Murtaza Abbas on The Founder's Dream podcast

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किसी छोटे मैन्युफैक्चरर को 3 लोगों से 55 से ज्यादा कर्मचारियों तक और एक क्लाइंट से 30 से ज्यादा क्लाइंट्स तक पहुंचाना—यह कोई किताबी बात नहीं है। द फाउंडर्स ड्रीम पर होस्ट अभिषेक व्यास ने मैनेजमेंट कंसल्टेंट मुर्तजा अब्बास से यही पूछा कि आखिर बिजनेस कैसे बढ़ाएं जब टीम, फंड्स और मार्केट—तीनों चैलेंज एक साथ सामने हों। मुर्तजा अब्बास पिछले 10 साल से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को लीडरशिप, सिस्टम्स और एक्सपोर्ट की तरफ ले जाने का काम कर रहे हैं, और यह उनकी खुद की फाउंडर की जर्नी से निकली सीख है।

बिजनेस कैसे बढ़ाएं: लीडरशिप सबसे पहली शर्त है

मुर्तजा अब्बास का कहना है कि जब भी कोई कंपनी तेजी से स्केल करती है—100 से 200, फिर 250-300 लोगों तक—तभी असली लीडरशिप चैलेंज शुरू होते हैं। समस्या प्रोडक्ट या फंड की नहीं, बल्कि यह होती है कि फाउंडर की सोच नीचे तक कैसे पहुंचे।

“जो फाउंडर है उसकी थॉट प्रोसेस लीडरशिप के साथ सिंक हो जानी चाहिए… जितने एंप्लॉइज़ को अपुन अच्छी तरह समझा दें, तो ऑटोमेटिकली वो चीज डाउन द लाइन दिखने लगती है। एंड देन द लीडर मेक्स अनदर लीडर।”

इसकी मिसाल एक लाइटिंग इंडस्ट्री की कंपनी की सफलता की कहानी है, जहां काम शुरू होने पर फाउंडर समेत सिर्फ तीन लोग थे। आज वहां 55 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं, और खुद ओनर अब फैक्ट्री में रोज नहीं जाता—क्योंकि टीम को सही दिशा, क्लेरिटी और ट्रेनिंग देकर नए लीडर तैयार किए गए।

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए क्लीन डेटा जरूरी है

हर बिजनेस को चलाने के लिए फंड्स चाहिए, लेकिन सही इन्वेस्टर सही बिजनेस के साथ कैसे मिले? मुर्तजा अब्बास के मुताबिक इसका जवाब बहुत तकनीकी नहीं, बल्कि बुनियादी है।

“हाउ यू मेंटेन योर अकाउंट्स, हाउ यू मेंटेन योर प्रोसेसेस… ये सब चीजें अगर एक डैशबोर्ड में दिखती हैं, डाटा अपने सामने क्लीन रहता है, तो ऑटोमेटिकली इन्वेस्टर्स भी अट्रैक्ट होते हैं।”

वे यह भी साफ करते हैं कि इन्वेस्टर मिल जाने से ऑपरेशनल चैलेंज खत्म नहीं हो जाते—”चैलेंजेस आर पार्ट ऑफ बिजनेस” और जितना बड़ा चैलेंज लिया जाएगा, उतनी बड़ी अचीवमेंट भी मिलेगी। जो टीम डेटा और प्रोसेस को लेकर अनुशासित रहती है, वही आगे चलकर निवेश और ग्रोथ दोनों पा पाती है—यह बात उन उद्यमियों के लिए खास तौर पर काम की है जो फंडिंग की तलाश में हैं। इसी विषय पर द फाउंडर्स ड्रीम की सेल्फ-ग्रोथ से जुड़ी कहानियों में भी बताया गया है कि पारदर्शिता किस तरह भरोसा बनाती है।

ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग तक: बिजनेस कैसे बढ़ाएं इसकी असली शुरुआत

ज्यादातर भारतीय बिजनेसमैन ट्रेडिंग से शुरू करते हैं—फैक्ट्री से सामान लिया और बेच दिया। जो लोग यह सोच रहे हैं कि स्टार्टअप कैसे शुरू करें, उनके लिए अक्सर यही ट्रेडिंग मॉडल पहला कदम होता है। मुर्तजा अब्बास बताते हैं कि ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग में जाने के लिए सबसे पहले सोच बड़ी करनी पड़ती है।

“जिस दिन आपने यह सोच लिया कि मुझे दुनिया में माल बेचना ही है, उस दिन आपकी शुरुआत होगी ग्लोबल जाने की।”

लेकिन सीधे फैक्ट्री खड़ी कर देना सबसे बड़ी गलती है। उनके मुताबिक पहले मार्केट को एनालाइज करना, सही कस्टमर तय करना, और फिर स्टेज बाय स्टेज—लैब मॉडल से पायलट मॉडल, फिर कमर्शियल मॉडल और उसके बाद टर्नकी प्रोजेक्ट्स तक बढ़ना जरूरी है। मशीनरी खरीदने से पहले फाइनेंशियल प्लानिंग और कैश फ्लो की पूरी तैयारी होनी चाहिए, वरना गलत स्केल पर मशीन लगाने से ग्रोथ पर ब्रेक लग जाता है।

  • मार्केट को पहले समझें, फैक्ट्री बाद में लगाएं
  • स्टेज बाय स्टेज स्केल करें—लैब से पायलट, पायलट से कमर्शियल
  • मशीनरी खरीदने से पहले फाइनेंशियल प्लानिंग पूरी करें
  • सिस्टम्स एफिशिएंट करें ताकि वेस्टेज कम हो और प्रॉफिट मार्जिन बढ़े

क्वालिटी और कंसिस्टेंसी: ग्लोबल मार्केट में एंट्री की चाबी

मुर्तजा अब्बास का एक दिलचस्प उदाहरण है—एक प्रोडक्ट जो बेंगलुरु में ₹10 में बिकता है, जरूरी नहीं कि दूसरे शहर या देश में भी उतने ही दाम में बिके।

“जरूरी नहीं है कि एक प्रोडक्ट एक कंट्री में अगर ₹10 में बिक रहा है, तो दूसरी कंट्री में ₹100 में नहीं बिक सकता।”

लेकिन इसके लिए पीक क्वालिटी पर फोकस करना पड़ता है, न कि सिर्फ नजदीकी कस्टमर की जरूरत पूरी करने पर। मिडिल ईस्ट और अफ्रीकन मार्केट के लिए उनकी सलाह अलग है—वहां हमेशा बेस्ट क्वालिटी जरूरी नहीं, बल्कि क्वालिटी की कंसिस्टेंसी सबसे ज्यादा मायने रखती है। जो कंपनी रोज एक जैसी क्वालिटी डिलीवर कर पाती है, मार्केट उसी की हो जाती है।

भारतीय मैन्युफैक्चरर्स कहां अटकते हैं, इस पर वे साफ कहते हैं कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इनोवेशन की कमी सबसे बड़ी वजह है। कॉपी-पेस्ट प्रोडक्ट लेकर इंटरनेशनल मार्केट में जाने वाले अक्सर रुक जाते हैं, जबकि जिसने भी पैकिंग या प्रोडक्ट में कुछ नया किया, वह आगे बढ़ता गया। जो लोग अपनी फाउंडर की जर्नी में सही पार्टनर और टीम की तलाश में हैं, उनके लिए भी यह सोच काम की है—सही लोग और सही इनोवेशन दोनों साथ चाहिए।

डायग्नोज, डिजाइन, डिप्लॉय, डोमिनेट: फोर स्टेप ग्रोथ प्रोसेस

मुर्तजा अब्बास की कंसल्टेंसी का तरीका चार आसान स्टेप्स में बंटा है। पहले कंपनी की करंट स्टेट को डायग्नोज किया जाता है, फिर उसे अगले लेवल तक ले जाने का रोडमैप डिजाइन होता है। इसके बाद सिर्फ सलाह नहीं दी जाती, बल्कि टीम के साथ मिलकर उसे डिप्लॉय किया जाता है, और आखिर में ग्लोबली डोमिनेट करने की रणनीति पर काम होता है।

इसी प्रोसेस से राजस्थान के एक छोटे पिकल ब्रांड उपकार और एक इंजीनियरिंग कंपनी को आगे बढ़ाया गया, जो पहले सिर्फ लैब मॉडल प्रोडक्ट बना पाती थी और एक ही क्लाइंट पर अटकी थी। आज वह कंपनी भारत की टॉप फार्मास्युटिकल और केमिकल कंपनियों के साथ काम कर रही है।

एक्सपोर्ट और सरकार की भूमिका

मुर्तजा अब्बास मानते हैं कि एक्सपोर्ट बिना सरकारी सपोर्ट के मुश्किल है। उनके मुताबिक पिछले 5-10 सालों में भारत ने पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स और कनेक्टिविटी के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग लगाई है, और अब सरकार इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट डेटा भी शेयर कर रही है जिससे लोगों को पता चलता है कि उनका प्रोडक्ट एक्सपोर्ट हो सकता है।

उनकी राय साफ है कि मैन्युफैक्चरिंग में आने से पहले ही एक्सपोर्ट के बारे में सोचना चाहिए। उनका मिशन भी यही है—हर ट्रेडिंग बिजनेस को मैन्युफैक्चरिंग में लाना और एक्सपोर्टर बनाना।

“वंस यू आर इंटू मैन्युफैक्चरिंग देन वर्ल्ड इज द मार्केट।”

एस्पायरिंग फाउंडर्स के लिए उनका आखिरी मैसेज भी इसी सोच को दोहराता है:

“मैन्युफैक्चरिंग में आओ। वर्ल्ड इज योर मार्केट एंड लेट्स डोमिनेट द वर्ल्ड।”

मुर्तजा अब्बास की यह बातचीत एक और भारतीय उद्यमी की कहानी है जो हर उस व्यक्ति के लिए काम की है जो ट्रेडिंग से आगे बढ़कर अपनी पहचान बनाना चाहता है, और यह समझना चाहता है कि सिस्टम्स, टीम और क्वालिटी के जरिए बिजनेस कैसे बढ़ाएं।

होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुर्तजा अब्बास कौन हैं?

मुर्तजा अब्बास एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट और बिजनेस ग्रोथ स्ट्रैटेजिस्ट हैं जिन्होंने 18 साल की कॉर्पोरेट जॉब छोड़कर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को स्केल करने का काम शुरू किया।

मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस कैसे बढ़ाएं?

मुर्तजा अब्बास के मुताबिक पहले मार्केट को सही तरीके से एनालाइज करें, फिर स्टेज बाय स्टेज स्केल करें, सिस्टम्स को एफिशिएंट बनाएं और क्वालिटी के साथ कंसिस्टेंसी बनाए रखें।

निवेशकों को बिजनेस में आकर्षित करने के लिए क्या जरूरी है?

अकाउंट्स और प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी और क्लीन डेटा सबसे जरूरी है, जिससे निवेशकों को कंपनी की सही तस्वीर दिखती है।

ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग में कैसे जाएं?

सबसे पहले बड़ी सोच लानी होगी कि दुनिया भर में माल बेचना है, उसके बाद मार्केट रिसर्च करके स्टेज बाय स्टेज फैक्ट्री और प्रोडक्शन स्केल को प्लान करना होगा।

भारतीय मैन्युफैक्चरर्स इंटरनेशनल मार्केट में कहां अटकते हैं?

ज्यादातर रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इनोवेशन की कमी की वजह से अटकते हैं, क्योंकि कॉपी-पेस्ट प्रोडक्ट से ग्लोबल मार्केट में आगे बढ़ना मुश्किल होता है।

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About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

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