भारत में आज भी करोड़ों व्यापारी सिर्फ यह सोचते हैं कि सुबह ₹2 लगाएंगे और शाम को ₹3 लेकर घर जाएंगे। यही लाइन इस बिजनेस पॉडकास्ट हिंदी शो द फाउंडर्स ड्रीम के होस्ट अभिषेक व्यास ने इस एपिसोड की शुरुआत में कही, और यहीं से बात शुरू होती है कि बिजनेस कैसे बढ़ाएं जब आप अब भी एक्सेल शीट और डायरी पर चल रहे हों। मेहमान थे Keval Kishan — Business Automation Coach, Entrepreneur और MSME Growth Strategist at Zillionn Analytics, जिन्होंने अपना मिशन बनाया है भारत के MSME को AI ऑटोमेशन और स्मार्ट सिस्टम्स के जरिए तेज़ी से स्केल कराना।
बिजनेस कैसे बढ़ाएं: तीन चीजें जो हर कंपनी को चाहिए
Keval Kishan की बात साफ है — अकेले ऑटोमेशन से काम नहीं चलता। वे कहते हैं:
देखिए कोई भी बिजनेस को ग्रो करना है तो तीन चीजें रिक्वायर्ड हैं। राइट सिस्टम्स जिसको बोलते हैं ऑटोमेशन… और स्ट्रेटजी किस स्ट्रेटजी से आप ग्रो करेंगे… और आपके पास आपकी सॉलिड टीम होनी चाहिए वो लीडर्स जो हर एक डिपार्टमेंट को लीड कर रहे हैं।
अगर सिस्टम नहीं हैं तो फाउंडर रोज़ के ऑपरेशन में उलझ जाता है और ग्रोथ पर ध्यान ही नहीं दे पाता। यही वजह है कि हर नए बिजनेस को शुरू करते वक्त सिस्टम बनाने की सोच पहले दिन से रखनी चाहिए, ना कि तब जब टीम बड़ी हो जाए और ऑर्डर डिले होने लगें।
MSME की असली समस्या — लीड आना नहीं, लीड को संभालना है
एपिसोड में एक अहम पॉइंट यह आया कि आज लीड जनरेट करना मुश्किल नहीं रहा — मेटा पर ऐड चलाओ, लीड आ जाएगी। असली दिक्कत है लीड को इंगेज करना और नर्चर करना। Keval बताते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में indiamart और ट्रेड इंडिया से इंक्वायरी आती है, लेकिन सेल्स टीम चार दिन बाद कॉल करती है — तब तक चार कॉम्पिटिटर पहुंच चुके होते हैं। इसी गैप को भरने के लिए AI-पावर्ड CRM डायरेक्टली लीड फेच करता है और AI एजेंट तुरंत ह्यूमन भाषा में कॉल करता है।
रियल एस्टेट में भी यही समस्या है। कोल्ड कॉलिंग अब काम नहीं करती क्योंकि लोग अनजान नंबर उठाते ही नहीं। Keval इसकी वजह साफ बताते हैं:
आज के टाइम में मेरे iPhone में मैंने ऐसी सेटिंग लगाई हुई है कि अननोन कॉल्स जो है ना वो साइलेंस जाते हैं।
इसीलिए वे WhatsApp को सुझाते हैं, जिसका ओपनिंग रेट 98% है जबकि SMS का सिर्फ 2% और ईमेल का 10%।
Hyundai शोरूम केस — WhatsApp और AI एजेंट का असली नतीजा
कोलकाता के एक क्लाइंट, आरडीबी Hyundai के पास 2000 पुराने कॉन्टैक्ट्स थे जो शोरूम आ चुके थे पर गाड़ी नहीं खरीदी थी। Keval की टीम ने एक मार्केटिंग वीडियो बनाकर CRM से WhatsApp पर भेजी, जिसमें दो बटन थे — “कॉल बैक चाहिए” और “चैट करना चाहते हैं”। नतीजा उन्हीं के शब्दों में:
हम 2000 लोगों को कॉल गया और नेक्स्ट वीक 200 लोगों ने अपॉइंटमेंट बुक कर ली… और उस वन वीक में 60 लोग शोरूम में आए और 15 गाड़ियां बिक गई। मतलब ₹1.5 करोड़ की सेल।
खर्चा कितना हुआ? एक WhatsApp मैसेज की कॉस्ट लगभग 90 पैसे। यही कैंपेन दिवाली और दिसंबर में दोहराया गया और फिर से सेल्स बढ़ी। इस एपिसोड में लाइव डेमो भी दिखाया गया जहां एक फॉर्म भरते ही “अवीरा” नाम का AI एजेंट तुरंत कॉल करता है, ग्राहक से मॉडल, बजट और टेस्ट ड्राइव की डेट पूछता है — यह पूरा सिस्टम दिखाता है कि लीड आने के एक मिनट के भीतर बातचीत शुरू हो सकती है।
फॉलो-अप ही सक्सेस का मंत्र है
Keval का मानना है कि बिजनेस में सफलता का एक ही फॉर्मूला है — फॉलो अप, फॉलो अप, फॉलो अप। वे बताते हैं कि 8 से 12 बार फॉलो अप लेने पर कन्वर्जन 80% तक जा सकता है, लेकिन ज्यादातर सेल्स टीम मेंबर इतना पेशेंस नहीं रख पाते। यही वजह है कि यह काम ऑटोमेशन को देना समझदारी है:
वहीं फॉलो अप का काम अगर आपने WhatsApp से, एआई एजेंट से करा लिया तो वो हंसी-खुशी बात करेगा। क्लाइंट से कोटेशन शेयर करेगा, उनके बाकी FAQ सॉल्व करेगा।
यह सिर्फ सेल्स की बात नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के बिजनेस चुनौतियों में से एक बड़ी चुनौती को हल करने का तरीका है — जहां लीड बहुत आती हैं पर बिना सिस्टम के वे बिखर जाती हैं।
क्या AI नौकरियां खत्म कर देगा?
यह सवाल होस्ट अभिषेक व्यास ने सीधा पूछा, और Keval का जवाब बेबाक था। उनकी अपनी कंपनी में मार्केटिंग टीम के दो कंटेंट राइटर और चार वीडियो एडिटर अब AI टूल्स से रिप्लेस हो चुके हैं। प्री-सेल्स का काम अब “राज” नाम का एक AI एजेंट करता है जो ट्रायल लेते ही क्लाइंट को कॉल करता है, इंडस्ट्री पूछता है और डेमो बुक कराता है। उनकी कंपनी में अब तीन AI एजेंट हैं — प्रीसेल्स, कस्टमर सपोर्ट और हायरिंग।
Keval साफ मानते हैं कि रूटीन और रिपिटेटिव काम अगले 5-10 साल में पूरी तरह AI ले लेगा, जबकि जो लोग नॉलेज वर्कर बनकर इन AI एजेंट्स को मैनेज करना सीखेंगे वे टिके रहेंगे। यही वजह है कि हर 2026 में जरूरी स्किल्स की लिस्ट में अब AI मैनेजमेंट टॉप पर आ रहा है।
100 करोड़ की कंपनी क्यों नहीं बन पाती — लीडरशिप की कमी
Keval एक दिलचस्प आंकड़ा शेयर करते हैं — भारत में 100 करोड़ से ऊपर रेवेन्यू वाली कंपनियां सिर्फ 15,000 हैं। वजह वे किताब “E-Myth” के हवाले से समझाते हैं — ज्यादातर उद्यमी टेक्निशियन और मैनेजर स्तर पर अटक जाते हैं, एंटरप्रेन्योर स्तर तक नहीं पहुंचते जहां हर डिपार्टमेंट में अपनी “कॉपी” यानी खुद से स्मार्ट लीडर तैयार किए जाएं।
अपनी खुद की फाउंडर की जर्नी बताते हुए Keval कहते हैं कि वे पहले खुद को मज़ाक में “चीफ फॉलो-अप ऑफिसर” बुलाते थे क्योंकि पांच-छह लोग हायर करने के बाद पूरा दिन बस फॉलो-अप में निकल जाता था। एक मल्टीनेशनल कंपनी के जापानी CEO को समुद्र किनारे चिल करते देखकर उन्हें एहसास हुआ कि बड़ी कंपनियां सिस्टम पर चलती हैं, इमोशन पर नहीं। असल में Zillionn Analytics की शुरुआत कैसे हुई, इसकी जड़ भी यहीं छिपी है — इसी अनुभव के बाद Keval ने तय किया कि MSME को भी सिस्टम-ड्रिवन बनाना है:
एमएसएमई जो है वो मेमोरी और इमोशन ड्रिवन बिज़नेस अर्न करता है… बल्कि MNC जो है वो इमोशन को घर पे रख के आते हैं और सिस्टम ड्रिवन करते हैं।
इसी सोच पर उन्होंने पहले अपनी कंपनी में सिस्टम लगाए, फिर हजारों उद्यमी को कोचिंग दी, और आज ऑटोमेट बिजनेस के नाम से लगभग 12,000 MSME को सर्व कर रहे हैं। उनका लक्ष्य भारत के 63 मिलियन MSME में से 1 मिलियन को ऑटोमेट करना है।
फाउंडर्स के लिए तीन काम के AI टूल्स
- Claude — Keval इसे अपना पर्सनलाइज्ड बिजनेस कोच बताते हैं, जो मार्केटिंग, सेल्स, ऑपरेशन और HR पर सलाह देता है, बिना MBA की फीस खर्च किए।
- ऑटोमेट टास्क — टीममेट के KRA डिफाइन करके WhatsApp पर रिमाइंडर और ग्रीन-येलो-रेड रिपोर्ट भेजने वाला डेलीगेशन टूल।
- WhatsApp API / ऑटोमेट चैट्स — लीड क्वालिफिकेशन और कस्टमर सपोर्ट चैटबॉट बनाने का जरिया, ताकि छुट्टी पर होते हुए भी कस्टमर की क्वेरी टिकट में बदल जाए।
Keval की सलाह साफ है — अगर आप अब भी एक्सेल पर काम कर रहे हैं तो टेक्नोलॉजी की तरफ बढ़ें, क्योंकि AI आपका बिजनेस खत्म नहीं करेगा:
आपका कॉम्पिटिटर जो AI यूज़ करेगा, दे विल पुट यू आउट ऑफ योर बिज़नेस… अगर AI को अडॉप्ट नहीं किया तो यू विल बिकम डायनासोर ऑफ योर इंडस्ट्री।
यह पूरी बातचीत एक बार फिर साबित करती है कि बिजनेस कैसे बढ़ाएं इसका जवाब बड़े बजट में नहीं, बल्कि सही सिस्टम, सही स्ट्रेटजी और सही टीम के मेल में छिपा है।
होस्ट अभिषेक व्यास के साथ यह पूरा Keval Kishan इंटरव्यू देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बिजनेस कैसे बढ़ाएं जब टीम छोटी हो और बजट सीमित हो?
Keval Kishan के मुताबिक तीन चीजें जरूरी हैं — सही सिस्टम्स यानी ऑटोमेशन, ग्रोथ की स्पष्ट स्ट्रेटजी, और हर डिपार्टमेंट को संभालने वाली सॉलिड टीम, तभी फाउंडर ऑपरेशन में उलझने के बजाय ग्रोथ पर फोकस कर पाता है।
MSME के लिए AI ऑटोमेशन की लागत कितनी आती है?
एपिसोड में बताया गया कि ऑटोमेट बिजनेस जैसे टूल्स में CRM, WhatsApp मार्केटिंग और HRMS एक साथ औसतन लगभग 10,000 से 20,000 रुपए प्रति महीने में मिल जाते हैं, जो सेल्सफोर्स जैसे बड़े प्लेटफॉर्म से काफी सस्ता है।
क्या WhatsApp ऑटोमेशन सच में सेल्स बढ़ाता है?
हां, आरडीबी Hyundai के उदाहरण में 2000 पुराने कॉन्टैक्ट्स को WhatsApp मार्केटिंग वीडियो भेजकर एक हफ्ते में 60 शोरूम विजिट और 15 गाड़ियां यानी करीब 1.5 करोड़ रुपए की सेल हुई, जिसे अगले क्वार्टर्स में दोहराया भी गया।
AI ऑटोमेशन की वजह से क्या नौकरियां खत्म होंगी?
Keval Kishan कहते हैं कि रूटीन और रिपिटेटिव काम अगले 5-10 सालों में AI ले लेगा, लेकिन जो लोग नॉलेज वर्कर बनकर AI एजेंट्स को मैनेज करना सीखेंगे वे बचे रहेंगे।
Keval Kishan कौन हैं और उनकी कंपनी क्या करती है?
Keval Kishan Business Automation Coach, Entrepreneur और MSME Growth Strategist हैं, जो Zillionn Analytics और ऑटोमेट बिजनेस के जरिए भारत के MSME को AI ऑटोमेशन और स्मार्ट सिस्टम्स से स्केल करने में मदद करते हैं।


