Sanjeev Singh on The Founder's Dream podcast

Read this article in English

पूरा एपिसोड देखिए

घर खरीदना ज़्यादातर भारतीय परिवारों की जिंदगी की सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट होती है, और यही वो मौका है जहां सबसे ज़्यादा गलतियां भी होती हैं। द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट के होस्ट अभिषेक व्यास ने इस बिजनेस पॉडकास्ट हिंदी एपिसोड में SKJ Landbase Pvt Ltd के फाउंडर और MD Sanjeev Singh से यही सवाल पूछा — प्रॉपर्टी खरीदते वक्त लोग सबसे कॉमन गलती क्या करते हैं। इस Sanjeev Singh इंटरव्यू में 25 साल के रियल एस्टेट अनुभव से निकली सीधी, बिना लाग-लपेट वाली बातें हैं — अंडर-कंस्ट्रक्शन बनाम रेडी-टू-मूव से लेकर DLF जैसे ब्रांड्स के दबदबे और फ्रॉड के असली तरीकों तक।

Sanjeev Singh इंटरव्यू में पहली गलती: बिना रियल्टर के सीधे डेवलपर के पास पहुंचना

संजीव सिंह की सबसे पहली और सबसे ज़ोर देकर कही गई बात यही है कि प्रॉपर्टी खरीदने से पहले एक रेप्युटेड रियल्टर हायर करना चाहिए। उनकी दलील सीधी है — बीमारी में डॉक्टर चाहिए, कानूनी मामले में वकील, तो प्रॉपर्टी के लिए रियल्टर क्यों नहीं?

यू शुड हैव अ प्रोफेशनल। ओनली प्रोफेशनल कैन डू द राइट जॉब।

वे एक आसान उदाहरण देते हैं — अगर आप शर्ट खरीदने एक शोरूम में चले जाएं, तो वो शोरूम सिर्फ अपनी ही शर्ट बेचने की कोशिश करेगा। वैसे ही डायरेक्ट किसी डेवलपर के पास जाने पर वो अपना ही प्रोडक्ट थमाने की कोशिश करेगा, चाहे वो आपकी ज़रूरत के हिसाब से सही हो या न हो। एक भरोसेमंद ब्रोकर या कंसल्टेंट के पास कई डेवलपर्स के विकल्प होते हैं और वो ईमानदारी से बता सकता है कि कौन सी प्रॉपर्टी आपके लिए सही नहीं है।

डेवलपर की पुरानी डिलीवरी जांचना क्यों सबसे जरूरी कदम है

Sanjeev Singh का एक सीधा पैमाना है — अगर किसी डेवलपर ने कम से कम पांच प्रोजेक्ट डिलीवर नहीं किए हैं, तो वे उसे डेवलपर मानते ही नहीं। उनका तर्क है कि जिंदगी भर की बचत किसी के पहले प्रयोग पर दांव पर नहीं लगाई जा सकती।

पास्ट परफॉर्मेंस मे नॉट बी द गारंटी ऑफ़ फ्यूचर परफॉर्मेंस, इट इज़ ऑलवेज एन अश्योरेंस ऑफ़ गुड परफॉर्मेंस।

उनकी सलाह व्यावहारिक है — पांच दिन की छुट्टी निकालकर डेवलपर के पिछले पांच डिलीवर किए गए प्रोजेक्ट्स में जाइए, वहां रह रहे लोगों से बात कीजिए, पूछिए कि प्रॉपर्टी आज किस हालत में है और कितना एप्रिसिएशन आया है। यह जानकारी गूगल रिव्यू से कहीं ज़्यादा भरोसेमंद होती है। इसी विषय पर और गहराई से जानने के लिए फाउंडर की जर्नी से जुड़ी और कहानियां भी पढ़ें।

अंडर-कंस्ट्रक्शन या रेडी-टू-मूव — कौन सही है

इस सवाल पर Sanjeev Singh साफ कहते हैं कि दोनों में कुछ भी गलत नहीं है, बस दोनों के अपने उतार-चढ़ाव हैं। अंडर-कंस्ट्रक्शन में प्रोजेक्ट जैसे आगे बढ़ता है, पैसा देने का समय भी मिलता जाता है, और अगर डेवलपर भरोसेमंद है तो गुड़गांव जैसी जगहों में पिछले तीन-चार साल में लॉन्च रेट से पजेशन तक कीमत दोगुनी तक हो चुकी है।

वहीं रेडी-टू-मूव में पूरा पैसा शुरू में ही देना पड़ता है और रीसेल में कीमत पर मोलभाव ज़्यादा होता है, लेकिन चाबी हाथ में होने का सुकून मिलता है। उनका कहना है कि RERA आने के बाद अंडर-कंस्ट्रक्शन में डिफॉल्ट का डर पहले जितना बड़ा नहीं रहा, बशर्ते डेवलपर भरोसेमंद हो।

DLF जैसे ब्रांड्स मार्केट पर क्यों राज करते हैं

दो प्रॉपर्टी — एक 50 लाख में 2000 स्क्वायर फीट, दूसरी 2 करोड़ में 1000 स्क्वायर फीट — आखिर फर्क कहां है? Sanjeev Singh इसका जवाब सिर्फ ब्रांड वैल्यू तक सीमित नहीं रखते।

दे आर पुटिंग ए ग्रेड मटेरियल, दे आर रोपिंग ऑल इंटरनेशनल कॉन्ट्रक्टर, दे आर ब्रिंगिंग स्ट्रक्चरल इंजीनियर, दे आर ब्रिंगिंग विंड इंजीनियर्स।

वे गुड़गांव के सिस्मिक जोन का उदाहरण देते हैं — जहां जोन फोर का कंस्ट्रक्शन काफी है, वहां DLF सेंट्रल पार्क जोन फाइव के हिसाब से बना रहा है, इसलिए कीमत थोड़ी ज़्यादा है। उनके मुताबिक ग्राहक को कॉन्ट्रैक्टर कौन है, कौन सा सीमेंट और सरिया लग रहा है, ये सवाल अब खुलकर पूछने चाहिए — यही असली क्वालिटी चेक है, न कि सिर्फ लोकेशन या वास्तु।

फ्रॉड कहां होता है और RERA ने कितना बदला

Sanjeev Singh एक दर्दनाक उदाहरण साझा करते हैं जहां एक बुजुर्ग दंपति ने एक डेवलपर से करीब 3 करोड़ की दुकान 12% एश्योर्ड रिटर्न के वादे पर खरीदी। डेढ़ साल रिटर्न मिला, फिर दुकान बनी ही नहीं और दो साल से बंद पड़ी है। उनका सवाल तीखा है — प्रॉपर्टी बनी ही नहीं तो किराया कैसे दिया जा रहा था।

वे मानते हैं कि RERA ने बहुत कुछ बदला है — 10% पेमेंट के बाद अगर BBA साइन नहीं हुआ तो 100% रिफंड मिल सकता है, और 85% पेमेंट के बाद डेवलपर प्रॉपर्टी कैंसिल नहीं कर सकता। लेकिन उनकी राय में रियल दिक्कत एंट्री लेवल की है — कोई भी ₹25,000 की गाड़ी और ₹250 के कार्ड से ब्रोकर बन सकता है, जबकि डॉक्टर बनने में आठ साल लगते हैं। उनका सुझाव है कि अगर रेरा फीस और डिपॉजिट बड़ा कर दिया जाए तो छोटे फ्रॉड अपने आप छंट जाएंगे।

भरोसा ही असली बिजनेस मॉडल है

Sanjeev Singh एक पुरानी घटना सुनाते हैं — 2007 में उन्होंने एक शोरूम से महंगी शर्ट खरीदी जो बाद में खराब निकली, लेकिन उस शोरूम ने शिकायत सुनना तक गवारा नहीं किया। वहीं एक सस्ती दुकान ने वाशिंग टेस्ट कर, कॉफी-बर्गर खिलाकर, वाउचर देकर भरोसा जीता। उसी भरोसे की ताकत को वे अपने बिजनेस में उतारते हैं।

मैनपुलेटिव होना आपको बहुत शॉर्ट टर्म में कुछ फायदा दे सकता है। लॉन्ग टर्म में नहीं दे सकता।

उनका कहना है कि ज़्यादातर उनके कस्टमर अब दोस्त बन चुके हैं और वही आगे रेफरल लाते हैं। लग्ज़री खरीद का पैटर्न पूरी दुनिया में एक जैसा है — लोग रेफरल से ही खरीदते हैं, सीधे शोरूम में घुसकर नहीं। यही वजह है कि वे बार-बार दोहराते हैं कि अपना एक फिक्स्ड ट्रस्टेड रियल एस्टेट कंसल्टेंट रखना चाहिए, वैसे ही जैसे डॉक्टर या वकील नहीं बदला जाता। भारतीय उद्यमी की कहानी के तौर पर यह हिस्सा दिखाता है कि लंबी अवधि का बिजनेस सिर्फ ईमानदारी और ट्रांसपेरेंसी पर टिकता है, शॉर्टकट पर नहीं। ऐसी ही भरोसे पर टिकी सफलता की कहानी सेल्फ-ग्रोथ सेक्शन में भी मिलती है।

गुड़गांव का भविष्य और छोटी शुरुआत से बड़ी कमाई

Sanjeev Singh के मुताबिक भारत की GDP अभी करीब 6.3% के आसपास है और रियल एस्टेट का योगदान सिर्फ 7% है, जबकि चीन में यह आंकड़ा 20% से ऊपर है — यानी उनके शब्दों में असली पार्टी अभी शुरू ही हुई है। गुड़गांव में NRI, दूसरे शहरों के निवेशक और सिर्फ पार्क करने वाले पैसे वाले लोग — तीन तरह के खरीदार एक साथ बाजार में आ रहे हैं।

छोटी शुरुआत को लेकर वे अपना ही उदाहरण देते हैं — करियर की शुरुआत में पांच दोस्तों ने मिलकर 10 लाख की प्रॉपर्टी में 2-2 लाख डालकर निवेश किया था। उनका मानना है कि एक सैलरीड व्यक्ति के अकाउंट में करोड़ों सिर्फ रियल एस्टेट से ही जमा हो सकते हैं, सैलरी बढ़ने से नहीं क्योंकि टैक्स और खर्चे उसे खा जाते हैं।

नथिंग सेल्स लाइक ट्रस्ट। बिल्ट ट्रस्ट, कीप सेलिंग।

किसी भी उद्यमी के लिए यह सबक सिर्फ रियल एस्टेट तक सीमित नहीं — हर बिजनेस में भरोसा बनाना और उसे न तोड़ना ही असली ग्रोथ इंजन है।

  • डायरेक्ट डेवलपर के पास जाने से पहले रेप्युटेड रियल्टर हायर करें।
  • कम से कम पांच डिलीवर किए प्रोजेक्ट चेक करें, रेजिडेंट्स से बात करें।
  • अंडर-कंस्ट्रक्शन में जाएं तो सिर्फ ट्रैक रिकॉर्ड वाले डेवलपर के साथ जाएं।
  • मटेरियल, कॉन्ट्रैक्टर और कंस्ट्रक्शन क्वालिटी के बारे में खुलकर सवाल पूछें।
  • एश्योर्ड रिटर्न जैसे ऑफर्स पर बिना वेरिफिकेशन भरोसा न करें।
  • एक फिक्स्ड ट्रस्टेड कंसल्टेंट रखें, बार-बार न बदलें।

होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रॉपर्टी खरीदते समय सबसे बड़ी गलती क्या होती है?

Sanjeev Singh के मुताबिक सबसे बड़ी गलती बिना किसी रेप्युटेड रियल्टर की मदद लिए डायरेक्ट डेवलपर के पास चले जाना है, क्योंकि डेवलपर हमेशा अपना ही प्रोडक्ट बेचने की कोशिश करेगा।

अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदनी चाहिए या रेडी-टू-मूव?

Sanjeev Singh कहते हैं दोनों के अपने फायदे-नुकसान हैं; अगर डेवलपर भरोसेमंद है और उसने पहले कम से कम पांच प्रोजेक्ट डिलीवर किए हैं तो अंडर-कंस्ट्रक्शन में अच्छा एप्रिसिएशन मिल सकता है।

डेवलपर की विश्वसनीयता कैसे जांचें?

उसके पिछले कम से कम पांच डिलीवर किए गए प्रोजेक्ट्स में जाकर वहां रह रहे रेजिडेंट्स से बात करें और देखें कि प्रॉपर्टी आज किस हालत में है, क्योंकि पास्ट परफॉर्मेंस भविष्य की गारंटी नहीं पर अच्छा संकेत जरूर है।

DLF जैसे ब्रांड्स महंगे क्यों हैं?

Sanjeev Singh बताते हैं कि ये कंपनियां A-ग्रेड मटेरियल, इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्टर और स्ट्रक्चरल-विंड इंजीनियर इस्तेमाल करती हैं, और सिस्मिक जोन फाइव जैसे सुरक्षा मानकों पर बनाती हैं, इसलिए उनकी कीमत ब्रांड, क्वालिटी और सेफ्टी तीनों के लिए होती है।

RERA ने रियल एस्टेट में क्या बदलाव लाया है?

RERA के बाद डेवलपर 10% पेमेंट के बाद अगर BBA साइन नहीं हुआ तो बायर 100% रिफंड ले सकता है, और 85% पेमेंट के बाद डेवलपर प्रॉपर्टी कैंसिल नहीं कर सकता, जिससे डिफॉल्ट के मामलों में तेजी से कमी आई है।

Author Profile

About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required