Nitin Govind Ram on The Founder's Dream podcast

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एक इंजीनियर जो बचपन से बाइक का दीवाना रहा हो, जिसने दुनिया भर में मोटरसाइकिल चलाई हो, और जिसे हर जगह एक ही गैप दिखा हो — यही Nitin Govind Ram की सफलता की कहानी का शुरुआती बिंदु है। द फाउंडर्स ड्रीम पर होस्ट अभिषेक व्यास के साथ हुई इस Nitin Govind Ram इंटरव्यू में Grand Pitstop के फाउंडर नितिन गोविंद राम ने बताया कि कैसे एक आम राइडर की तकलीफ ने उन्हें मोटरसाइकिल सेफ्टी प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी खड़ी करने पर मजबूर कर दिया।

Nitin Govind Ram की सफलता की कहानी: सहारनपुर से IIT तक

यह समझने के लिए कि Nitin Govind Ram कौन हैं, उनकी फाउंडर की जर्नी को शुरुआत से देखना ज़रूरी है — और यह शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के छोटे शहर सहारनपुर से। वे खुद कहते हैं कि मिडिल क्लास परिवार में बड़े हुए पर पढ़ाई से ज्यादा उनका मन खेल-कूद में लगता था। उनके बड़े भाई, जो खुद IIT दिल्ली से पढ़े थे, ने उन्हें मैथ्स और फिजिक्स पर फोकस करने की सलाह दी और यहीं से उनकी IIT की तैयारी शुरू हुई।

18 साल की उम्र में उनकी मां को कैंसर हुआ, जिसने पूरी ज़िंदगी का नज़रिया बदल दिया। नितिन बताते हैं कि उस मुश्किल दौर में भी उन्होंने अपनी JEE परीक्षा क्रैक की। इसी दौर में परिवार के लिए ब्लड डोनर्स ढूंढने के अनुभव ने उनके अंदर एक गहरी बात बिठा दी।

“अगर आपके पास पावर है तो आपको दूसरों की हेल्प करनी चाहिए।”

यही सोच आगे चलकर उनके बिजनेस के पीछे की नीयत बनी — प्रोडक्ट बनाना सिर्फ रेवेन्यू के लिए नहीं, बल्कि राइडर्स की सेफ्टी के लिए।

इंजीनियर से Entrepreneur बनने का सफर — Grand Pitstop की शुरुआत कैसे हुई

IIT दिल्ली में नितिन का नया पैशन रोबोटिक्स बना। उन्होंने वहां रोबोटिक्स क्लब की नींव रखने में भी भूमिका निभाई। पढ़ाई के बाद वे एक फ्रेंच ऑयल कंपनी में काम करने लगे, जहां से उन्हें यूएस और सऊदी अरेबिया समेत कई देशों में काम करने का मौका मिला।

जहां भी वे जाते, मोटरसाइकिल रेंट करके राइडिंग शुरू कर देते — इसके लिए उन्होंने पहले ही इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया था। यहीं उन्हें एक पैटर्न दिखा जो आगे चलकर उनके बिजनेस आइडिया की बुनियाद बना।

“मोटरसाइकिल अनसेफ है, चाहे वो इंडिया हो चाहे वो यूएस हो चाहे वो कहीं भी हो।”

उन्होंने देखा कि कार इंडस्ट्री में एयरबैग से लेकर सेंसर तक, सेफ्टी पर लगातार इनोवेशन हो रहा है, लेकिन टू-व्हीलर सेक्टर में ज़्यादातर मैन्युफैक्चरर प्राइस और बेसिक डिज़ाइन पर ही फोकस करते हैं। यही वो गैप था जिस पर उन्होंने इंजीनियरिंग बैकग्राउंड का इस्तेमाल करके काम करना शुरू किया और Grand Pitstop की नींव पड़ी। उनकी फाउंडर की जर्नी यह मिसाल पेश करती है कि कैसे एक निजी समस्या पूरे बिजनेस का आधार बन सकती है — जो लोग अपने दम पर कुछ अलग बनाने वाले फाउंडर्स की उद्यमियों की कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं, उनके लिए यह सफर एक अच्छा उदाहरण है।

इंडिया में मोटरसाइकिल सेफ्टी इतनी बड़ी चुनौती क्यों है

पॉडकास्ट में अभिषेक व्यास के सवाल पर नितिन ने साफ कहा कि फर्क राइडर की स्किल से ज़्यादा कल्चर का है।

“मुझे लगता है बाइकर से ज्यादा कल्चर का फर्क है। तो अगर आप अमेरिकन या यूरोपियन कल्चर देखोगे तो वहां पे आपको सुपर बाइक अलाउड ही नहीं है जब तक आपने वो लाइसेंस नहीं लिया है।”

उन्होंने बताया कि यूरोप में बाइक लाइसेंसिंग उम्र और बाइक की कैटेगरी के हिसाब से A1, A2, A जैसी अलग-अलग श्रेणियों में बंटा होता है — बिना सही सर्टिफिकेशन के सुपर बाइक सड़क पर उतारना ही मुमकिन नहीं। इंडिया में अभी एक ही लाइसेंस से कोई भी टू-व्हीलर चलाया जा सकता है। दूसरा बड़ा फर्क पैदल चलने वालों और बाइकर्स के प्रति सम्मान का है — विदेश में कार वाला पैदल यात्री या बाइकर को रास्ता देता है, जबकि इंडिया में राइडर को अपनी सेफ्टी खुद मैनेज करनी पड़ती है।

हेलमेट के इस्तेमाल पर भी नितिन की राय साफ है — ज़्यादातर लोग हेलमेट को पुलिस से बचने का जरिया समझते हैं, सिर बचाने का नहीं। वे सलाह देते हैं कि हेलमेट खरीदते वक्त यूरोपियन सर्टिफिकेशन लोगो ज़रूर देखें और किसी ब्रांडेड शॉप से वारंटी कार्ड के साथ ही खरीदें, रोडसाइड से नहीं।

एयरबैग, ब्लाइंड स्पॉट मिरर और पेटेंट की कहानी

Grand Pitstop का पहला पेटेंट मोटरसाइकिल के लिए साइड-माउंटेड एयरबैग का था। नितिन इसका आइडिया बताते हुए कहते हैं कि गिरते वक्त राइडर की नेचुरल टेंडेंसी स्किडिंग की होती है, इसलिए एयरबैग उसी साइड होना चाहिए जिस साइड गिरने की आशंका है। यह पेटेंट यूएस और इंडिया दोनों जगह लिया गया।

इसके अलावा कंपनी ने ब्लाइंड स्पॉट मिरर पर भी यूटिलिटी पेटेंट लिया है, जिसमें लीवर दबाने पर अंदर का मिरर बाहर की तरफ मूव होकर ब्लाइंड स्पॉट दिखा देता है। नितिन इसे समझाते हुए अपना पूरा फिलॉसफी एक लाइन में बताते हैं।

“हमारा कांसेप्ट है मोर विज़िबल यू आर सेफर यू आर ऑन द रोड।”

इसी सोच से हेलमेट लाइट, हज़ार्ड फ्लैशर वाले ग्लव्स और बैकपैक जैसे प्रोडक्ट बने, जो खासकर रात की राइडिंग में राइडर को ज़्यादा दिखने में मदद करते हैं। आज कंपनी के पास करीब 25 इंटरनेशनल पेटेंट हैं और लगभग 12-15 प्रोडक्ट कैटेगरी, जिनमें से करीब 80% पेटेंट असली प्रोडक्ट्स में तब्दील हो चुके हैं। मैन्युफैक्चरिंग को लेकर भी उनका रुख साफ है — कंपनी चाइना पर जीरो डिपेंडेंट है और करीब 95% मैन्युफैक्चरिंग इंडिया में ही होती है।

पावर और स्पीड को लेकर नितिन का एक और महत्वपूर्ण पॉइंट है जो किसी भी हाई-परफॉर्मेंस बाइक खरीदने वाले को ज़रूर सुनना चाहिए।

“आई बिलीव ऑल मोटरसाइकिल्स आर इक्वली अनसेफ। जैसे-जैसे उसकी कैपेसिटी बढ़ती है तो उसकी स्पीड बढ़ती है और वो और ज्यादा अनसेफ होना शुरू हो जाता है।”

बच्चों के लिए बाइक खरीदते समय माता-पिता के लिए सलाह

इस एपिसोड का सबसे प्रैक्टिकल हिस्सा वो है जहां नितिन नए राइडर्स और उनके पेरेंट्स को सीधी सलाह देते हैं। 2024 में बाइक एक्सीडेंट्स में 80,000 से ज़्यादा मौतों के आंकड़े पर बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि पहली बाइक कभी भी हाई-cc कैटेगरी की नहीं होनी चाहिए।

“किसी पेरेंट को एडवाइस नहीं करूंगा कि पहली बाइक आपकी 500 सीसी से ऊपर होनी चाहिए। 350 के अराउंड आराम से मैनेज हो जाती है।”

वे इसे घोड़े की सवारी से जोड़कर समझाते हैं — शुरुआत में घोड़ा आपको चलाता है, धीरे-धीरे आप घोड़े को चलाना सीखते हैं। बाइक के साथ भी यही ट्यूनिंग धीरे-धीरे बैठती है। उन्होंने अपनी कम्युनिटी का एक किस्सा भी शेयर किया जहां एक नए राइडर ने सीधे 750cc हार्ले खरीद ली और टर्निंग रेडियस संभाल न पाने की वजह से बड़ा एक्सीडेंट हो गया। यह सीधी सीख है कि अपग्रेडेशन ग्रैजुअल होना चाहिए — Splendor जैसी बाइक से Royal Enfield 350, फिर 500cc, और उसके बाद ही ऊपर की कैटेगरी की तरफ बढ़ना चाहिए। जो पेरेंट्स और युवा राइडर्स सेल्फ-डिसिप्लिन और सही फैसले लेने से जुड़े और कॉन्टेंट पढ़ना चाहते हैं, वे सेल्फ ग्रोथ सेक्शन पर जा सकते हैं।

राइडिंग टिप्स: ब्लाइंड स्पॉट, नाइट राइडिंग और कंफर्ट

नितिन के मुताबिक इंडिया में दिन के समय राइडिंग ही सबसे सुरक्षित मानी जानी चाहिए, क्योंकि स्ट्रीट लाइटिंग और हाईवे विज़िबिलिटी अभी भी विदेश जितनी मजबूत नहीं है। रात की राइड से बचा न जा सके तो वे एक दिलचस्प तरीका बताते हैं — किसी कार की हेडलाइट के साथ-साथ चलकर उसकी रोशनी का फायदा उठाना, ट्रक्स के पीछे बहुत नज़दीक न रहना, और हमेशा एक मिनिमम सेफ डिस्टेंस मेंटेन करना।

  • लॉन्ग राइड्स में फटीग कम करने के लिए जेल सीट या एयर सीट का इस्तेमाल करें
  • हैंडल की पोजीशनिंग अपने पोश्चर के हिसाब से सही रखें ताकि बैक पर दबाव न बढ़े
  • राइड के दौरान बीच-बीच में नेक और हाथ की हल्की स्ट्रेचिंग करते रहें
  • रात में हैंड सिग्नल के लिए विज़िबल एक्सेसरीज़ (जैसे LED ग्लव्स) इस्तेमाल करें
  • ट्रक और भारी वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, उनके ब्रेकिंग पैटर्न अलग होते हैं

नितिन मानते हैं कि इंडिया में मोटरसाइकिलिंग को लेकर कल्चर धीरे-धीरे बदल रहा है — यंग राइडर्स अब पहले से ज़्यादा दूसरों का ख्याल रखते दिख रहे हैं, और सोशल मीडिया पर एक्सीडेंट के नतीजे देखकर अवेयरनेस भी बढ़ रही है। लेकिन असली बदलाव, उनके मुताबिक, सरकार की तरफ से लाइसेंसिंग कैटेगरी और टू-व्हीलर मैन्युफैक्चरर्स की तरफ से सेफ्टी इनोवेशन में निवेश से ही आएगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Grand Pitstop क्या बनाती है?

Grand Pitstop मोटरसाइकिल और कार के लिए सेफ्टी-फोकस्ड एक्सेसरीज बनाती है जैसे एयरबैग, ब्लाइंड स्पॉट मिरर, हेलमेट लाइट, हज़ार्ड फ्लैशर वाले ग्लव्स, जेल सीट और एयर सीट, जिनमें से ज़्यादातर पर कंपनी के अपने पेटेंट हैं।

Nitin Govind Ram कौन हैं?

Nitin Govind Ram सहारनपुर, यूपी में पले-बढ़े इंजीनियर हैं जिन्होंने IIT दिल्ली से पढ़ाई की, विदेश में ऑयल सेक्टर की कंपनी में काम किया और मोटरसाइकिलिंग के पैशन से प्रेरित होकर Grand Pitstop की शुरुआत की।

इंडिया में बाइक राइडिंग ज्यादा अनसेफ क्यों मानी जाती है?

नितिन के मुताबिक फर्क बाइकर से ज्यादा कल्चर का है क्योंकि विदेश में लाइसेंसिंग कैटेगरी, पैदल चलने वालों के लिए सम्मान और ट्रैफिक अनुशासन ज्यादा मजबूत है जबकि इंडिया में राइडर को अपनी सेफ्टी खुद ही मैनेज करनी पड़ती है।

पहली बाइक कितने cc की होनी चाहिए?

नितिन की सलाह है कि पहली बाइक 350cc के आसपास या उससे कम होनी चाहिए, अनुभव बढ़ने पर धीरे-धीरे अपग्रेड किया जाए, और सीधे 600cc या उससे ऊपर की बाइक से शुरुआत न की जाए।

मोटरसाइकिल एयरबैग कैसे काम करता है?

Grand Pitstop का साइड-माउंटेड एयरबैग पेटेंट इस आइडिया पर बना है कि गिरते समय राइडर की नेचुरल टेंडेंसी स्किडिंग की होती है, इसलिए उसी साइड एयरबैग लगाकर फर्स्ट इंपैक्ट से बचाया जा सकता है।

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About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

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