लॉरी चलाने वाले पिता का बेटा गुजराती मीडियम के एक सरकारी स्कूल में पढ़ता है, कॉलेज में पॉकेट मनी के लिए Vodafone में पार्ट-टाइम जॉब करता है, और कुछ साल बाद अपनी खुद की रियल एस्टेट कंपनी खड़ी कर देता है। यह किसी फिल्म का स्क्रिप्ट नहीं, Prestigiousrealty और SHAH GROUP के फाउंडर रोशन शाह की असली कहानी है। द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट पर होस्ट अभिषेक व्यास के साथ हुई इस बातचीत में रोशन शाह ने अपनी संघर्ष से सफलता की कहानी खुलकर सुनाई, साथ ही रियल एस्टेट इंडस्ट्री के वो पहलू भी बताए जो ग्राहकों को आमतौर पर पता नहीं होते।
गरीबी से रियल एस्टेट तक: संघर्ष से सफलता की कहानी की शुरुआत
रोशन शाह लोअर क्लास परिवार से आते हैं। उनके पिता लॉरी चलाते थे, और घर का माहौल ऐसा था जहां बड़े सपने देखना आम बात नहीं थी। खुद रोशन कहते हैं कि उनके पिता अक्सर कहते थे कि जितनी चादर हो उतना ही पैर फैलाना चाहिए, लेकिन उन्होंने इसे कभी स्वीकार नहीं किया।
मैंने यह सोचा कि मैं गरीब पैदा हुआ हूं। गरीब मरूंगा नहीं।
यह सिर्फ एक जुमला नहीं था। उन्होंने इसे एक साफ मानदंड में बदला: 20 साल की उम्र में गरीब होना आपकी गलती नहीं, 25 में थोड़ी गलती है, लेकिन 30 साल की उम्र में भी गरीब रहना पूरी तरह आपकी अपनी ज़िम्मेदारी है। यही सोच उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी की बुनियाद बनी — पिता जो नहीं कर पाए, उसे पूरा करने की ज़िद।
Vodafone से Prestigiousrealty तक का सफर
अहमदाबाद के कॉलेज में पढ़ाई के दौरान पैसों की तंगी थी, तो रोशन ने 2015 के आसपास Vodafone हाउस में पार्ट-टाइम जॉब दिलवाने का काम शुरू किया, जिसमें इंसेंटिव मिलता था। इसके बाद उन्होंने इंटरनेशनल कॉल सेंटर जॉइन किया, फिर एक कंपनी में काम किया। यहीं से एक डेवलपर ने उन्हें देखा और स्पीच व प्रेजेंटेशन स्किल के आधार पर पुरानी सैलरी से चार गुना ज़्यादा ऑफर देकर रियल एस्टेट में लाया।
2018 में उन्होंने अहमदाबाद में अपनी कंसल्टिंग कंपनी Prestigiousrealty शुरू की। लेकिन शुरुआत आसान नहीं थी — जॉब छोड़ने के बाद उनकी 14 लाख की सेविंग में से 8 लाख रुपये का नुकसान हुआ, क्योंकि छह महीने तक कोई काम नहीं बना।
रातोंरात धंधा नहीं बनता। मेरे को 6 महीने से धंधा ही नहीं हुआ कुछ… यह 10 साल की रात है। एक दिन की है ही नहीं।
उस वक्त वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं था, इसलिए उन्होंने बचे हुए 6 लाख रुपयों के साथ आगे बढ़ने का फैसला लिया। धीरे-धीरे कंसल्टिंग से डेवलपमेंट तक पहुंचे, और आज SHAH GROUP और Palais De Luxe के ज़रिए खुद एक डेवलपर के तौर पर काम कर रहे हैं, जिसका पहला प्रोजेक्ट अभी प्री-लॉन्च स्टेज पर है। रोशन की कहानी बताती है कि कोई भी सफल बिजनेस आइडिया बड़ी पूंजी से नहीं, बल्कि सही मौके पर अपनी स्किल को पहचानने से शुरू होता है। जो लोग रियल एस्टेट में करियर बनाने की सोच रहे हैं, उनके लिए रियल एस्टेट बिजनेस पर द फाउंडर्स ड्रीम की यह पॉडकास्ट सीरीज़ कई और नज़रिए देती है।
ब्रोकर और डेवलपर की सोच में फ़र्क़
रोशन शाह इस बात पर बिल्कुल साफ हैं कि ब्रोकर और डेवलपर को कभी एक तराज़ू पर नहीं तौला जा सकता।
ब्रोकर ये सोचता है कि यार मैं इसको बेच देता हूं… डेवलपर बहुत ही रिस्पांसिबिलिटी वाला काम है क्योंकि आप किसी को ड्रीम हाउस दे रहे हो। उसकी जिंदगी भर की कमाई आपके प्रोजेक्ट में दे रहा है।
ब्रोकर का काम प्रोजेक्ट लॉन्च होते ही फटाफट बेचकर कमीशन लेना है, जबकि डेवलपर की ज़िम्मेदारी पज़ेशन से लेकर मेंटेनेंस तक, लगभग जीवनभर बनी रहती है। उनके मुताबिक डेवलपर को आर्किटेक्ट मैनेज करना आना चाहिए, प्लान पास कराना आना चाहिए, और लैंड लेने से लेकर पूरे प्रोजेक्ट को डिलीवर करने तक की समझ होनी चाहिए। जो लोग फर्स्ट-जनरेशन एंटरप्रेन्योर के तौर पर डेवलपर बनना चाहते हैं, उनके लिए रोशन की सलाह सीधी है — पहले किसी प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के तौर पर काम शुरू करें, वहां से पूरा प्रोसेस समझें, और उसके बाद डेवलपमेंट में कदम रखें।
नया प्रोजेक्ट खरीदने से पहले क्या देखें, और RERA कितना भरोसेमंद है
किसी भी नए प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से पहले रोशन शाह दो चीज़ों पर ज़ोर देते हैं — लोकेशन और ब्रांड। सबसे बड़ी दिक्कत जो ग्राहकों को झेलनी पड़ती है वो है पज़ेशन में देरी, जब डेवलपर का कमिटमेंट पूरा नहीं होता और 3 साल का वादा 4 साल में बदल जाता है।
अगर कुछ भी डेवलपर प्लस माइनस करता है तो आप रेरा में कंप्लेंट करोगे तो डेवलपर को फाइन लगेगा।
2016 के बाद आए RERA कानून ने बायर और डेवलपर के बीच एक ज़िम्मेदार कड़ी बना दी है, हालांकि रोशन खुद मानते हैं कि डिले अभी भी होते हैं। छोटे डेवलपर से डरने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि हर बड़ा डेवलपर कभी छोटा ही था।
डेवलपर छोटा बड़ा नहीं होता है। वो बड़ा डेवलपर भी पहले छोटा था तब आज बड़ा बना।
उनकी सलाह है कि किसी भी प्रॉपर्टी में पैसा लगाने से पहले एक भरोसेमंद कंसल्टेंट के ज़रिए जाएं, जो सही गाइडेंस दे सके। जो लोग रियल एस्टेट में महिलाओं की भूमिका और नए निवेश डेस्टिनेशन के बारे में जानना चाहते हैं, उनके लिए Estate Queens पर यह लेख भी काम का साबित होगा।
लैंड क्लियरेंस: डेवलपर की सबसे बड़ी सिरदर्दी
बातचीत में रोशन ने खुलकर बताया कि डेवलपर को सबसे ज़्यादा परेशानी कहां से आती है।
ज्यादातर लैंड क्लियर कराने में। लैंड में कैसा होता है कि जैसे डेवलपर ने आज लैंड ली, उसमें दो से तीन महीने लगते हैं खाली लैंड क्लियर करने में।
लैंड टाइटल क्लियर होने के बाद प्लान पास और RERA रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस शुरू होता है, और इतने में ही डेवलपर का करीब एक साल निकल जाता है। रोशन का मानना है कि अगर सरकार यह प्रोसेस तेज़ कर दे, तो प्रोजेक्ट डिले बहुत कम हो जाएंगे। वे यह भी बताते हैं कि प्रॉपर्टी की कीमत में स्टैंप ड्यूटी, GST, लीगल चार्ज और OGB (AMC) जैसे हिडन चार्ज शामिल होते हैं, जो अक्सर खरीदारों को पहले से नहीं दिखते। एक दिलचस्प टिप भी उन्होंने दी — अगर प्रॉपर्टी किसी महिला के नाम पर रजिस्टर की जाए तो स्टैंप ड्यूटी में 1% की छूट मिल जाती है।
सफलता की परिभाषा हर इंसान के लिए अलग होती है
रोशन शाह सफलता को एक सापेक्ष पैमाने से देखते हैं, जहां शुरुआती बिंदु मायने रखता है, न कि सिर्फ आख़िरी आंकड़ा।
किसी के पास ₹500 नहीं थे और 5 करोड़ बनाया, तो दैट्स कॉल्ड सक्सेस बॉस। आपके पास 500 करोड़ थे, आपने 5000 करोड़ बनाया — नॉट लाइक दैट सक्सेस।
यही वजह है कि उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि नज़रिए की कहानी है। वे मानते हैं कि स्ट्रगल से निकलकर आया इंसान जो स्किल डेवलप करता है, वह आसानी से पैसा पाने वालों के पास नहीं होता। रिच किड्स के बारे में उनकी राय साफ है — पैसा मिल जाने से स्किल अपने आप नहीं आता।
डेवलपर बनने के इच्छुक नए उद्यमियों के लिए सलाह
पॉडकास्ट के आखिर में रोशन शाह ने कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए, जो यह समझने में मदद करते हैं कि रियल एस्टेट में स्टार्टअप कैसे शुरू करें, और जो किसी भी नए उद्यमी के काम आ सकते हैं:
- पहले रियल एस्टेट कंसल्टिंग से शुरुआत करें ताकि प्लान पास, RERA, लैंड क्लियरेंस जैसी पूरी प्रक्रिया की समझ बने
- घर खरीदने के लिए रहना है तो मेट्रो सिटी बेहतर है, क्योंकि वहां लाइफस्टाइल और कनेक्शन दोनों मिलते हैं
- Dholera जैसी स्मार्ट सिटी में निवेश से पहले खुद मौके पर जाकर ज़मीन कन्फर्म करें और रजिस्टर बानाखत ज़रूर करवाएं
- सस्ते के पीछे भागने की बजाय भरोसेमंद ब्रांड और टॉप कंसल्टेंट को प्राथमिकता दें
- रिलेशनशिप पर काम करें — एक संतुष्ट ग्राहक पूरे ग्रुप में कई डील दिला सकता है
उन्होंने Dholera स्कैम का ज़िक्र करते हुए साफ चेतावनी भी दी कि निवेश से पहले ज़मीन का टाइटल खुद वेरिफाई करना कितना ज़रूरी है, क्योंकि बड़ी रकम वाले मामलों में भी लोग बिना सोचे पैसा लगा देते हैं।
रोशन शाह की यह भारतीय उद्यमी की कहानी, उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी, रियल एस्टेट के हिडन चार्जेस, और RERA से जुड़ी बारीकियां — होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रोशन शाह कौन हैं?
रोशन शाह Prestigiousrealty, SHAH GROUP और Palais De Luxe के फाउंडर हैं, जिन्होंने Vodafone में पार्ट-टाइम जॉब से शुरुआत करके अहमदाबाद में रियल एस्टेट कंसल्टिंग और डेवलपमेंट बिजनेस खड़ा किया।
ब्रोकर और डेवलपर की सोच में क्या फ़र्क़ है?
रोशन शाह के मुताबिक ब्रोकर सिर्फ प्रॉपर्टी बेचकर कमीशन लेने की सोचता है, जबकि डेवलपर पर पूरी ज़िम्मेदारी होती है क्योंकि ग्राहक अपनी जिंदगी भर की कमाई प्रोजेक्ट में लगाता है।
नया रियल एस्टेट प्रोजेक्ट खरीदने से पहले क्या चेक करना चाहिए?
रोशन शाह के अनुसार सबसे पहले लोकेशन और फिर ब्रांड देखना चाहिए, साथ ही यह भी देखना चाहिए कि प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर है या नहीं, ताकि डिले की स्थिति में शिकायत की जा सके।
RERA प्रोजेक्ट डिले की समस्या कैसे हल करता है?
अगर कोई डेवलपर प्रोजेक्ट में कमिटमेंट से हटता है तो RERA में शिकायत करने पर डेवलपर पर फाइन लगता है, जिससे बायर और डेवलपर के बीच की कड़ी मज़बूत होती है।
डेवलपर को सबसे ज़्यादा दिक्कत कहां आती है?
रोशन शाह बताते हैं कि डेवलपर को सबसे ज़्यादा परेशानी लैंड क्लियर कराने में आती है, क्योंकि डॉक्यूमेंटेशन और टाइटल क्लियर करने में ही दो-तीन महीने लग जाते हैं।


