क्या जमीन खरीदना सिर्फ निवेश है या इससे एक पूरा बिजनेस भी खड़ा किया जा सकता है? इस Vishnu Viswanath इंटरव्यू में द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट के होस्ट अभिषेक व्यास ने फार्मलैंड उद्यमी से यही सवाल पूछा। MyFarmland.co के फाउंडर Vishnu बताते हैं कि फार्म स्टे आज शहरी भारत के लिए एक दिलचस्प और नए बिजनेस आइडिया के तौर पर उभर रहा है, जहां रिटायरमेंट के बाद लोग अपनी जिंदगी ही फार्म स्टे चलाने में बदल रहे हैं।
फार्मलैंड vs फ्लैट: कहां पैसा ज़्यादा काम करता है
Vishnu का सीधा तर्क है कि बेंगलुरु जैसे शहर में एक करोड़ रुपये में दो बीएचके फ्लैट मिलता है, जबकि उतने ही पैसे में शहर से 50-100 किलोमीटर दूर चार गुना ज़्यादा जमीन खरीदी जा सकती है। वे बताते हैं कि HSR जैसे इलाकों में प्लॉट 20,000-25,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक मिलते हैं, जबकि आउटस्कर्ट्स में वही जमीन 500 रुपये प्रति वर्ग फुट में भी मिल जाती है।
“अगर आप शहर में एक करोड़ रुपये निवेश करते हैं तो यह फायदा आपको अगले चार-पांच साल में मिलेगा, यह दोगुना या तिगुना नहीं होने वाला। मैं सिर्फ फायदे की बात नहीं कर रहा, फार्मलैंड में परिवार का साथ मिलने का जो अनुभव मिलता है, वह उससे कहीं बड़ी बात है।”
इसी वजह से कोविड के बाद जब वर्क फ्रॉम होम आम हुआ, तो बेंगलुरु के IT प्रोफेशनल्स का रुझान फ्लैट से हटकर फार्मलैंड की ओर बढ़ा। Vishnu के मुताबिक इसमें दो वजहें हैं – पहली, घर से काम करने की आज़ादी, और दूसरी, सही निवेश की तलाश।
फार्म स्टे: शहरी लोगों के लिए नए बिजनेस आइडिया के तौर पर उभरता मॉडल
MyFarmland.co सिर्फ जमीन बेचने तक सीमित नहीं है। Vishnu बताते हैं कि जो लोग जमीन खरीदते हैं, वे उस पर कॉटेज बनाकर Airbnb जैसी सुविधा शुरू कर रहे हैं, और इसी तरह फार्म स्टे एक नए बिजनेस आइडिया के रूप में तेज़ी से बढ़ रहा है।
“कई लोग महीने के बीस हजार रुपये ले रहे हैं, और आपको यकीन नहीं होगा कि कुछ लोगों को महीने के दो लाख रुपये तक किराया मिल रहा है। यह निवेश पर निर्भर करता है – कई लोगों ने छह-सात लाख में कॉटेज बनाया है, तो कई ने एक से दो करोड़ तक खर्च किया है।”
इसी ट्रेंड को देखते हुए MyFarmland.co जल्द ही myfarmstay.co नाम से नया पोर्टल लॉन्च करने वाला है, जहां खरीदार जमीन लेने से पहले उसी फार्म में एक दिन रुककर अनुभव ले सकेंगे। Vishnu यह भी बताते हैं कि एक IT कंपनी से 35 कर्मचारियों के लिए 15 दिन ठहरने और वहीं से काम करने की पूछताछ भी आई थी, हालांकि इंटरनेट और जगह की सीमा के चलते इसे पूरा नहीं किया जा सका।
यह ट्रेंड सिर्फ पैसिव इनकम तक सीमित नहीं, बल्कि एक जीवनशैली बदलाव भी है। जिन पाठकों को फार्महाउस आधारित जीवनशैली में दिलचस्पी है, वे Manav Kakkar की फार्महाउस की कहानी भी पढ़ सकते हैं, जो इसी विषय से जुड़ी है।
कानूनी नियम: हर राज्य में न्यूनतम जमीन का हिसाब अलग
फार्मलैंड को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यही है कि लोग इसे सामान्य कृषि भूमि समझकर कानूनी पहलू नज़रअंदाज़ कर देते हैं। Vishnu साफ बताते हैं कि फार्मलैंड पर घर बनाने की भी एक तय सीमा होती है – अगर कोई एक क्वार्टर एकड़ जमीन खरीदता है, तो वह सिर्फ 1,000 वर्ग फुट का कॉटेज बना सकता है, उससे ज़्यादा निर्माण की अनुमति नहीं है।
- तमिलनाडु में न्यूनतम 21 सेंट (करीब 9,200 वर्ग फुट) जमीन खरीदना जरूरी है, इससे कम रजिस्ट्री कानूनी नहीं मानी जाती।
- कर्नाटक में न्यूनतम पांच गुंटा यानी लगभग 5,500 वर्ग फुट जमीन खरीदनी होती है।
- तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में यह सीमा 6,000 वर्ग फुट से ज़्यादा है।
वे यह भी बताते हैं कि फार्मलैंड प्रोजेक्ट्स में आम प्लॉटिंग जैसी RERA या BMADI जैसी औपचारिक मंज़ूरी व्यवस्था नहीं होती, लेकिन राज्य के नियम फिर भी लागू होते हैं। यही जानकारी की कमी ज़्यादातर खरीदारों को गुमराह करती है।
मैनेज्ड फार्मलैंड: सही प्रॉपर्टी कैसे चुनें
Vishnu के मुताबिक एक ही इलाके में जमीन की कीमत 200 रुपये से 1,500 रुपये प्रति वर्ग फुट तक अलग-अलग हो सकती है, और इसकी वजह डेवलपमेंट का स्तर है। कुछ विक्रेता सिर्फ जमीन का टुकड़ा काटकर बेच देते हैं, जहां फेंसिंग तक नहीं होती, जबकि कुछ डेवलपर्स पक्की सड़क, कंक्रीट कंपाउंड और हर साइट को पानी का कनेक्शन देकर प्रीमियम लेते हैं।
वे यह भी चेताते हैं कि कई जगह सड़क का हिस्सा भी जमीन की नापतौल में जोड़ दिया जाता है, जिससे खरीदार को असल में कम जमीन मिलती है। इसीलिए वे कम्युनिटी आधारित फार्मलैंड प्रोजेक्ट को अकेले जमीन खरीदने से बेहतर मानते हैं, क्योंकि वहां 50-100 सदस्यों की वजह से मेंटेनेंस और सुरक्षा दोनों बेहतर रहते हैं।
“अगर आप अपार्टमेंट में रहते हैं, तो आपके बच्चों के पास बाहर जाने का कोई विकल्प ही नहीं है। अगर वे मिट्टी छूते हैं तो कहते हैं – गंदी है। उन्हें धरती मां के बारे में कौन सिखाएगा?”
जोखिम और ज़रूरी जांच: निवेश से पहले क्या देखें
जब होस्ट अभिषेक व्यास ने सीधा पूछा कि फार्मलैंड निवेश में जोखिम क्या हैं, तो Vishnu का जवाब था कि असल जोखिम कम और जानकारी की कमी ज़्यादा बड़ी समस्या है।
“कोई जोखिम नहीं है, बस लोगों को कानूनी बातें और शर्तें ठीक से जांचनी चाहिए। और हां, थोड़ा जोखिम भी है अगर आप सही तरीके से जांच नहीं करते।”
वे खरीदारी से पहले तीन चीज़ों को नॉन-निगोशिएबल बताते हैं – लीगल डॉक्यूमेंटेशन, राज्य के हिसाब से तय न्यूनतम जमीन का नियम, और प्रॉपर्टी तक जाने वाले रास्ते का कानूनी तौर पर दर्ज होना। उनका कहना है कि कई बार जमीन पक्की सड़क से सिर्फ 100-200 मीटर दूर दिखती है, लेकिन वह आख़िरी हिस्सा कानूनी रास्ता ही नहीं होता।
80% सौदे ब्रोकर के ज़रिए होते हैं, जिससे सही जानकारी खरीदार तक नहीं पहुंच पाती। यही वजह है कि अच्छे वकील पर 50,000 से एक लाख रुपये खर्च करने की सलाह वे बिना झिझक देते हैं, क्योंकि निवेश की रकम के मुकाबले यह खर्च बहुत छोटा है।
MyFarmland.co की शुरुआत कैसे हुई और आगे की योजना
MyFarmland.co की शुरुआत कैसे हुई, इसके पीछे की वजह बताते हुए Vishnu कहते हैं कि फार्मलैंड प्रोजेक्ट्स गूगल पर आसानी से नहीं मिलते – सिर्फ भारी डिजिटल मार्केटिंग करने वाले बड़े नाम ही सामने आते हैं। उन्होंने खुद गाड़ी चलाकर बेंगलुरु के आसपास 200 से ज़्यादा प्रोजेक्ट खोजे, और इलेक्ट्रॉनिक सिटी की तरफ ही करीब 150 प्रोजेक्ट मिले।
वे खुद एक किसान परिवार से आते हैं और छह साल से अपने फार्मलैंड प्रोजेक्ट चला रहे हैं, जिसमें 600 से ज़्यादा प्लॉट शामिल हैं। पोर्टल सिर्फ चार महीने पुराना है, लेकिन इसमें पहले से 30 से ज़्यादा बिल्डर जुड़ चुके हैं और 25 और प्रोजेक्ट्स पर वेरिफिकेशन चल रहा है। फिलहाल काम दक्षिण भारत तक सीमित है, लेकिन हैदराबाद और चेन्नई के बाद इसे पूरे देश में ले जाने की योजना है।
जो पाठक निवेश के अलावा दूसरे बिजनेस आइडिया भी तलाश रहे हैं, उनके लिए 2026 के लिए टॉप बिजनेस आइडिया वाला लेख भी काम का हो सकता है।
निवेश से ज़्यादा, परिवार के साथ जुड़ने की बात
बातचीत के आख़िर में जब सवाल आया कि फ्लैट लें या फार्मलैंड, तो Vishnu का जवाब सीधा था – लंबी अवधि का निवेश, कम लागत, और अपनी ज़मीन का मालिक होने का भाव, ये तीनों फार्मलैंड के पक्ष में जाते हैं। वे इसे सिर्फ एक छोटा बिजनेस आइडिया नहीं बल्कि न्यूक्लियर फैमिली के दौर में परिवार को फिर से जोड़ने का ज़रिया मानते हैं, जहां पति-पत्नी साथ मिलकर जॉइंट फैमिली जैसा अनुभव बना सकते हैं।
उनके मुताबिक यह सिर्फ शहर से दूर एक गांव में चलने वाला बिजनेस आइडिया भर नहीं है, बल्कि अगली पीढ़ी को मिट्टी, खेती और प्रकृति से जोड़ने का तरीका भी है – कुछ ऐसा जो अपार्टमेंट में बड़े हो रहे बच्चों को आसानी से नहीं मिल पाता।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फार्मलैंड में निवेश करने के लिए न्यूनतम जमीन कितनी होनी चाहिए?
यह राज्य के हिसाब से अलग है। तमिलनाडु में कम से कम 21 सेंट यानी लगभग 9,200 वर्ग फुट, कर्नाटक में पांच गुंटा यानी करीब 5,500 वर्ग फुट, और तेलंगाना-आंध्र प्रदेश में 6,000 वर्ग फुट से ज़्यादा जमीन खरीदनी जरूरी है।
फार्म स्टे से मासिक कमाई कितनी हो सकती है?
Vishnu Viswanath के अनुसार कुछ लोग महीने के 20,000 रुपये से शुरुआत करते हैं जबकि बड़े और अच्छी तरह बने कॉटेज से महीने के दो लाख रुपये तक किराया मिल रहा है, हालांकि यह निवेश और लोकेशन पर निर्भर करता है।
फार्मलैंड खरीदने से पहले कौन सी तीन चीज़ें जरूर जांचनी चाहिए?
गेस्ट के मुताबिक लीगल डॉक्यूमेंटेशन, राज्य के हिसाब से तय न्यूनतम जमीन का नियम, और प्रॉपर्टी तक जाने वाले रास्ते का लीगल होना – ये तीन चीज़ें हमेशा चेक करनी चाहिए।
फार्मलैंड और फ्लैट में निवेश के लिए क्या बेहतर है?
Vishnu Viswanath का मानना है कि लंबी अवधि के निवेश, कम लागत और परिवार के साथ जुड़ने के अनुभव के लिहाज़ से फार्मलैंड बेहतर विकल्प है, जबकि फ्लैट में निवेश पर रिटर्न चार-पांच साल में भी दोगुना नहीं होता।


