एक इंडियन एयरफोर्स का सार्जेंट, जिसका तलाक हो गया, जिसका प्रॉपर्टी डील में नुकसान हुआ, जिसका रोड एक्सीडेंट हुआ और जिसका पायलट टेस्ट देने का मौका ही नहीं मिला—यही डॉ. राही रमेश यादव की संघर्ष से सफलता की कहानी की शुरुआत है। इस Dr. Raamesh Rahee Yaadav इंटरव्यू में, द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट पर होस्ट अभिषेक व्यास के साथ बातचीत में डॉ. राही ने बताया कि कैसे अपना ही सिग्नेचर बदलकर उन्होंने अपनी जिंदगी की दिशा पलट दी और आगे चलकर ईशांत शर्मा जैसे क्रिकेटरों के मेंटर बन गए।
यह एपिसोड पारंपरिक बिजनेस इंटरव्यू नहीं है। यह एक मोटिवेशनल पॉडकास्ट है, जो एक ऐसे शख्स की कहानी बताता है जिसने सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी नाम की एक बिल्कुल नई फील्ड खड़ी की और अपने ही जीवन को उसका पहला टेस्ट केस बनाया। यह फाउंडर की जर्नी सिर्फ बिजनेस बनाने की नहीं, बल्कि खुद को बदलने की भी है। अगर आप सेल्फ ग्रोथ से जुड़ी अनोखी सोच में दिलचस्पी रखते हैं, तो उनकी बात ध्यान से सुनने लायक है।
संघर्ष से सफलता की कहानी: तलाक, कर्ज और करियर की रुकावट
डॉ. राही बताते हैं कि उनका पहला सिग्नेचर 1985 में आठवीं क्लास में बना था, जब वो हरियाणा बोर्ड में पढ़ते थे। उस सिग्नेचर के दौर में—1985 से 2007 तक—उनकी जिंदगी में एक के बाद एक झटके आते रहे। उन्होंने बिट्स पिलानी का एडमिशन छोड़कर एयरफोर्स जॉइन की, फिर एक अच्छी शादी टूट गई, गुड़गांव के राजीव चौक वाले प्लॉट में भारी नुकसान हुआ, रोड एक्सीडेंट हुआ, और फ्लाइंग पायलट टेस्ट देने का मौका तक नहीं मिला जबकि उनके सीनियर अफसरों को यकीन था कि वे सिलेक्ट हो जाएंगे।
“उसमें एक्सीडेंट था। उसमें फाइनेंशियल लॉस था। उसमें मैरिड लाइफ डिस्टर्ब थी। उसमें करियर में एवरीथिंग विल मीट टू फेलियर।”
यह वही वक्त था जब उनके साथी उन्हें एमबीए करने या कोई डिग्री लेने की सलाह देते थे, यह कहकर कि “माइंड कोच, माइंड थिंकिंग से कुछ नहीं होता।” लेकिन डॉ. राही ने अपने तरीके पर भरोसा बनाए रखा—और यही भरोसा आगे उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी का टर्निंग पॉइंट बना।
एयरफोर्स से यूनिवर्स तक: सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी की शुरुआत
2008 में हैदराबाद की एयरफोर्स एकेडमी में तैनाती के दौरान डॉ. राही मेडिटेशन और मैनिफेस्टेशन-विजुअलाइजेशन की ट्रेनिंग ले रहे थे, जो सिंगापुर की एक कंपनी के मेंटर्स करा रहे थे। उन्होंने भगवान से सीधी मांग रखी—गाड़ी-बंगला नहीं, बल्कि “विज़डम”।
“मैंने कहा भगवान लाल बत्ती वाला अपने को देख के खड़ा हो जाए। और जो व्यक्ति लाल बत्ती के लिए तरस रहा है जीवन में उसको अपन लाल बत्ती लगा दे अगर अपने पास आए तो।”
दो-तीन साल कुछ नहीं हुआ। फिर एक सुबह अचानक फ्लैशबैक की तरह उन्हें लगा कि वे सिग्नेचर पढ़ सकते हैं। ऑफिस में उन्होंने साथियों के सिग्नेचर देखकर उनके बारे में बातें बताईं और लोगों ने माना कि वे सही बोल रहे थे। यहीं से सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी की शुरुआत हुई—जिसे वे खुद “गीता का उपदेश श्री कृष्ण ने दिया, तो सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी का उपदेश मैं 2008 से दे रहा हूं” कहकर परिभाषित करते हैं। आज Dr. Raamesh Rahee Yaadav कौन हैं, इसका जवाब उनके इसी उपदेश में छुपा है—वे Signature Yog Meditation के फाउंडर और ग्राफोलॉजी एक्सपर्ट हैं जो सिग्नेचर के जरिए किस्मत बदलने का दावा करते हैं।
अपना ही सिग्नेचर बदलना—पहला बड़ा फैसला
2008 में ही डॉ. राही ने अपना 1985 का पुराना सिग्नेचर पूरी तरह बदल दिया। साथियों ने चुनौती दी थी—”तू भी तो एयरफोर्स का सार्जेंट है, तू कौन सा जनरल है? पहले तू बदल, तू चमत्कार दिखा।” उन्होंने 2010 में वीआरएस लेने से पहले ही एक बड़ा दावा कर दिया था कि यह सिग्नेचर उन्हें क्रिकेटरों का मेंटर बनाएगी।
“अगर ये सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी में दम है तो ये मुझे क्रिकेटरों का मेंटर बनाएगी, तो इसको सलूट करूंगा, नहीं तो मैं इसके पन्ने फाड़ दूंगा।”
ईशांत शर्मा, सचिन तेंदुलकर और क्रिकेट कनेक्शन
2010 में रिटायरमेंट के बाद डॉ. राही के दावे सच होते गए। फरवरी 2011 में ईशांत शर्मा उनके स्टूडेंट बने और दिसंबर 2011 में मीडिया के सामने टेस्टिमोनियल दिया कि वे राही जी का सिग्नेचर फॉलो करते हैं और 20 नोटबुक भर चुके हैं। स्टार क्रिकेट और आज तक जैसे चैनलों ने यह स्टोरी दिखाई, और उसके बाद ईशांत को तीन मैच में 22 विकेट मिले।
हरभजन सिंह के साथ भी एक वादा हुआ—चैंपियंस लीग जीतने पर उन्हें नीता अंबानी से मिलवाया जाएगा। मुंबई इंडियंस ने वह ट्रॉफी जीती और डॉ. राही उस पार्टी में गए, जहां उन्होंने विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर और मलिंगा को करीब से देखा।
“यू कैन नॉट अटेंड दिस इवेंट बाय पेइंग लाख्स ऑफ रूपीस… क्रिकेटर्स की उस अंदर की लाइफ में पार्टी में खड़ा होना, ये सिग्नेचर की कहानी है सर।”
सचिन तेंदुलकर के बारे में उनका दावा और भी सीधा है। उसी पार्टी में उन्होंने सचिन का सिग्नेचर हाथ से लिया और कहा कि यह सिग्नेचर उन्हें 102 का शतक नहीं बनाने देगा—जो एक विवादित लेकिन उनके मुताबिक सटीक भविष्यवाणी थी।
सिद्धार्थ मालिया की भविष्यवाणी
एपिसोड का सबसे चर्चित हिस्सा सिद्धार्थ मालिया, यानी विजय मालिया के बेटे, का सिग्नेचर है। डॉ. राही ने अक्टूबर 2011 में एक आईपीएल पार्टी में उनका सिग्नेचर हाथ से लिया था। सिद्धार्थ ने अपने नाम के नीचे सरनेम लिखा था।
“जिस व्यक्ति ने नाम के नीचे सरनेम लिख दिया, वो व्यक्ति अर्श से फर्श पे आएगा और फाइनेंसियल कर्जे में जाएगा।”
डॉ. राही इसी पैटर्न को अमिताभ बच्चन के पुराने सिग्नेचर और माइकल जैक्सन के हस्ताक्षर से भी जोड़ते हैं, जहां नाम के नीचे सरनेम अलग से लिखा जाता था। उनका तर्क है कि टैलेंट से कोई भी पोजीशन तक पहुंच सकता है, लेकिन वहां टिके रहने और सुकून से रहने के लिए सिग्नेचर में “गुड लक एनर्जी” जरूरी है।
सिग्नेचर योग: सिर्फ सिग्नेचर बदलना काफी नहीं
डॉ. राही साफ कहते हैं कि सिर्फ सिग्नेचर बदल देना कोई जादू नहीं है। उन्होंने अपनी बात को गीता की मिसाल से समझाया—बार-बार गीता खरीद लेने से कुछ नहीं होता, जब तक उसे पढ़ा न जाए। इसी तरह नया सिग्नेचर बनने के बाद उसे रोज़ाना कॉपी में तीन से छह महीने तक बार-बार लिखना पड़ता है, जिसे वे “सिग्नेचर सिद्ध करना” कहते हैं।
“साधना तुम्हें ही पड़ेगा। नहीं लिख सकते तो तुम्हारे एक करोड़ भी देना बेकार है। कोई ये जादू मंतर नहीं है सर।”
उनका यह भी दावा है कि गुड लक सिग्नेचर में एक कॉमन बात होती है—90% नेम विज़िबल रहता है, यानी नाम पढ़ने लायक साफ लिखा होता है। इसके उलट यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल जैसे मौजूदा क्रिकेटरों के सिग्नेचर को वे “अनरीडेबल” और नेगेटिव एनर्जी वाला बताते हैं, जिस वजह से टैलेंट होने के बावजूद टीम सिलेक्शन और ट्रॉफी में रुकावट आती रहती है, ऐसा उनका मानना है।
बिजनेस, फाइनेंस और घर की महिलाओं का सिग्नेचर
पॉडकास्ट में डॉ. राही ने बिजनेस लॉस से जूझ रहे क्लाइंट्स की भी बात की, जिन्हें वे 6 से 16 महीने का पेशेंस दिखाने को कहते हैं। एक दिलचस्प सुझाव यह भी था कि पुरुष अपनी पत्नी या बेटी के सिग्नेचर में “लक्ष्मी योग” डालने पर ध्यान दें, क्योंकि उनके अनुभव में इससे परिवार का फाइनेंस बेहतर होता देखा गया है। खुद उनकी पत्नी रोज़ाना तीन-चार पेज सिग्नेचर लिखती हैं, जिसे वे अपने घर की फाइनेंशियल स्थिरता से जोड़ते हैं।
- सिग्नेचर बदलना पहला कदम है, उसे रोज़ लिखकर “सिद्ध” करना असली काम है।
- नाम के नीचे अलग से सरनेम लिखने वाले पैटर्न को वे रिस्क का संकेत मानते हैं।
- सिग्नेचर में नाम का साफ और पढ़ने लायक होना गुड लक एनर्जी की पहली शर्त है।
- सिर्फ सलाह लेने से कुछ नहीं बदलता, अभ्यास खुद व्यक्ति को करना पड़ता है।
अपनी संघर्ष से सफलता की कहानी को वे सिर्फ अपने भाग्य की नहीं बल्कि एक दोहराई जा सकने वाली प्रक्रिया की तरह पेश करते हैं—चाहे आप इसे विज्ञान मानें या विश्वास, उनका अनुभव यही कहता है कि बदलाव की शुरुआत खुद से करनी पड़ती है। जो लोग उद्यमियों की कहानियाँ से प्रेरणा लेते हैं, उनके लिए भी यह एक अलग नजरिया है—असफलता के दौर में हार मानने के बजाय अपने तरीके पर टिके रहने का।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी क्या है?
डॉ. राही रमेश यादव के मुताबिक यह एक तरीका है जिसमें किसी व्यक्ति के हस्ताक्षर (सिग्नेचर) के ग्राफिक पैटर्न को बदलकर उसकी सोच, करियर और किस्मत पर असर डालने का दावा किया जाता है।
डॉ. राही रमेश यादव कौन हैं?
वे इंडियन एयरफोर्स के रिटायर्ड सार्जेंट हैं जिन्होंने 2008 में सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी की शुरुआत की और आज वे Signature Yog Meditation के फाउंडर और ग्राफोलॉजी एक्सपर्ट हैं।
क्या सिग्नेचर बदलने से जिंदगी बदल जाती है, यह विश्वास पर काम करता है या साइंस पर?
डॉ. राही का दावा है कि यह सिर्फ विश्वास नहीं बल्कि सिग्नेचर के ग्राफिक डिज़ाइन में सीधे बदलाव से काम करता है, जिसे वे नियमित अभ्यास यानी ‘साधना’ कहते हैं।
डॉ. राही रमेश यादव ने किन क्रिकेटरों के साथ काम किया है?
उनके अनुसार ईशांत शर्मा उनके स्टूडेंट रहे हैं, और उन्होंने सिद्धार्थ मालिया, सचिन तेंदुलकर, अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा के सिग्नेचर पर भी टिप्पणी की है।


