CA की किताबों के बीच बैठा एक लड़का जिसे अपनी पढ़ाई में “मजा नहीं आ रहा” था, आज भारत के प्रधानमंत्री का पोर्ट्रेट बना चुका है और हजारों स्टूडेंट्स को आर्ट सिखा रहा है। द फाउंडर्स ड्रीम के इस बिजनेस पॉडकास्ट हिंदी एपिसोड में होस्ट अभिषेक व्यास के साथ बातचीत में Reyanshh Rahul — आर्टिस्ट, आर्ट एंटरप्रेन्योर और Reyanshh Rahul Academy के फाउंडर — ने अपनी संघर्ष से सफलता की कहानी खुलकर सुनाई। यह एक भारतीय उद्यमी की कहानी है जो सिर्फ पेंटिंग की नहीं है, यह एक ऐसे फैसले की है जो हर उस इंसान के काम आ सकता है जो अपने पैशन और स्टेबिलिटी के बीच फंसा हुआ है।
CA से आर्ट तक: संघर्ष से सफलता की कहानी की शुरुआत
Reyanshh बचपन से ड्राइंग करते थे, स्कूल के हर कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेते थे, लेकिन 11वीं-12वीं में उन्होंने कॉमर्स चुना और फिर CA की तैयारी शुरू कर दी। ढाई-तीन साल बाद उन्हें एहसास हुआ कि कुछ कमी है। उन्होंने इसे बहुत ईमानदारी से बताया:
“कभी भी मेरे को ना एक जो एक बोला जाता है ना कि आपकी एक अपनी पहचान हो। तो मैं जब सीए कर रहा था तो मुझे ऐसा फील होता था कि मैं भी एक भीड़ का हिस्सा बनके रहने वाला हूं।”
यही फीलिंग थी जिसने उन्हें वापस आर्ट की तरफ मोड़ा। उन्होंने पेरेंट्स से बात की, CA छोड़ा, और आर्ट की फील्ड में पूरी तरह उतर गए। जो लोग अपनी फाउंडर की जर्नी में इसी तरह के दोराहे पर खड़े हैं, उनके लिए यह पहला सबक है — जहां मजा नहीं आ रहा, वहां रुकना नहीं चाहिए।
फाइनेंशियल क्राइसिस ने दी असली दिशा
2018 में परिवार ओडिशा से शिफ्ट हुआ और एक बड़े फाइनेंशियल क्राइसिस का सामना करना पड़ा। उस वक्त टीचिंग कोई शौक नहीं बल्कि मजबूरी थी। Reyanshh ने बताया कि उस दौर ने उनकी सोच हमेशा के लिए बदल दी — पीछे मुड़ने का कोई ऑप्शन नहीं बचा था, इसलिए उन्होंने आर्ट को ही करियर बना लिया।
इसी अनुभव से जुड़ी एक बात उन्होंने सबीर भाटिया के साथ हुए अपने पॉडकास्ट से भी दोहराई — धूल का एक कण भी रोशनी में चमक सकता है, तो इंसान तो फिर भी इंसान है। यह सोच आगे चलकर उनके दूसरे ऑब्जर्वेशन में भी दिखती है:
“जिसके पास पैसे कम है वही सबसे बड़ा आर्टिस्ट बनता है, क्योंकि उसको डाउनसाइड मिल चुका है। अब उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है, अब उसके पास बस पाने के लिए सब कुछ है।”
यह लाइन किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए मतलब रखती है जो सेल्फ ग्रोथ की राह पर कम रिसोर्सेज के साथ शुरुआत करने से डर रहा है। उनके मुताबिक, जिनके पास सब कुछ है उनके मन में सिर्फ एक डर रहता है — सब कुछ खो देने का।
पेंटिंग कभी पूरी होती नहीं — दा विंची की सीख
एपिसोड का शीर्षक जिस सवाल से उठता है वह है — एक आर्टिस्ट को कैसे पता चलता है कि उसकी पेंटिंग पूरी हो गई? Reyanshh ने लियोनार्दो दा विंची का हवाला देते हुए कहा:
“पेंटिंग कभी खत्म होती ही नहीं है। एक आर्टिस्ट उसको छोड़ता है, बस वो कभी खत्म नहीं होती।”
उन्होंने मोनालिसा का उदाहरण दिया, जिसमें दा विंची ने सिर्फ होंठों को पेंट करने में 10-12 साल लगाए। यह सिर्फ पेंटिंग की बात नहीं, बल्कि किसी भी काम को लेकर नजरिए की बात है — आर्ट वर्क कितना अच्छा दिख रहा है, उससे ज्यादा जरूरी यह है कि उसे बनाते वक्त कैसी सोच, कैसा प्रोसेस और कैसे फैसले लिए गए।
फॉलोअर्स नहीं, भरोसा बिकता है
लाखों फॉलोअर्स होने के बावजूद कई आर्टिस्ट स्ट्रगल क्यों करते हैं? Reyanshh का जवाब साफ था — सोशल मीडिया पर लोग फॉलोअर्स और लाइक्स की भाषा में सोचते हैं, जबकि असली चीज ट्रस्ट और कनेक्शन है।
“आर्ट सेल नहीं होता है। आर्टिस्ट सेल होता है। और आर्टिस्ट तभी सेल होगा जब आपके सोशल मीडिया कंटेंट में आपका बॉन्ड आपकी ऑडियंस के साथ बन रहा होगा।”
उन्होंने पिकासो की गर्निका और जैक्सन पॉलक के उदाहरण दिए — लोग सिर्फ आर्ट वर्क नहीं देखते, वे यह देखते हैं कि आर्टिस्ट के पीछे की सोच क्या है। उनका कहना है कि AI के दौर में यह और भी जरूरी हो गया है, क्योंकि AI से बनी इमेज के पीछे कोई इंसान नहीं होता — आपकी पहचान ही आपकी पेंटिंग को असली बनाती है।
इस बातचीत में कमाई के तरीकों पर भी खुलकर चर्चा हुई — कमीशन पेंटिंग्स (पोर्ट्रेट्स, पेट पोर्ट्रेट्स, हाउस पोर्ट्रेट्स), ब्रांड कोलैबोरेशन और टीचिंग। यह किसी भी ऐसी सफलता की कहानी का जरूरी हिस्सा है जो पैशन को प्रोफेशन में बदलना चाहता है।
डिग्री नहीं, स्किल मायने रखती है
क्या आर्टिस्ट बनने के लिए फॉर्मल एजुकेशन या डिग्री जरूरी है? Reyanshh का जवाब बिल्कुल व्यावहारिक था — डिग्री सिर्फ एक प्रमाण है, जबकि एजुकेशन असली चीज है। उन्होंने अरिजीत सिंह का उदाहरण देते हुए समझाया कि कोई कॉन्सर्ट में गाना सुनने से पहले डिग्री नहीं मांगता, स्किल देखी जाती है।
उनकी एकेडमी का पहला गोल ही यही है — टेक्निकल स्ट्रेंथ को मजबूत करना, क्योंकि उनके मुताबिक भारत में आर्टिस्ट की सबसे बड़ी कमजोरी यही है। दूसरा गोल है आर्टिस्ट को सोशल मीडिया, बिजनेस और टीम बनाने जैसी चीजें सिखाना, ताकि वे अपनी जिंदगी को बेहतर प्लान कर सकें।
- कोर टेक्निकल स्किल (वैल्यूज, कंपोजिशन, शेप्स) पहले क्लियर होनी चाहिए
- रेफरेंस से नहीं, जहां मुमकिन हो लाइव सब्जेक्ट से पेंटिंग सीखना बेहतर है
- सोशल मीडिया पर सिर्फ आर्ट वर्क नहीं, उसके पीछे की कहानी शेयर करनी चाहिए
- मार्केट में क्या सेल हो रहा है, उसे देखकर अपना स्टाइल नहीं बदलना चाहिए
पेरेंट्स का सपोर्ट और एकेडमी की असल पहचान
Reyanshh मानते हैं कि ज्यादातर पेरेंट्स बच्चों को आर्टिस्ट बनने के लिए इसलिए सपोर्ट नहीं करते क्योंकि उनके पास इस फील्ड को लेकर क्लैरिटी नहीं है, न कि इसलिए कि वे बच्चों का भला नहीं चाहते। इस पर उनकी एक लाइन बहुत गहरी है:
“अगर पापा ही ये बोल दे ना किसी बच्चे को, ‘तू कर ले मैं हूं’ — मैं बोल रहा हूं पूरी जिंदगी बदल जाएगी उस आदमी की।”
रेयांश राहुल एकेडमी आज 14 साल से ऊपर के सीरियस लर्नर्स पर फोकस करती है। उन्होंने एक ऐसी स्टूडेंट का जिक्र किया जो 40 की उम्र में शादी के बाद छूटे आर्ट को वापस पकड़कर आज महाराष्ट्र में अपना आर्ट स्कूल चला रही हैं, और एक ऐसी स्टूडेंट का भी जिसने कैंसर से जूझते हुए पेंटिंग सीखना शुरू किया। इन उदाहरणों से साफ है कि उम्र या सिचुएशन कभी रुकावट नहीं होती — शुरुआत कभी भी हो सकती है।
यह बातचीत किसी भी मोटिवेशनल पॉडकास्ट से कहीं ज्यादा व्यावहारिक है, क्योंकि यह सिर्फ प्रेरणा नहीं, बल्कि आर्ट को बिजनेस में बदलने का रास्ता भी दिखाती है।
होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Reyanshh Rahul कौन हैं?
Reyanshh Rahul एक आर्टिस्ट, आर्ट एंटरप्रेन्योर और Reyanshh Rahul Academy के फाउंडर हैं जिन्होंने भारत के प्रधानमंत्री का पोर्ट्रेट बनाया है और हजारों स्टूडेंट्स को आर्ट सिखाया है।
Reyanshh Rahul ने CA की पढ़ाई क्यों छोड़ी?
उन्होंने बताया कि CA करते वक्त उन्हें मजा नहीं आ रहा था और अपनी पहचान खोने जैसा महसूस होता था, इसलिए उन्होंने पेरेंट्स से बात कर CA छोड़कर आर्ट में करियर बनाने का फैसला किया।
आर्टिस्ट पैसे कैसे कमा सकते हैं?
एपिसोड में कमीशन पेंटिंग्स, पोर्ट्रेट्स, पेट पोर्ट्रेट्स, हाउस पोर्ट्रेट्स, ब्रांड कोलैबोरेशन और आर्ट टीचिंग जैसे तरीके बताए गए हैं जिनसे आर्टिस्ट इनकम बना सकते हैं।
क्या आर्टिस्ट बनने के लिए डिग्री जरूरी है?
Reyanshh Rahul के अनुसार डिग्री जरूरी नहीं, एजुकेशन और टेक्निकल स्किल जरूरी है क्योंकि लोग आपकी डिग्री नहीं बल्कि आपके आर्ट वर्क और कनेक्शन को देखकर आप पर भरोसा करते हैं।
फॉलोअर्स ज्यादा होने के बावजूद आर्टिस्ट स्ट्रगल क्यों करते हैं?
क्योंकि असली फर्क फॉलोअर्स या लाइक्स से नहीं, बल्कि ऑडियंस के भरोसे और पर्सनल बॉन्ड से पड़ता है — आर्ट नहीं, आर्टिस्ट सेल होता है।


