Vinit Gupta on The Founder's Dream podcast

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रियल एस्टेट में हर किसी का पोर्टफोलियो होता है — चाहे वो सेलिब्रिटी हो, कॉर्पोरेट हो या कोई भी बड़ा निवेशक। लेकिन उस पोर्टफोलियो को ढंग से मैनेज कौन करेगा? द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट के इस एपिसोड में होस्ट अभिषेक व्यास ने Classic Group के फाउंडर विनीत गुप्ता से यही सवाल पूछा, और Vinit Gupta की सफलता की कहानी में इसका जवाब बहुत साफ मिलता है — सही एग्जीक्यूशन, सही वैल्यू सिस्टम और धैर्य।

Vinit Gupta की सफलता की कहानी: स्टील बिजनेस से रियल एस्टेट तक

सबसे पहला सवाल यही उठता है कि Vinit Gupta कौन हैं। विनीत गुप्ता थर्ड जनरेशन एंटरप्रेन्योर हैं। उनके दादा बॉम्बे माइग्रेट हुए थे और परिवार का शुरुआती बिजनेस स्टील ट्रेडिंग का था। 90 के दशक में लिबरलाइजेशन के दौरान जब स्टील बिजनेस के मार्जिन कम होने लगे, तो परिवार ने रियल एस्टेट में कदम रखा।

विनीत खुद इस बारे में कहते हैं:

“डैड के टाइम से तब से मैंने थोड़ा स्टील बिजनेस सीखा, रियलस्टेट सीखा। आज 25 एक साल हो गए। तो सीखते-सीखते हम लोग वी स्टार्टेड रियलस्टेट जर्नी एज इन्वेस्टर्स।”

शुरुआत में दो-तीन डेवलपर्स के साथ निवेश से बात शुरू हुई, फिर परिवार और दोस्त जुड़ते गए, और वॉल्यूम की डील्स बनती गईं। धीरे-धीरे इसे प्रोफेशनलाइज करके फंड मैनेजमेंट सर्विसेज का एक पूरा वर्टिकल बना दिया गया। यह पूरा सफर Classic Group की शुरुआत कैसे हुई — इसे समझने की सबसे सीधी कहानी है।

क्लासिक ग्रुप असल में करता क्या है

विनीत गुप्ता इसे बहुत सीधे शब्दों में समझाते हैं — कंपनी के दो बड़े वर्टिकल हैं। पहला, लोगों की प्रॉपर्टीज़ का पूरा पोर्टफोलियो मैनेज करना, जिसे वो फंड मैनेजमेंट कहते हैं। दूसरा, बड़े लैंड ओनर्स और डेवलपर्स के लिए जमीन से लेकर तैयार प्रोडक्ट तक पूरा प्रोजेक्ट एग्जीक्यूट करना।

कई डेवलपर्स के पास पैसा और टीम तो होती है, लेकिन डोमेन एक्सपर्टीज़ की कमी होती है। कई लैंड ओनर्स के पास सिर्फ जमीन होती है और यह तय नहीं होता कि वहां होटल बनाना है, मॉल बनाना है या रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट। यहीं पर Classic Group बिजनेस प्लान, फिजिबिलिटी, फाइनेंशियल क्लोजर, सेल्स-मार्केटिंग और कंस्ट्रक्शन तक की पूरी एक्सपर्टीज़ एंड-टू-एंड उपलब्ध कराता है।

₹500 करोड़ का पोर्टफोलियो मैनेज करना इतना मुश्किल क्यों है

इस एपिसोड का सबसे दिलचस्प हिस्सा वो है जहां विनीत गुप्ता स्टॉक मार्केट और रियल एस्टेट के बीच का फर्क समझाते हैं। स्टॉक मार्केट में बड़े पोर्टफोलियो मैनेज करने वाली दर्जनों संस्थागत कंपनियां मौजूद हैं, लेकिन रियल एस्टेट में ऐसा ऑर्गेनाइज्ड सिस्टम लगभग गायब है।

“आपके पास 100, 50, ₹200 करोड़ का, ₹500 करोड़ का पोर्टफोलियो मैनेज करने के लिए रियल स्टेट में कोई कंपनी नहीं है जो आपका पूरा पोर्टफोलियो मैनेज कर सके।”

कई अमीर एनआरआई हैं जिनके भारत में सौ-दो सौ करोड़ की प्रॉपर्टी है, लेकिन वो विदेश में सेटल होने की वजह से उसे मैनेज नहीं कर पाते। कॉर्पोरेट्स, प्राइवेट इक्विटी फंड्स और वीसी भी रियल एस्टेट में पैसा लगा रहे हैं, लेकिन उनके पास इस सेक्टर की गहरी समझ नहीं होती। Classic Group यहीं पर एक इन-हाउस प्लानिंग, लीगल और आर्किटेक्चर टीम के साथ डिफरेंशिएटर बनकर आता है।

रियल एस्टेट में एंट्री को लेकर इसी तरह के अनुभव पिछले एपिसोड्स में भी सामने आए हैं — जैसे Roshan Shah: The Entrepreneur Mindset Behind a Real Estate Empire में भी एग्जीक्यूशन और एक्सपर्टीज़ की यही भूमिका दिखती है।

प्रोजेक्ट डिले क्यों होते हैं — क्या यह हमेशा बेईमानी है

अभिषेक व्यास ने इस मुद्दे को सीधा उठाया — डिले का असर आखिरकार आम ग्राहक पर ही पड़ता है। विनीत गुप्ता इसका बचाव नहीं करते, लेकिन फर्क स्पष्ट करते हैं। उनका मानना है कि डिमोनेटाइजेशन, जीएसटी, कोविड, रेगुलेटरी बदलाव या जियोपॉलिटिकल हालात की वजह से प्रोजेक्ट में देरी होना बिजनेस का सामान्य हिस्सा है।

सवाल यह है कि क्या पूरे इंडिया में ऐसे डेवलपर मिलेंगे जिन्होंने कभी देरी नहीं की। विनीत गुप्ता की बात इस पर बहुत स्पष्ट है:

“पूरे इंडिया में एक डेवलपर भी बताओ जिसने ढंग से प्रोजेक्ट किया हो, टाइम पे प्रोजेक्ट किया हो और बाद में परेशानी नहीं दी हो… बहुत सारे होंगे।”

उनके मुताबिक Tata Housing, Godrej या Oberoi जैसे टॉप नेम्स में भी डिले होता है, लेकिन ये सब प्रोफेशनल और एथिकल तरीके से काम करने वाले लोग हैं। असली फर्क स्कैम और जेनुइन डिले में है — जहां कोर्ट ने इंटरेस्ट के साथ रिफंड का आदेश दिया, वहां भी कई ग्राहकों ने पैसा वापस नहीं लिया क्योंकि चार साल में मार्केट वैल्यू डबल हो चुकी थी।

भारत के अगले 10 साल — 2025 से 2035 तक की ग्रोथ स्टोरी

विनीत गुप्ता का सबसे बड़ा दांव भारत की अगली दहाई पर है। उनके मुताबिक 2014-15 से 2025-26 तक का दशक इंफ्रा, लेजिसलेशन, टेक्नोलॉजी और स्मार्ट सिटीज़ के जरिए भारत की फाउंडेशन बनाने में गया।

“आने वाला जो दशक होगा… 2025 से लेके 35 तक का इंडिया के लिए इंडिया शाइनिंग स्टोरी होगा और हर एक एंटरप्रेन्योर के लिए, बिजनेस के लिए, इंडस्ट्री के लिए ग्रोथ पर्सपेक्टिव बहुत अच्छा होगा।”

इसी ग्रोथ के साथ हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी बड़ा बदलाव दिख रहा है। भारत में ट्रैवल इतनी तेजी से बढ़ा है कि रूम्स की शॉर्टेज बन गई है, जिसकी वजह से Airbnb जैसे मॉडल और टियर-2, टियर-3 शहरों में बड़े होटल ब्रांड्स की एंट्री हो रही है। साथ ही लोगों का रुझान बड़े घरों, विला और फार्महाउस की तरफ भी बढ़ा है, क्योंकि जैसे-जैसे इनकम बढ़ती है, लोग एक्सपीरियंसल लाइफस्टाइल चाहते हैं।

बिजनेस एथिक्स: “विनविन फॉर ऑल, ग्रीड को इन चेक रखो”

इस बातचीत का सबसे मजबूत हिस्सा विनीत गुप्ता का वैल्यू सिस्टम है, जो उन्हें विरासत में मिला लेकिन जिसे उन्होंने खुद जिया। वो मानते हैं कि बिजनेस एक बाय-प्रोडक्ट है — अगर आदमी के कोर वैल्यूज़ और आईडियोलॉजी अलाइन हों, तो लेगसी मेंटेन करने का कोई दबाव नहीं रहता।

“पैसा कमाने के मामले में ग्रीड को इन चेक रखना है… ऐसा कोई ट्रांजैक्शन, बिजनेस में ऐसा नहीं होना चाहिए कि बस मेरा ही फायदा हो और सामने वाले का न हो। तो इट शुड बी अ विनविन फॉर ऑल।”

यही वजह है कि जहां वैल्यूज़ अलाइन नहीं होते, वहां वो मैंडेट लेने से इनकार कर देते हैं, भले ही पैसा कितना भी अच्छा क्यों न हो। कोविड के दौरान भी उन्होंने इसी कंपैशन के सिद्धांत पर प्रॉपर्टीज़ और ग्राहकों के साथ डील किया, जिसकी वजह से कंपनी बिना किसी बड़े नुकसान के उस दौर से गुजर पाई।

जो लोग रियल एस्टेट और वेल्थ क्रिएशन में महिला उद्यमियों के नजरिए से भी यह विषय समझना चाहते हैं, उनके लिए Success Stories of Women Entrepreneurs in India: Estate Queens एक उपयोगी अगली पढ़ाई हो सकती है।

फाउंडर्स के लिए सीधा सबक

विनीत गुप्ता का सबसे सीधा संदेश नए फाउंडर्स के लिए यह है कि रियल एस्टेट एक कैपिटल इंटेंसिव सेक्टर है, और बिना सही स्ट्रैटेजी और एग्जीक्यूशन के सिर्फ बड़ा एक्सपोज़र लेना खतरनाक है। वो इसे “ओवर ट्रेडिंग” कहते हैं — यानी अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा बड़ा कमिटमेंट कर लेना।

  • 360° बिजनेस प्लान बनाओ — मार्केट डिमांड, कंप्लायंस, फाइनेंस और सेल्स-मार्केटिंग सब कवर हो।
  • मार्केट के असली पेनिट्रेशन नंबर देखो, एक्स्ट्रापोलेटेड बड़े आंकड़ों पर मत जाओ।
  • रिस्क एपेटाइट के हिसाब से तय करो — लो रिस्क में रियल एस्टेट बैंकेबल है, हाई रिस्क स्टार्टअप्स में मल्टीप्लायर रिटर्न मिल सकता है।
  • वैल्यू सिस्टम सही रखो, क्योंकि बिजनेस बदलते रहते हैं लेकिन सस्टेनेबल बिजनेस वैल्यूज़ पर ही टिकता है।

विनीत गुप्ता धीमी और स्थिर ग्रोथ के पक्षधर हैं, और इसे एक लाइन में कहते हैं:

“स्लो एंड स्टेडी विंस द रेस। रूम इज़ नेवर बिल्ट इन अ डे।”

Vinit Gupta की सफलता की कहानी असल में किसी एक बड़े ब्रेक की कहानी नहीं है — यह 25 साल के धैर्य, सही वैल्यू सिस्टम और एक-एक क्लाइंट के भरोसे से बने नेटवर्क की कहानी है।

होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Vinit Gupta कौन हैं?

विनीत गुप्ता Classic Group के फाउंडर और थर्ड जनरेशन एंटरप्रेन्योर हैं, जो पिछले करीब 25 साल से रियल एस्टेट में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और फंड मैनेजमेंट का काम कर रहे हैं।

Classic Group असल में क्या करता है?

Classic Group दो वर्टिकल्स पर काम करता है — एक, बड़े निवेशकों और एनआरआई का रियल एस्टेट पोर्टफोलियो मैनेज करना, और दूसरा, लैंड ओनर्स और डेवलपर्स के लिए जमीन से लेकर तैयार प्रोडक्ट तक पूरा प्रोजेक्ट एग्जीक्यूट करना।

रियल एस्टेट प्रोजेक्ट डिले क्यों होते हैं?

विनीत गुप्ता के मुताबिक गवर्नमेंट कंप्लायंस, फाइनेंस, जियोपॉलिटिकल हालात और मार्केट डायनामिक्स जैसे कारणों से डिले सामान्य है, लेकिन अगर डेवलपर ऑनेस्ट और इंटीग्रिटी वाला है तो यह ग्राहकों के लिए बड़ी समस्या नहीं बनता।

भारत के अगले 10 साल रियल एस्टेट के लिए कैसे रहेंगे?

विनीत गुप्ता मानते हैं कि 2025-26 से 2035 तक का दशक भारत के लिए ‘इंडिया शाइनिंग स्टोरी’ होगा, जहां पिछले 10 साल में बनी इंफ्रा और टेक्नोलॉजी की फाउंडेशन पर हर इंडस्ट्री के लिए ग्रोथ के मौके बनेंगे।

रियल एस्टेट में बड़ा पोर्टफोलियो मैनेज करना मुश्किल क्यों है?

स्टॉक मार्केट के उलट, ₹100-500 करोड़ के रियल एस्टेट पोर्टफोलियो को ऑर्गेनाइज्ड तरीके से मैनेज करने वाली कंपनियां बहुत कम हैं — ज्यादातर काम लोकल ब्रोकर्स और कंसलटेंट्स के भरोसे ट्रांजैक्शनल तरीके से होता है।

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About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

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