क्या ₹50,000 महीना कमाने वाला व्यक्ति ₹15,000 रेंट देकर कभी अमीर बन सकता है? दिल्ली एनसीआर में अगली प्रॉपर्टी कहां खरीदनी चाहिए? और फेक लिस्टिंग से खुद को कैसे बचाएं? द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट के इस एपिसोड में होस्ट अभिषेक व्यास ने रिद्धि सिद्धि रियल एस्टेट के राम कुमार से यही सवाल पूछे। यह Ram Kumar की सफलता की कहानी भी है — एक सेल्समैन से लेकर उत्तरी दिल्ली के नंबर वन रियल एस्टेट ब्रांड के मालिक बनने तक की।
रेंट vs घर खरीदना — राम कुमार का सीधा जवाब
राम कुमार का तर्क सीधा और गणित पर आधारित है। अगर आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा रेंट में जा रहा है, तो बचत की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है। वे कहते हैं:
दैट मींस वो अपने सैलरी का 30% एक साथ सैलरी आते ही एक तारीख को सैलरी आई और दो तारीख को 30% रेंट में दे दिया। वह व्यक्ति ग्रो कर ही नहीं सकता।
उनकी तुलना बकेट से है — अगर बर्तन में छेद है तो वो कभी भर ही नहीं सकता। इसके उलट, अगर वही व्यक्ति EMI भरकर घर खरीदता है, तो 20 साल बाद वो प्रॉपर्टी की वैल्यू काफी बढ़ जाती है। उन्होंने एक उदाहरण दिया जिसमें एक 25 साल के लड़के ने ₹70 लाख का घर अपनी मां को गिफ्ट किया, जिसमें ₹45 लाख लोन था — बाकी उसने खुद जमा किया।
राम कुमार की सलाह है कि प्रॉपर्टी खरीदने का सही समय हमेशा “अभी” होता है, क्योंकि रेट कभी घटते नहीं:
जितना अर्ली आप खरीद लें उतना अच्छा… आज आपने कहीं सुना है कि कोई भी बायर प्रॉपर्टी खरीद के बर्बाद हुआ है? नहीं होता।
सर्कल रेट रिवीजन से घर महंगे नहीं होंगे
दिल्ली में हाल में सर्कल रेट रिवीजन हुआ है, लेकिन राम कुमार इसे मिडिल क्लास बायर्स के लिए फायदेमंद मानते हैं, नुकसान नहीं। उनका काम मुख्यतः ₹30-70 लाख के सेगमेंट में है, जहां लोग 60-80% तक लोन लेते हैं। सर्कल रेट बढ़ने से बैंक की रजिस्ट्री वैल्यू बढ़ती है, जिससे बायर को प्रॉपर्टी की ज्यादा वैल्यू मिलती है और सरकार को भी फंड मिलता है जो उस लोकेशन के विकास में लगता है — यानी दोनों तरफ फायदा है।
दिल्ली एनसीआर रियल एस्टेट में अगला निवेश हॉटस्पॉट कौन सा है?
राम कुमार साफ बताते हैं कि दिल्ली में अभी बुरारी हॉटस्पॉट है, खासकर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली की तरफ। इसकी वजह वे कनेक्टिविटी बताते हैं — यह नेशनल हाईवे के करीब है, आसपास तीन मेट्रो स्टेशन हैं, और मॉडल टाउन जैसे पॉश इलाके से थोड़ी ही दूरी पर है। कश्मीरी गेट ISBT से यह लगभग 20 मिनट और करौल बाग से 25 मिनट की दूरी पर है।
उनकी चेतावनी भी साफ है — यह मौका ज्यादा दिन नहीं रहेगा:
अभी है स्कोप… एक दो साल स्कोप है। एक दो साल बाद वहां कुछ नहीं मिलेगा। रिसेल का काम चलेगा।
दिल्ली, गुड़गांव और नोएडा के बीच चुनने पर उनकी राय है कि दिल्ली देश की राजधानी होने की वजह से हर किसी के पास एक प्रॉपर्टी होनी चाहिए, लेकिन गुड़गांव, नोएडा, जेवर और यहां तक कि गुजरात के कई शहरों में भी डेवलपमेंट तेज़ी से हो रहा है — यानी टियर-2, टियर-3 शहरों में भी मौके बन रहे हैं।
प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन: खरीदने से पहले क्या-क्या चेक करें
राम कुमार प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन के पांच जरूरी चेक बताते हैं जो हर बायर को करनी चाहिए:
- आप जिससे खरीद रहे हैं वो कौन है और उस लोकेशन में उसकी क्या वैल्यू है
- पैरेंटल पेपर से फरद तक की पूरी डॉक्यूमेंटेशन चेक करें
- चाहे जरूरत न भी हो, थोड़ा-सा लोन (₹5 लाख भी) लें — क्योंकि बैंक/NBFC प्रॉपर्टी को पूरी तरह वेरीफाई कर देते हैं
- आसपास की प्रॉपर्टी का भी इतिहास देखें कि कोई लीगल या टेक्निकल दिक्कत तो नहीं रही
- प्रॉपर्टी के पेपर पर चिपकी फोटो जरूर चेक करें, ताकि पता चले असली मालिक कौन है
फेक लिस्टिंग पहचानने का उनका तरीका सीधा है — सोशल मीडिया पर दिखाई प्रॉपर्टी में अगर कोई थर्ड पार्टी दिखा रहा हो, तो असली मालिक से सीधे मिलने की मांग करें। वे यह भी आगाह करते हैं कि यमुना किनारे के “ओजोन एरिया” जैसी अनसेफ प्रॉपर्टी में सिर्फ रेट के लालच में लोग GPA (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) पर सौदे कर लेते हैं, जबकि वहां रजिस्ट्री तक नहीं होती — यही सबसे बड़ी मिस-इन्फॉर्मेशन है जो बायर को महंगी पड़ती है।
AI बनाम प्रॉपर्टी डीलर
पॉडकास्ट में एक दिलचस्प सवाल यह भी उठा कि क्या AI प्रॉपर्टी डीलर की जगह ले लेगा। राम कुमार का जवाब था कि AI डॉक्यूमेंटेशन और वेरिफिकेशन को आसान बना सकता है, लेकिन फिजिकल मुलाकात और भरोसे की जगह मशीन नहीं ले सकती — क्योंकि आखिर में हर डील में इंसानों के बीच का भरोसा ही सबसे बड़ी चीज़ होती है। रियल एस्टेट बिजनेस में यह भरोसा कैसे बनाया जाता है, इस बारे में रियल एस्टेट बिजनेस पर द फाउंडर्स ड्रीम की पूरी पॉडकास्ट सीरीज में और गहराई से चर्चा हुई है।
रियल एस्टेट vs SIP: दोनों में निवेश क्यों जरूरी है
निवेश की स्ट्रेटजी पर राम कुमार का जवाब बिल्कुल स्पष्ट था — या तो प्रॉपर्टी या SIP नहीं, बल्कि दोनों:
दोनों मिक्स कीजिए। सपोज़ करते हैं कि हम 50 लाख की प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो 5000 का एसआईपी जरूर रखें… दोनों में करना चाहिए। कॉम्बो ऑफ इन्वेस्टमेंट तो मस्ट है।
उनका तर्क है कि 20 साल बाद प्रॉपर्टी की वैल्यू कई गुना बढ़ती है, और छोटी SIP भी उतनी ही ग्रोथ दे सकती है। साथ ही वे “इन्वेंटरी खत्म होने वाली है” जैसे प्रेशर टैक्टिक्स पर आगाह करते हैं — डिसीजन सोच-समझकर लेना चाहिए, सिर्फ एग्जिट स्ट्रेटजी और एप्रिसिएशन देखकर, हड़बड़ी में नहीं।
Ram Kumar की सफलता की कहानी: सेल्समैन से ब्रांड तक
राम कुमार इस इंडस्ट्री में एक्सीडेंटली आए। वे पहले खुद रियल एस्टेट में निवेशक थे और सर्विस क्लास में भी काम कर चुके थे — एक्स-बैंकर और LIC में भी रहे। निवेश करते-करते उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में बहुत “झोल” है और किसी को इसे व्यवस्थित करने के लिए आना चाहिए। उन्होंने सब कुछ छोड़कर श्री राम रिद्धि सिद्धि रियल एस्टेट कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड शुरू की।
उनकी टीम की औसत उम्र 35 साल है, और उनका मॉडल थर्ड-पार्टी फ्री है — खुद जमीन खरीदते हैं, अपने लॉयर्स और आर्किटेक्ट रखते हैं, और सेल्स-मार्केटिंग भी खुद संभालते हैं। भरोसे को वे अपने ब्रांड की जान मानते हैं:
अभी हम सबसे पहले ट्रस्ट पे काम करते। कमिट में जो हमने कमिट कर दिया है उसको हम एनी हाउ पूरा करेंगे… हमें ट्रस्ट खराब नहीं करनी।
आज तक वे 500 से ज्यादा परिवारों को घर दे चुके हैं, और उनका लक्ष्य 2030 तक 1000 परिवारों तक पहुंचना है। एक बहन की कहानी उन्होंने साझा की जो कैंसर से जूझ रही थीं और अपने बेटे के लिए घर सुनिश्चित करना चाहती थीं — राम कुमार ने उन्हें दो फ्लैट दिलाए, एक रहने के लिए और एक रेंटल इनकम के लिए। ऐसी कहानियां इस काम को उनके लिए सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि जिम्मेदारी बनाती हैं।
रियल एस्टेट बिजनेस में कैसे आएं
जो लोग इस फील्ड में आना चाहते हैं, उनके लिए राम कुमार की सलाह अनुभव से शुरू करने की है — पहले निवेशक के तौर पर मार्केट समझें, फिर बाइंग-सेलिंग का प्रोसेस, फिर DDA, MCD जैसी अथॉरिटीज़ से अप्रूवल की प्रक्रिया। पैसे की जरूरत के बारे में वे कहते हैं कि यह अनलिमिटेड स्केल का बिजनेस है — 25 गज के प्लॉट से भी शुरुआत हो सकती है, जितना फंड अलाउ करे उस हिसाब से काम बढ़ाएं। उनकी सीधी चेतावनी है:
जितनी चादर उतने पैर फैलाओ… जितना फंड है उस हिसाब से आप काम करेंगे आप कभी गड़बड़ी में नहीं आएंगे।
प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जरिए काम करने को वे ज्यादा सुरक्षित मानते हैं, क्योंकि डायरेक्टर की कानूनी जिम्मेदारी होती है, जबकि इंडस्ट्री में अभी भी ज्यादातर लोग असंगठित तरीके से दुकान खोलकर काम कर रहे हैं। एक फाउंडर के तौर पर उनकी आखिरी सलाह भी साफ है — यह रिस्पॉन्सिबल काम है, वे खुद रोज़ 16 घंटे काम करते हैं और उनका ऑफिस रात 9 बजे तक खुला रहता है। ऐसी ही और फाउंडर जर्नियां सुनने के लिए द फाउंडर्स ड्रीम के हिंदी बिजनेस पॉडकास्ट्स की लिस्ट देखी जा सकती है।
होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
30-50 लाख के बजट में घर खरीदना चाहिए या रेंट पर रहना चाहिए?
राम कुमार के मुताबिक अगर आपकी सैलरी का 30% हिस्सा रेंट में जा रहा है तो आप ग्रो नहीं कर पाएंगे, इसलिए EMI भरकर भी खुद का घर लेना बेहतर है क्योंकि 20 साल में उसकी वैल्यू काफी बढ़ जाती है।
दिल्ली NCR में अभी सबसे बड़ा रियल एस्टेट हॉटस्पॉट कौन सा है?
राम कुमार के अनुसार दिल्ली में बुरारी अभी हॉटस्पॉट है क्योंकि यह नेशनल हाईवे, तीन मेट्रो स्टेशन और मॉडल टाउन जैसे पॉश इलाकों के करीब है, और अगले एक-दो साल में जगह खत्म हो सकती है।
फेक प्रॉपर्टी लिस्टिंग से कैसे बचें?
सोशल मीडिया पर दिखाई गई प्रॉपर्टी के असली मालिक से मिलें, पेपर पर चिपकी फोटो चेक करें, और अगर कोई थर्ड पार्टी दिखा रहा है तो असली मालिक से सीधे मिलने की मांग करें।
क्या रियल एस्टेट में निवेश करना चाहिए या SIP में?
राम कुमार दोनों का कॉम्बो सुझाते हैं — बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने के साथ-साथ छोटी SIP भी शुरू रखें, इससे रिस्क डाइवर्सिफाई होता है और लॉन्ग टर्म में दोनों ग्रोथ देते हैं।
रियल एस्टेट बिजनेस कैसे शुरू करें?
पहले खुद निवेशक के तौर पर मार्केट का अनुभव लें, प्रॉपर्टी के लीगल-टेक्निकल पहलू समझें, DDA-MCD जैसी अथॉरिटीज़ से अप्रूवल का प्रोसेस जानें, और अपने फंड के हिसाब से ही काम शुरू करें।


