॉक्टर साहब मेरी रिपोर्ट और मैं कहता हूं कि स्टेज फोर, वो कहते हैं सर स्टेज वन टू थ्री कहां गई?”

क्रिएटिनिन शरीर का वेस्ट प्रोडक्ट है जो प्रोटीन के मेटाबोलिज्म से मसल्स में बनता है। जब किडनी ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती, यह ब्लड में जमा होने लगता है। GFR यानी फिल्ट्रेशन रेट अगर 15 से नीचे चला जाए तो उसे एंड स्टेज रीनल डिजीज या किडनी फेलियर कहा जाता है — फिर क्रिएटिनिन चाहे पांच हो या पंद्रह, स्टेज फाइव ही मानी जाएगी।

शुरुआती संकेत बड़े सिंपल हैं — हाथ-पैरों में सूजन, आंख के नीचे फुलाव, सुबह उठते ही भारीपन, और सबसे ज्यादा इग्नोर किया जाने वाला लक्षण है यूरिन में झाग आना (प्रोटीन यूरिया)। डॉक्टर बंसल एक आसान टेस्ट की सलाह देते हैं:

“एक सिंपल ब्लड टेस्ट है जिसे हम कहते हैं RFT… और इसके साथ में एक टेस्ट होता है एल्ब्यूमिन क्रिएटिनिन रेशो ACR। यह आपको बता देगा कि आपकी किडनी खराब होने वाली है या हो गई है।”

बीपी और शुगर दोनों को कंट्रोल में रखना जरूरी है — बीपी 130/90 से नीचे और शुगर 130-150 के दायरे में। डॉक्टर बंसल एलोपैथी के खिलाफ नहीं हैं; उनका कहना है कि इलाज एडिटिव होना चाहिए, यानी दवाई से कंट्रोल के साथ-साथ पोषण और रिवर्सल के लिए आयुर्वेदिक सपोर्ट भी।

फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस — असली वजह

पंजाब के संदर्भ में डॉक्टर बंसल एक चौंकाने वाला आंकड़ा देते हैं:

“अगर हम लोग 100 अल्ट्रासाउंड करवाते हैं तो 99 अल्ट्रासाउंड के अंदर आता है फैटी लिवर लिखा हुआ। और लोग कहते हैं ये तो सबका होता है, बट ये है सबसे बड़ी बीमारी का कारण।”

यह सिर्फ शराब पीने वालों की समस्या नहीं है — नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज तेजी से बढ़ रही है क्योंकि जंक फूड, फास्ट फूड और वर्कआउट की कमी शरीर में फैट जमा कर रही है। इसकी जड़ में है इंसुलिन रेजिस्टेंस — जब इंसुलिन सेल्स तक ग्लूकोस पहुंचाना बंद कर देती है। इसी से फैटी लिवर, शुगर और आगे चलकर लिवर सिरोसिस व कैंसर तक की नौबत आ सकती है।

राहत की बात यह है कि ग्रेड टू और ग्रेड थ्री का फैटी लिवर पूरी तरह रिवर्सिबल है। डॉक्टर बंसल तीन “सफेद जहर” — चीनी, मैदा और सफेद नमक — छोड़ने की सलाह देते हैं, साथ में हफ्ते में तीन-चार दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग:

  • अचार, चटनी और डीप-फ्राइड चीजों से परहेज
  • मल्टीग्रेन आटा (जौ, ज्वार, मक्की, बाजरा) अपनाना
  • उम्र चाहे 20 हो या 80, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूरी
  • कार्डियो और रोज की हल्की एक्सरसाइज

आयुर्वेद और उद्यमिता को जोड़कर देखना चाहते हैं तो Manish Kumar Jain की एंटरप्रेन्योर सफलता की कहानी भी पढ़ने लायक है, जो इसी सेक्टर से जुड़ी है।

लिवर सिरोसिस में DNA टेक्निक

लिवर फेलियर की स्थिति में सर्जिकल विकल्प लिवर ट्रांसप्लांट है, लेकिन डॉक्टर बंसल बताते हैं कि कंपनसेटेड सिरोसिस को लंबे समय तक बिना ट्रांसप्लांट के भी मैनेज किया जा सकता है। उनका फॉर्मूला है DNA — डिटॉक्सिफिकेशन, न्यूट्रिशन और एक्टिवेशन।

“रिवर्स हो जाएगा। जो चीज खत्म हो गई है वो खत्म हो गई है। रीजनरेट होगी या नहीं, ये डिपेंड करेगा आपके तपस्या के ऊपर — जो हम बताएंगे और आप उसको फॉलो करेंगे।”

शराब छोड़ने को लेकर भी उनका नजरिया व्यावहारिक है — अगर पेशेंट अचानक शराब बिल्कुल छोड़ दे तो एंग्जायटी और शुगर बढ़ने का खतरा है। इसलिए वे आधा पैग, ज्यादा पानी और साथ में प्रोटीन लेने जैसे बीच के रास्ते सुझाते हैं, लेकिन फाइब्रोसिस या सिरोसिस की स्थिति में शराब को पूरी तरह जहर बताते हैं।

ADHD और ऑटिज्म पर आयुर्वेद का नजरिया

डॉक्टर बंसल का सबसे अलग स्टैंड ADHD को लेकर है — वे इसे बीमारी मानने से ही इनकार करते हैं:

“एडीएचडी कोई बीमारी नहीं है… ना तो कोई मेंटल डिसऑर्डर है और ना ही कोई न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है… इट्स अ क्लियर कट बिहेवियर डेवलपमेंटल डिसऑर्डर।”

उनके मुताबिक बच्चे के साथ कम समय बिताना, मोबाइल पर ज्यादा समय, और दूसरे बच्चों से इंटरेक्शन की कमी ही हाइपरएक्टिविटी और अटेंशन की कमी को जन्म देती है। जो बच्चे आंखों में आंखें डालकर बात नहीं करते, अकेले रहते हैं, हाथ फड़फड़ाते हैं (हैंड फ्लैपिंग) — उनकी जल्द से जल्द जांच जरूरी है।

इलाज के तौर पर वे शिरोधारा (सिर पर तेल की धार) और पंचकर्मा का सुझाव देते हैं, और घर पर करने लायक एक तरीका भी बताते हैं — देसी गाय के घी में भिगोई कॉटन को बच्चे के सिर पर 5-10 मिनट रखना, जिससे हाइपरएक्टिविटी में फर्क दिखना शुरू होता है।

असली आयुर्वेदिक डॉक्टर को कैसे पहचानें

डॉक्टर बंसल का सबसे तीखा और जरूरी पॉइंट यही है कि “MD” लिखा देखकर भरोसा मत कीजिए:

“100 में से 99 लोग जो अपने नाम के आगे MD लिखते हैं, आयुर्वेद वाले, वो आगे आयुर्वेद नहीं लिखते हैं क्योंकि आयुर्वेद लिखेंगे तो पता लग जाएगा।”

उनका सीधा सुझाव है — डॉक्टर की क्वालिफिकेशन खुद सर्च करें, फेसबुक पर दिख रहे “MD” का मतलब कहीं मैनेजिंग डायरेक्टर तो नहीं, यह पता करें। साथ ही वे यह भी साफ करते हैं कि गलत डोज़ में ली गई कोई भी दवाई — चाहे आयुर्वेदिक हो या एलोपैथिक — नुकसान करेगी ही। जो लोग हिंदी में ऐसे प्रैक्टिकल इंटरव्यू सुनना पसंद करते हैं, उनके लिए भारत के बेहतरीन हिंदी पॉडकास्ट्स की लिस्ट भी काम आ सकती है।

होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Dr. Yogesh Bansal कौन हैं?

डॉक्टर योगेश बंसल एक आयुर्वेदिक फिजिशियन और क्रॉनिक केयर स्पेशलिस्ट हैं जिनके पास BAMS, MD और PhD की डिग्रियां हैं और वे 19 साल से ज्यादा समय से प्रैक्टिस कर रहे हैं, साथ ही एक मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर भी हैं।

क्रिएटिनिन बढ़ने का मतलब क्या है?

क्रिएटिनिन शरीर का वेस्ट प्रोडक्ट है जो मसल्स में प्रोटीन मेटाबोलाइज होने से बनता है, और जब किडनी ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती तो यह ब्लड में बढ़ने लगता है, जिससे किडनी की बीमारी की स्टेज पता चलती है।

क्या फैटी लिवर ठीक हो सकता है?

डॉक्टर बंसल के अनुसार ग्रेड टू और ग्रेड थ्री का फैटी लिवर पूरी तरह रिवर्सिबल है, बशर्ते खानपान सुधारा जाए, जंक फूड कम हो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू की जाए।

क्या एडीएचडी दिमाग की बीमारी है?

नहीं, डॉक्टर बंसल के मुताबिक एडीएचडी न्यूरोलॉजिकल या मेंटल डिसऑर्डर नहीं बल्कि एक बिहेवियर डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है जो घर के माहौल और बच्चे के साथ बिताए गए समय से जुड़ा होता है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर असली है या नहीं, कैसे पता करें?

डॉक्टर बंसल सलाह देते हैं कि नाम के आगे लिखे ‘MD’ की डिग्री जरूर चेक करें, क्योंकि कई लोग बिना क्वालिफिकेशन के भी यह टाइटल लगा लेते हैं, इसलिए क्वालिफिकेशन खुद सर्च करके पुष्टि करना जरूरी है।

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About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

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