Nitin Shankar Shinde on The Founder's Dream podcast

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क्या एक छोटी सी कंप्लायंस गलती किसी बिजनेस को कोर्ट-कचहरी तक पहुंचा सकती है? इस Nitin Shankar Shinde इंटरव्यू में द फाउंडर्स ड्रीम के होस्ट अभिषेक व्यास ने लेबर लॉ स्ट्रेटजिस्ट, रोल आर्किटेक्ट और कंप्लायंस एक्सपर्ट नितिन शंकर शिंदे से यही सवाल पूछा। जवाब में निकलकर आईं PF, ESIC, POSH और नए लेबर कोड से जुड़ी वो बातें जो हर फाउंडर, चाहे उसका बिजनेस कितना भी छोटा हो, जानना जरूरी है।

Nitin Shankar Shinde इंटरव्यू में निकली सबसे बड़ी बात: लेबर लॉ साइज नहीं देखता

बहुत से फाउंडर सोचते हैं कि लेबर लॉ सिर्फ बड़ी कंपनियों का मामला है। नितिन इस धारणा को सीधे खारिज करते हैं। उनके मुताबिक लेबर लॉ की एप्लीकेबिलिटी कंपनी के साइज पर नहीं, बल्कि एंप्लॉय की गिनती पर टिकी है।

  • एक भी एंप्लॉय है तो प्रोफेशनल टैक्स लागू हो जाता है, जो राज्य के हिसाब से डिडक्ट करना होता है।
  • पांच से ज्यादा एंप्लॉय होते ही लेबर वेलफेयर फंड (LWF) लागू हो जाता है, जिसे हर छह महीने में भरना पड़ता है।
  • दस के ऊपर जाते ही ESIC, मैटरनिटी, ग्रेचुटी और POSH एक्ट अपने आप लागू हो जाते हैं।
  • बीस एंप्लॉय पार होते ही बोनस, PF सहित लगभग सारे एक्ट लागू हो जाते हैं।

नितिन साफ कहते हैं कि शुरुआत में छोटी-मोटी गलती माफ हो सकती है अगर वो अनजाने में हुई हो, लेकिन जानबूझकर नजरअंदाज करना मुश्किल में डाल सकता है। उनका कहना है:

कंप्लायंस इज लाइक योर कंपनीज़ इंश्योरेंस। विदाउट कंप्लायंस आपका बिजनेस ग्रो कर सकते हो, उसको सस्टेन नहीं कर सकते।

POSH कंप्लायंस और इंटरनल कमिटी क्यों जरूरी है

POSH एक्ट 2013 में आया था, लेकिन नितिन के मुताबिक इसका असली अवेयरनेस अभी बढ़ रहा है। अगर कंपनी में दस से ज्यादा एंप्लॉय हैं तो यह ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में आती है और इंटरनल कमिटी (IC) बनाना, न्यूट्रल पॉलिसी बनाना और कमिटी की ट्रेनिंग करवाना अनिवार्य हो जाता है।

डिफॉल्ट होने पर गवर्नमेंट 50,000 रुपये तक का फाइन लगा सकती है, और बार-बार वही चूक दोहराने पर लाइसेंस कैंसिल होने तक की नौबत आ सकती है। नितिन टीसीएस नाशिक के एक मामले का जिक्र करते हैं जहां विक्टिम ने IC के पास शिकायत दी थी लेकिन उसे अनदेखा कर दिया गया, और बाद में यह मामला सामने आने से राज्य की छवि पर असर पड़ा। इसी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने 14 मई 2026 को एक नोटिफिकेशन निकाला जिसमें राज्यभर के 4000 एरिया ऑफिसर्स को बिना पूर्व सूचना कंपनियों में जाकर POSH कंप्लायंस चेक करने और सीधे फाइन लगाने का अधिकार दिया गया।

नितिन एक दिलचस्प पहलू भी जोड़ते हैं — पुरुष कर्मचारी भी POSH के बारे में असुरक्षित महसूस करते हैं, और उनके मुताबिक डाटा कहता है कि 24% पुरुष भी वर्कप्लेस हैरेसमेंट फेस करते हैं। लेकिन वे इस एक्ट के गलत इस्तेमाल को लेकर भी आगाह करते हैं:

यह एक्ट आपके लिए बना है, इसका मिसयूज न करें। धीरे-धीरे अमेंडमेंट आना शुरू हो जाएगी और एक्ट शायद डिमोलिश हो जाएगा।

PF काटकर जमा न करना क्रिमिनल ऑफेंस है

इस बातचीत का सबसे सीधा हिस्सा PF से जुड़ा रहा। नितिन कहते हैं कि अगर एंप्लॉयर किसी कर्मचारी की सैलरी से PF काटकर अपने पास रख लेता है और डिपार्टमेंट में जमा नहीं करता, तो यह सिर्फ गलती नहीं बल्कि फ्रॉड और क्रिमिनल ऑफेंस है।

किसी का पीएफ काट के अपने पास रखना इट्स अ क्रिमिनल ऑफेंस। आप यह बहुत गलत कर रहे हो।

एंप्लॉय के पास इसके लिए साफ रास्ता है — UAN पोर्टल या उमंग ऐप पर पासबुक चेक करें, HR को मेल डालें, और अगर संतोषजनक जवाब न मिले तो PF के ग्रीवेंस पोर्टल पर सीधे शिकायत दर्ज करें। नितिन यह भी बताते हैं कि अगर गलती से किसी और के नाम से PF जमा हो जाए तो ECR रिवाइज करने की प्रक्रिया है, हालांकि यह थोड़ी टाइम-टेकिंग होती है।

इसी बातचीत में मास ले-ऑफ का विषय भी आया। अगर कंपनी सच में सर्वाइव नहीं कर पा रही, तो एंप्लॉय निकालने में गलत कुछ नहीं, बशर्ते प्रॉपर डॉक्यूमेंटेशन हो और बकाया पेमेंट क्लियर किया जाए। परफॉर्मेंस बेस्ड टर्मिनेशन के लिए नोटिस और सुधार का मौका देना जरूरी है, वरना एंप्लॉय खुद को साबित करके वापस अपनी नौकरी बचा सकता है।

सरकारी नोटिस और इंस्पेक्शन से घबराएं नहीं

नितिन का अनुभव है कि ज्यादातर फाउंडर कंप्लायंस को तब तक प्राथमिकता नहीं देते जब तक नोटिस नहीं आ जाता। इसकी वजह वो साफ बताते हैं:

हमारी इंडस्ट्री में क्या होता है ना सर, जब तक पानी गले तक नहीं आता ना तब तक कोई ज्यादा ध्यान नहीं देता।

जब कोई इंस्पेक्टर कंपनी में आए, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि वो किस डिपार्टमेंट से है — PF, ESIC, PT, LWF या बोनस — क्योंकि एक डिपार्टमेंट का अफसर सिर्फ उसी डिपार्टमेंट से जुड़ा डाटा मांग सकता है। नितिन का सुझाव सीधा है:

आइए सर बैठिए चाय पानी पीजिए। आपको जो भी चाहिए ना, आप मुझे लिख के दो। आपके पास उतनी राइट्स है कि आप बोल सकते हो, मेरा HR अवेलेबल नहीं है, थोड़ा टाइम दो।

हालांकि महाराष्ट्र के नए POSH नोटिफिकेशन में एरिया ऑफिसर्स को यह टाइम देने की बाध्यता नहीं है, वो मौके पर ही कार्रवाई कर सकते हैं। रिकॉर्ड मेंटेनेंस को लेकर नितिन बार-बार जोर देते हैं कि कम से कम पांच साल का डाटा सुरक्षित रखना चाहिए, क्योंकि गवर्नमेंट के सिस्टम क्रैश होने या फाइलें गायब होने पर भी जिम्मेदारी कंपनी की ही बनती है।

नवंबर 2025 का नया वेज कोड क्या बदलता है

लेबर डिपार्टमेंट ने नवंबर 2025 में नया वेज कोड लागू किया, जिसमें सबसे बड़ा बदलाव इंस्पेक्टर की भूमिका का है। नितिन बताते हैं:

जो भी इंस्पेक्टर होगा, ही विल बी फैसिलिटेटर ज्यादा होगा और इंस्पेक्टर कम होगा। आपसे गलती हुई है तो वो गाइड करेगा, एडवाइस देगा कि इसको इस तरह सुधारिए।

यह बदलाव उन शिकायतों के बाद आया है जो कई फाउंडर प्रोफेशनल टैक्स डिपार्टमेंट के ग्लिच से जुड़े नोटिस को लेकर कर रहे थे। नितिन इंफोसिस के पूर्व CFO मोहनदास भाई के इंटरव्यू का भी जिक्र करते हैं, जिन्होंने कहा था कि इंस्पेक्शन के नाम पर फुल हैरेसमेंट होता है और इससे फाउंडर कंपनी बनाने से ही कतराने लगते हैं। नया कोड इसी समस्या को कम करने की कोशिश है।

नितिन शंकर शिंदे का सफर: नेटवर्किंग से बना भरोसा

यह Nitin Shankar Shinde इंटरव्यू सिर्फ कानून की बात नहीं, बल्कि एक उद्यमी की सफलता की कहानी भी है, जो दिखाती है कि स्टार्टअप कैसे शुरू करें। 2014 में कंपनी शुरू करने से पहले नितिन लेबर लॉ में डिप्लोमा कर चुके थे और इसी फील्ड में जॉब कर रहे थे, जहां वे कंप्लायंस देखते थे और HR टीम की मदद करते थे। जब वो HR साथी कंपनी छोड़कर गए, तो नितिन ने खुद कुछ शुरू करने का फैसला किया।

उनका पहला क्लाइंट किसी बड़ी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी से नहीं, बल्कि दोस्तों के भरोसे से आया। उन्होंने अपने परिचितों को सीधे कॉल करके बताया कि वे लेबर लॉ कंप्लायंस सर्विस शुरू कर रहे हैं, और उनके एक दोस्त प्रफुल, जो एक कंपनी में HR थे, ने तुरंत काम देना शुरू किया — वो रिश्ता आज तक चल रहा है। इसके बाद BNI सुपर अचीवर्स नेटवर्किंग चैप्टर, जिससे वे 2018 से जुड़े हैं, ने उनके बिजनेस में भरोसा बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। नितिन इसे साफ शब्दों में कहते हैं:

बीएनआई की वजह से मेरा मार्केट में ट्रस्ट बिल्ड हुआ। माउथ पब्लिसिटी लोग एक दूसरे को जाके बोलते हैं, और वहीं से असली बिजनेस आता है।

यह पूरी यात्रा उन लोगों के लिए एक सीख है जो उद्यमियों की कहानियाँ से यह समझना चाहते हैं कि बिजनेस कैसे बढ़ाएं — भरोसा और सही नेटवर्क किसी भी कंसल्टिंग बिजनेस की नींव बन सकते हैं।

फाउंडर्स के लिए सीधी सीख

  • एंप्लॉय की गिनती बढ़ते ही कंप्लायंस की जिम्मेदारी भी बढ़ती है, इसे शुरुआत से ही ट्रैक करें।
  • POSH पॉलिसी सिर्फ कागज पर नहीं, असल ट्रेनिंग और IC के साथ होनी चाहिए।
  • PF, ESIC जैसे डिडक्शन का रिकॉर्ड हर कर्मचारी खुद भी चेक कर सकता है, UAN पोर्टल पर।
  • सरकारी नोटिस से घबराने की बजाय सही डॉक्यूमेंटेशन और समय पर जवाब देना बेहतर रणनीति है।
  • 50-60-100 से ज्यादा हेडकाउंट वाली कंपनियों के लिए एक्सपर्ट के बिना कंप्लायंस मैनेज करना मुश्किल है।

जो लोग अपने बिजनेस को लंबे समय तक टिकाना चाहते हैं, उनके लिए यह एपिसोड सेल्फ ग्रोथ से जुड़ी एक जरूरी सीख भी है — कानून को नजरअंदाज करना ग्रोथ को तेज नहीं, बल्कि नाजुक बनाता है।

होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छोटी कंपनी को लेबर लॉ कंप्लायंस की जरूरत कब से पड़ती है?

अगर आपके पास एक भी एंप्लॉय है तो प्रोफेशनल टैक्स लागू हो जाता है, पांच से ज्यादा एंप्लॉय पर लेबर वेलफेयर फंड, और दस के ऊपर जाते ही ESIC, मैटरनिटी, ग्रेचुटी और POSH एक्ट लागू हो जाते हैं।

POSH कंप्लायंस में क्या-क्या जरूरी है?

अगर कंपनी में दस से ज्यादा एंप्लॉय हैं तो इंटरनल कमिटी बनानी जरूरी है, एक न्यूट्रल पॉलिसी होनी चाहिए और कमिटी की ट्रेनिंग होनी चाहिए, वरना गवर्नमेंट 50,000 रुपये तक का फाइन लगा सकती है।

अगर कोई एंप्लॉयर PF काटकर जमा नहीं करता तो क्या करें?

यह क्रिमिनल ऑफेंस है। एंप्लॉय पहले HR को मेल करे, UMANG ऐप या UAN पोर्टल पर पासबुक चेक करे, और अगर रिस्पांस न मिले तो PF के ग्रीवेंस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करे।

नए लेबर कोड 2025 में क्या बदलाव आया है?

नवंबर 2025 में आए नए वेज कोड के मुताबिक अब इंस्पेक्टर ज्यादा फैसिलिटेटर की भूमिका में होगा, यानी गलती पकड़ने की बजाय पहले गाइड और सुधार का मौका देगा।

गवर्नमेंट नोटिस आने पर फाउंडर को सबसे पहले क्या करना चाहिए?

घबराने की जरूरत नहीं, यह देखना चाहिए कि नोटिस किस डिपार्टमेंट से है, जो डाटा मांगा जाए वो लिखित में लें और जरूरत पड़ने पर समय मांगा जा सकता है।

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About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

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