Manav Kakkar on The Founder's Dream podcast

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फार्म हाउस का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग में बड़े बंगले और भारी-भरकम बैंक बैलेंस वाली तस्वीर बनती है। लेकिन The Founder’s Dream पॉडकास्ट के इस एपिसोड में होस्ट अभिषेक व्यास ने जब Kushal Multi Developers Pvt. Ltd. के डायरेक्टर मानव कक्कड़ से यही सवाल पूछा, तो जवाब थोड़ा अलग निकला। इस Manav Kakkar इंटरव्यू में वो बताते हैं कि फार्म हाउस अब सिर्फ अमीरों का शौक नहीं रहा, स्कैम से कैसे बचें, और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ने गुड़गांव के आसपास की जमीन का खेल कैसे बदल दिया है।

फार्म हाउस अब सिर्फ अमीरों का शौक नहीं

मानव कक्कड़ की पूरी कहानी एक सीधे-सादे मुश्किल सवाल से शुरू होती है — लोग इतनी मेहनत किस लिए करते हैं? उनका जवाब है: खुशी के लिए। उन्होंने देखा कि दिल्ली में अच्छे-खासे पैसे वाले उनके दोस्तों के पेरेंट्स भी हफ्ते भर ट्रैफिक और काम के दबाव में थके-हारे रहते थे, और सिर्फ शनिवार-रविवार को छतरपुर के फार्म हाउस पर जाकर खुश दिखते थे।

हैप्पीनेस एक ऐसी चीज है, आई थिंक दैट शैल बी द राइट ऑफ़ एवरीवन। हर किसी का एक हक होना चाहिए।

यही सोच लेकर उन्होंने 2012 में Kushal Farms के नाम से अपना पहला फार्म हाउस प्रोजेक्ट शुरू किया, जहां ज़मीन ₹400 प्रति गज के हिसाब से थी। बहुत लोगों ने तब मज़ाक भी उड़ाया कि इतने दाम में तो मिट्टी भी नहीं निकलेगी, लेकिन उसी प्रोजेक्ट से उनकी यह यात्रा शुरू हुई जिसमें उन्होंने अब तक 3000 से ज़्यादा फार्म हाउस बेचे हैं और करीब 1500 प्लॉट्स उनके पोर्टफोलियो में हैं। दिलचस्प बात यह है कि इतना सब करने के बाद भी मानव के पास अभी खुद का कोई तैयार फार्म हाउस नहीं है — उनका एक प्रोजेक्ट अभी कंप्लीशन के करीब है।

Manav Kakkar इंटरव्यू: मैक्स लाइफ से रियल एस्टेट तक का सफर

रियल एस्टेट में आने से पहले मानव कक्कड़ मैक्स लाइफ के साथ काम कर रहे थे। लेकिन जॉब के दौरान भी उनकी दिलचस्पी हमेशा रियल एस्टेट में बनी रही, क्योंकि उन्होंने देखा कि नौकरी या बिज़नेस से होने वाली कमाई और रियल एस्टेट में हुए अप्रिसिएशन के बीच हमेशा बड़ा फर्क रहता है। इसी समझ के साथ उन्होंने विराट नगर में अपना पहला रेज़िडेंशियल-कमर्शियल प्रोजेक्ट किया, उसके बाद दो और प्रोजेक्ट किए, और फिर फार्म हाउस की तरफ पूरी तरह शिफ्ट हो गए।

आज उनकी टीम का लक्ष्य साफ है — अगले तीन सालों में 300 लोगों को यह “खुशी” देना। जो लोग रियल एस्टेट से जुड़े बिज़नेस आइडिया की तलाश में हैं, उनके लिए यह रियल एस्टेट बिज़नेस पर यह पॉडकास्ट भी उतनी ही काम की बातें बताता है।

रिटर्न के झूठे वादे और स्कैम से कैसे बचें

आजकल हर दूसरी रियल एस्टेट कंपनी 21% या 200% रिटर्न का दावा करती दिखती है। इस पर मानव कक्कड़ का रुख साफ है — भविष्य पर कोई कमिटमेंट नहीं किया जा सकता।

अगर वो 21 का 42 भी होगा वो आपका है। अगर वो 200 का 400 भी होगा वो आपका है। अगर वो 200 का 100 रह जाएगा वो भी, एंड इट शैल नॉट बी कमिटेड।

उन्होंने यह भी बताया कि लीज़ एग्रीमेंट वाले कई मॉडलों में असल में निवेशक का ही पैसा साल-दर-साल वापस करके उसे “रिटर्न” बताया जाता है, जबकि कंपनी उसी बीच निवेशक का पैसा इस्तेमाल करती रहती है। एक और नया ट्रेंड जिससे सावधान रहने को कहा गया — मुफ्त विज़िट के नाम पर लग्ज़री गाड़ियां, यहां तक कि Lamborghini तक भेजकर ग्राहक पर प्रेशर बनाना। मानव की सलाह सीधी है: ऐसे ऑफर के झांसे में न आएं, खुद प्रॉपर्टी देखने जाएं, और डेवलपर के पुराने डिलीवर किए प्रोजेक्ट्स पहले से जाकर चेक करें। रियल एस्टेट में दिक्कत हमेशा दो जगह ही आती है — डॉक्यूमेंटेशन या पज़ेशन — और यह सीधी जांच हर खरीदार को खुद करनी चाहिए।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ने बदला गुड़गांव का नक्शा

भारत में रेवेन्यू राज्य का विषय है, इसलिए हर राज्य की फार्म हाउस को लेकर अलग पॉलिसी है। राजस्थान हमेशा से फार्म हाउस के लिए सबसे अनुकूल राज्य रहा है, लेकिन पहले डेवलपर्स को गोवा NH8 जाना पड़ता था जो गुड़गांव से डेढ़-दो घंटे दूर था। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे आने से यह दूरी घटकर करीब एक घंटा रह गई है, और नए एग्ज़िट बनने के बाद यह और कम होगी।

इसी वजह से नीमराना, बहरोड़, तिजारा और नौगांव जैसे इलाके गुड़गांव वालों के सेकंड होम डेस्टिनेशन बनते जा रहे हैं। मानव बताते हैं कि गुड़गांव देश के उन शहरों में से है जहां सभी सेगमेंट में सबसे ज़्यादा डिस्पोज़ेबल इनकम है, इसलिए लोग प्राइवेट स्विमिंग पूल और पार्टी स्पेस वाले सेकंड होम ढूंढते हैं। उनके मौजूदा प्रोजेक्ट्स गुड़गांव से करीब एक घंटे की दूरी पर हैं — दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे वाले 70 लाख रुपये से शुरू होते हैं, जबकि दिल्ली-जयपुर हाईवे वाले 45 लाख रुपये से, और प्लॉट का साइज़ लगभग 1220 स्क्वायर यार्ड यानी एक एकड़ के चौथाई से थोड़ा ज़्यादा होता है।

कोविड के बाद एक और बड़ा बदलाव आया है — पहले क्लाइंट फार्म हाउस को सिर्फ वीकेंड गेटअवे की तरह इस्तेमाल करते थे, अब कई क्लाइंट वहीं शिफ्ट होने की सोच रहे हैं और सिर्फ वीकेंड पर मूवी, शॉपिंग या पार्टी के लिए गुड़गांव-दिल्ली आने की योजना बना रहे हैं। मानव इसे “360 डिग्री शिफ्ट” कहते हैं।

किराए की कमाई और सही एंट्री पॉइंट

Airbnb जैसे प्लेटफॉर्म के आने से फार्म हाउस अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, स्मार्ट रेंटल एसेट भी बन गए हैं। मानव बताते हैं कि उनके प्रोजेक्ट्स में कुछ फार्म हाउस को Airbnb और Google पर 4.89-4.9 की रेटिंग मिल चुकी है। जब मालिक को खुद इस्तेमाल नहीं करना हो, वो उसे किराए पर दे सकते हैं, और जब ज़रूरत हो तो तारीख ब्लॉक करके खुद परिवार के साथ जा सकते हैं — फ्लैट किराए पर देने से यह मॉडल इसी वजह से बेहतर है क्योंकि प्रॉपर्टी आपकी ही बनी रहती है।

रियल एस्टेट में तेजी हमेशा एक तय क्रम में आती है — पहले कमर्शियल, फिर रेज़िडेंशियल, और आखिर में एग्रीकल्चर यानी फार्म हाउस सेगमेंट, जो सबसे लंबा चलता है। मानव के मुताबिक पिछले आठ महीनों से यही तेजी फार्म हाउस सेगमेंट में चल रही है। जो लोग रियल एस्टेट में अपनी शुरुआत की कहानी से प्रेरणा लेना चाहते हैं, उनके लिए रामकुमार की एंटरप्रेन्योर सफलता की कहानी भी इसी इंडस्ट्री की असलियत दिखाती है।

जो कोई खुद फार्म हाउस डेवलपर बनना चाहता है, मानव के मुताबिक अच्छी लोकेशन — हाईवे या शहर के पास — में एंट्री के लिए शुरुआती तौर पर 5 से 10 करोड़ रुपये का निवेश चाहिए। लेकिन सिर्फ पैसा काफी नहीं, असली चुनौती है प्रोजेक्ट को टिकाऊ बनाना।

हैप्पी कस्टमर इज़ वर्थ मोर देन अ मिलियन स्पेंड ऑन एडवर्टाइजमेंट। अगर उसके दिमाग में वो है, देन दे विल बी नो लुकिंग बैक।

पहले घर, फिर फार्म हाउस

बातचीत के आखिर में मानव साफ सलाह देते हैं — पहले अपना पहला घर खरीदें, क्योंकि वह बुनियादी ज़रूरत है। फार्म हाउस “सेकंड होम” है, इसलिए निवेश के नज़रिए से भी इसे बाद में ही देखना चाहिए। जमीन में निवेश हमेशा बढ़ता है, लेकिन असल रिटर्न वहीं आता है जहां लोग रहने और इस्तेमाल करने आते हैं — सिर्फ अच्छी बाउंड्री, सड़क और स्ट्रीट लाइट बना देने से इन्वेस्टमेंट नहीं बढ़ती, अगर वहां एंड-यूज़र न पहुंचे। राजस्थान बेल्ट में ही फिलहाल करीब 25-30 डेवलपर्स गुड़गांव-दिल्ली के ग्राहकों को टारगेट कर रहे हैं, इसलिए ग्राहक के नज़रिए से प्रोजेक्ट बनाना ही असली फर्क पैदा करता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

फार्म हाउस खरीदने के लिए न्यूनतम कितना बजट चाहिए?

मानव कक्कड़ के मुताबिक दिल्ली-जयपुर हाईवे पर उनके प्रोजेक्ट 45 लाख रुपये से शुरू होते हैं जबकि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे वाले प्रोजेक्ट 70 लाख रुपये से शुरू होते हैं, और प्लॉट का साइज़ करीब 1220 स्क्वायर यार्ड यानी एक एकड़ के चौथाई हिस्से से थोड़ा ज्यादा होता है।

रियल एस्टेट में 21% या 200% रिटर्न के वादे कितने सच हैं?

मानव कक्कड़ कहते हैं कि भविष्य के रिटर्न पर कभी कमिटमेंट नहीं किया जा सकता, चाहे मुनाफा हो या नुकसान वो निवेशक का ही रहता है, और उन्होंने बड़े-बड़े डेवलपर्स को ऐसे कमिटमेंट करके दिवालिया होते देखा है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ने फार्म हाउस मार्केट को कैसे बदला?

पहले डेवलपर्स को राजस्थान के फार्म हाउस प्रोजेक्ट्स के लिए गोवा NH8 जाना पड़ता था जो डेढ़-दो घंटे का रास्ता था, अब दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से गुड़गांव से यह दूरी घटकर करीब एक घंटा या उससे कम रह गई है, जिससे नीमराना, तिजारा और नौगांव जैसे इलाके गुड़गांव के सेकंड होम डेस्टिनेशन बन रहे हैं।

फार्म हाउस खरीदते वक्त किन चीजों की जांच करनी चाहिए?

मानव कक्कड़ के अनुसार रियल एस्टेट में सिर्फ दो चीजों में दिक्कत आती है: डॉक्यूमेंटेशन और पज़ेशन, इसलिए खरीदने से पहले दोनों अच्छी तरह चेक करें और डेवलपर के पुराने डिलीवर किए प्रोजेक्ट्स जाकर खुद देखें।

फार्म हाउस डेवलपर बनने के लिए शुरुआती निवेश कितना चाहिए?

मानव कक्कड़ बताते हैं कि यह जमीन की लोकेशन पर निर्भर करता है, लेकिन अगर हाईवे या शहर के पास अच्छा प्रोजेक्ट करना है तो शुरुआती तौर पर करीब 5 से 10 करोड़ रुपये का निवेश चाहिए।

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About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

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