किसी प्रोफेशन को समाज में इज्जत से स्थापित करना किसी भी नए बिजनेस आइडिया से कहीं ज्यादा मुश्किल काम है। द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट पर होस्ट अभिषेक व्यास ने कुश कुमार से यही सवाल पूछा — मसाज थेरेपी रियल साइंस है या वेलनेस इंडस्ट्री का स्कैम? कुश कुमार, जो Twin Brothers Therapy & Wellness के को-फाउंडर हैं, की यह संघर्ष से सफलता की कहानी एक पहलवान के घर-घर जाकर मसाज देने से शुरू होकर झारखंड के पहले सर्टिफाइड मसाज थेरेपी सेंटर तक पहुंचती है।
12 साल से ज्यादा के करियर में 25,000 से अधिक क्लाइंट्स को रिकवरी सर्विस दे चुके कुश कुमार की यह Kush Kumar की सफलता की कहानी सिर्फ एक बिजनेस आइडिया की नहीं है — यह एक उद्यमी के नजरिए से समाज की पूरी सोच को बदलने की कोशिश की कहानी है। किसी भी फाउंडर की जर्नी की तरह इसमें भी संघर्ष और धैर्य दोनों हैं, और यही वजह है कि यह आज एक सफलता की प्रेरक कहानी बन चुकी है।
रेसलिंग के अखाड़े से शुरू हुई संघर्ष से सफलता की कहानी
कुश कुमार और उनके जुड़वा भाई खुद पहलवान थे। कुश्ती के दौरान वे हर रविवार एक-दूसरे को मसाज देते थे ताकि सोमवार को बेहतर प्रैक्टिस कर सकें। यहीं से यह भी समझा जा सकता है कि Twin Brothers Therapy & Wellness की शुरुआत कैसे हुई — एक आकस्मिक पल से। पड़ोस की व्यायामशाला के एक भाई ने रिकवरी के लिए सलाह मांगी, और पहले ही सेशन के बाद नतीजा दिखा।
धीरे-धीरे एक से दो, दो से तीन क्लाइंट मिलते गए। करीब दो साल तक दोनों भाई साइकिल से होम विजिट करते रहे, कोई फिक्स सेंटर नहीं था। 2018 में जब दोनों को नेशनल रेसलिंग खेलने पर 36,000 रुपये की स्कॉलरशिप मिली, तभी फैसला हुआ कि अब घर-घर घूमने के बजाय एक प्रॉपर सेंटर खोला जाए।
जब जेब में सिर्फ ₹3000 बचे
सेंटर सेटअप करने के बाद सिर्फ ₹3000 बचे थे, जबकि रेंट और दूसरे खर्चे सामने खड़े थे। पिता को हार्ट अटैक आने के बाद घर की फाइनेंशियल कंडीशन पहले से ही खराब थी। इस दौर में दोनों भाइयों ने मल्टीपल काम किए — कुश सुबह 3:30 बजे पेपर बॉय का काम करते थे और रात को बाउंसर की ड्यूटी करके 11 बजे घर लौटते थे, जबकि उनके भाई दिनभर Ola बाइक चलाते और शाम को सेंटर संभालते थे।
“वो परिस्थिति ही हम लोगों को बताया कि नहीं आगे जाने का ऑप्शन अगर माइंडसेट हो जाए तो कोई चीज रोक नहीं सकता।”
यह सिर्फ एक मोटिवेशनल लाइन नहीं थी — एक साल तक यही रूटीन चला, जब तक कैपिटल स्टेबल नहीं हुआ और दोनों भाई पूरा समय सेंटर को दे सके। 2020 में क्लाइंट्स ने ही उन्हें “ट्विन ब्रदर्स थेरेपी” नाम दिया, और यही नाम आज तक ब्रांड पहचान बना हुआ है।
मसाज थेरेपी और मसाज पार्लर का फर्क — जमीन-आसमान का अंतर
भारत में मसाज सुनते ही एक्स्ट्रा सर्विस का खयाल आना कोई इत्तेफाक नहीं है। कुश कुमार इसकी वजह साफ बताते हैं।
“सबसे बड़ा इसका रॉन्ग मैसेज आया मीडिया और हमारे जो मूवीज थे वहां से आया कि उसमें वैसा दिखाया गया मसाज, कि एक लग्जरी लाइफ है… इस फील्ड में खुश जाइए कि किसी को भी और बहुत कम समय में बहुत बड़ा अमाउंट आप कमा करके निकल जाएंगे।”
इसी गलत धारणा से असली थेरेपिस्ट को रोज जूझना पड़ता है। कुश बताते हैं कि फोन पर ही 15 सेकंड में पता चल जाता है कि कॉल करने वाला जेनुइन रिकवरी चाहता है या कुछ और — सवाल का पैटर्न ही अलग होता है। महीने में 20-40 कॉल आते हैं, जिनमें से सिर्फ 60% जेनुइन होते हैं।
Twin Brothers में मेल-टू-मेल और फीमेल-टू-फीमेल थेरेपी का साफ नियम है, क्योंकि रांची अभी टियर-2 शहर है और लोगों की मानसिकता अभी उतनी खुली नहीं है। लेकिन कुश साफ कहते हैं कि स्किल और सर्टिफिकेशन होने पर मेल और फीमेल थेरेपिस्ट में कोई फर्क नहीं होता — फर्क सिर्फ क्लाइंट की जरूरत और सहूलियत का है।
रिकवरी को नजरअंदाज करना — आज की जनरेशन की सबसे बड़ी गलती
जिम जाने वाले ज्यादातर लोग प्री-वर्कआउट लेते हैं, प्रोटीन भरपूर खाते हैं, लेकिन रिकवरी को पूरी तरह भूल जाते हैं। कुश कुमार इसे साफ शब्दों में कहते हैं:
“रिकवरी को इग्नोर करना और अपना लाइफस्टाइल मेंटेन नहीं करना — यही आज की जनरेशन की अपनी बॉडी के साथ सबसे बड़ी गलती है।”
वे मसल फाइबर की साइंस भी समझाते हैं — हाई इंटेंसिटी वेट ट्रेनिंग में लैक्टिक एसिड तेजी से बनता है और जोड़ों में H+ आयन जमा होने लगते हैं, जिससे लोअर बैक और शोल्डर पेन की शिकायत सबसे ज्यादा जिम जाने वाले युवाओं में दिखती है। इसकी बड़ी वजह “ईगोलिफ्टिंग” है — दोस्त से कम्पीट करने के चक्कर में क्षमता से ज्यादा वजन उठाना।
इसी संदर्भ में कुश ने हेल्थ के पांच पिलर बताए:
- डाइट — सही पोषण के बिना कोई थेरेपी काम नहीं करती
- वर्कआउट — मसल्स की लेंथ और एनर्जी लेवल बनाए रखने के लिए
- हाइड्रेशन — हर 20 किलो वजन पर कम से कम 1 लीटर पानी
- स्ट्रेस मैनेजमेंट — मेंटल हेल्थ का संतुलन
- रिकवरी — मसाज, कपिंग, साउंड स्लीप सब इसी में आते हैं
कुश का मानना है कि इनमें से एक भी पिलर कमजोर हो तो बाकी चारों का असर सीमित रह जाता है — जैसे समोसा खाकर जिम जाना बेकार है, वैसे ही सिर्फ थेरेपी से बिगड़ी लाइफस्टाइल ठीक नहीं हो सकती।
समाज का नजरिया और पापा की नाराजगी
झारखंड-बिहार जैसे समाज में “मालिश वाला” शब्द को लेकर जो नजरिया है, उसे बदलना आसान नहीं था। शुरुआत में कुश के पिता भी राजी नहीं थे।
“समाज का लोग कान भरने का काम करते थे पापा का कि अरे गुप्ता जी आपका लड़का क्या कर रहा है, दूसरे का जाके घर में पैर दबाएगा, मालिश करेगा, इज्जत नहीं है।”
डेढ़-दो साल बाद जब क्लाइंट्स का रिजल्ट दिखने लगा, अखबार में नाम आया, और लोग खुद बताने लगे कि बच्चे स्टेडियम तक जाकर काम कर रहे हैं, तब पिता का नजरिया बदला। इस मोड़ पर कुश की एक बात हर उस फाउंडर के लिए प्रासंगिक है जो परिवार से सपोर्ट की उम्मीद रखता है — ऐसी कहानियां अक्सर उद्यमियों की कहानियाँ में दोहराई जाती हैं, जहां शुरुआती विरोध के बाद नतीजे ही सबसे बड़ा जवाब बनते हैं।
स्किल में निवेश और प्रोफेशनल पहचान
सिर्फ अनुभव से संतुष्ट न होकर कुश कुमार ने कपिंग थेरेपी और केरल से आयुर्वेद का कोर्स किया। ट्रेनिंग के दौरान वे डॉक्टरों से एक महीना “स्टाफ” बनाकर रखने का अनुरोध करते थे, ताकि महीने में 900 पेशेंट देखने का अनुभव मिल सके। 2022 में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से कोर्स करने के बाद 2023 में उन्हें वहीं गेस्ट फैकल्टी के तौर पर पढ़ाने का मौका मिला। 2025 में कंपनी का प्राइवेट लिमिटेड के रूप में रजिस्ट्रेशन हुआ — एलके ट्विन ब्रदर्स वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड।
मार्केटिंग के बारे में पूछे जाने पर कुश का जवाब सीधा था — 90% क्लाइंट माउथ पब्लिसिटी से आए हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया से आने वाले क्लाइंट भी शामिल हैं जो भारत पहुंचने से पहले ही सेशन बुक कर लेते हैं। यह दिखाता है कि किसी भी सेल्फ ग्रोथ की तरह बिजनेस में भी भरोसा धीरे-धीरे, नतीजों से ही बनता है, विज्ञापन से नहीं।
नए फाउंडर्स के लिए कुश कुमार की सलाह
जो लोग वेलनेस या किसी भी सर्विस बिजनेस में उतरना चाहते हैं, उनके लिए कुश की सलाह सीधी है — खुद को छोटा समझकर फील्ड में मत उतरो, स्किल पर काम करो, और सबसे जरूरी, खुद पर भरोसा रखो।
“पूरी दुनिया में हमको भगवान पे विश्वास है, सूरज पे विश्वास है, चांद पे विश्वास है… खुद पर बस खुद पर विश्वास ही नहीं है कि हम खुद कुछ कर सकते हैं।”
उनकी एक और सीख साफ है — अगर पैसा शुरुआत में नहीं है तो तन और मन से काम लगा दो, धन अपने आप पीछे आएगा। यही वजह है कि उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी सिर्फ मसाज थेरेपी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किसी भी स्मॉल बिजनेस शुरू करने वाले के लिए एक व्यावहारिक सीख बन जाती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मसाज थेरेपी और मसाज पार्लर में क्या फर्क है?
कुश कुमार के मुताबिक मसाज थेरेपी साइंस और रिजल्ट पर आधारित प्रोफेशनल सर्विस है, जबकि आम मसाज पार्लर का कोई मेडिकल या साइंटिफिक आधार नहीं होता और अक्सर गलत वजहों से बदनाम हो जाते हैं।
Twin Brothers Therapy & Wellness की शुरुआत कैसे हुई?
कुश कुमार और उनके जुड़वा भाई ने रेसलिंग करियर के दौरान एक-दूसरे को मसाज देना शुरू किया, फिर आसपास के लोगों के रेफरल से होम विजिट शुरू हुए और 2018 में रांची में पहला सेंटर खोला गया।
जिम जाने वालों की सबसे बड़ी गलती क्या है?
कुश कुमार के अनुसार वर्कआउट और प्रोटीन पर फोकस करने के बावजूद लोग रिकवरी को पूरी तरह इग्नोर कर देते हैं, जिससे गर्दन, पीठ और जोड़ों में दर्द की समस्या आती है।
हेल्थ के पांच पिलर कौन से हैं?
डाइट, वर्कआउट, हाइड्रेशन, स्ट्रेस मैनेजमेंट और रिकवरी — कुश कुमार के मुताबिक इन पांचों को साथ में बैलेंस करना ही सही हेल्थ का आधार है।
घर से मसाज थेरेपी जैसा वेलनेस बिजनेस कैसे शुरू करें?
कुश कुमार की सलाह है कि पहले स्किल और सर्टिफिकेशन पर काम करें, खुद पर विश्वास रखें और शुरुआत में तन-मन से मेहनत करें, पैसा और भरोसा धीरे-धीरे अपने आप बनता है।


