₹500 की क्रीम सही है या ₹5000 वाली? क्या AI अब आपकी स्किन प्रॉब्लम पहचान सकती है? और Koss Beauty की शुरुआत कैसे हुई कि आज यह ब्रांड सैलून इंडस्ट्री में अपनी जगह बना चुका है? द फाउंडर्स ड्रीम पर होस्ट अभिषेक व्यास ने इन्हीं सवालों के साथ Koss Beauty के फाउंडर Sunil Chaudhari से बातचीत की। इस Sunil Chaudhari इंटरव्यू में स्किनकेयर की साइंस, मॉडलिंग इंडस्ट्री के अनुभव और सैलून फ्रेंचाइजी बिजनेस मॉडल पर खुलकर चर्चा हुई।
Koss Beauty की शुरुआत कैसे हुई
Sunil Chaudhari दस साल तक मॉडलिंग और ग्लैमर इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने करीब 25,000 मॉडल्स के साथ नज़दीक से काम किया और वहीं से एक बड़ी प्रॉब्लम देखी।
मॉडल्स को शूट के दौरान भारी मेकअप लगाना पड़ता है, और ज्यादातर मेकअप आर्टिस्ट लोकल मार्केट के प्रोडक्ट इस्तेमाल करते हैं। इसका नतीजा यह होता कि महीने में 15 दिन शूट करने वाली मॉडल को एलर्जी और पिंपल्स की वजह से बाकी 15 दिन घर बैठना पड़ता था। इसी गैप को देखकर Sunil ने तय किया कि वे एक ऐसा ब्रांड बनाएंगे जो मेकअप से पहले और बाद में तुरंत राहत दे। यही सोच Koss Beauty की नींव बनी।
“हम ऐसा नहीं है कि हम कोई कॉस्मेटिक बना रहे हैं। कॉस्मेटिक ब्रांड नहीं बना रहे। हम डर्मा ब्रांड बना रहे हैं कि लोगों को सॉल्यूशन मिले।”
उन्होंने साफ किया कि यह प्रोडक्ट सिर्फ मॉडल्स के लिए नहीं बल्कि आम इंडियन स्किन के लिए डिज़ाइन किया गया है। इंग्रेडिएंट्स इटली और जर्मनी से सोर्स किए जाते हैं, जबकि फॉर्मूलेशन में कोरियन साइंस को इंडियन स्किन के हिसाब से ढाला जाता है। इस तरह की उद्यमियों की यात्रा में अक्सर एक निजी समस्या ही बिजनेस आइडिया बन जाती है — आप ऐसी ही और उद्यमियों की कहानियाँ द फाउंडर्स ड्रीम पर पढ़ सकते हैं।
₹500 बनाम ₹5000 की क्रीम – असली फर्क कहाँ है
पहला ही सवाल इसी पर था कि महंगे और सस्ते स्किनकेयर प्रोडक्ट में फर्क क्या है। Sunil का जवाब सीधा था कि कीमत से क्वालिटी तय नहीं होती।
“कोई सस्ता ऐसा नहीं है कि सस्ता है तो सही नहीं है और महंगा है तो सही है वो भी ऐसा नहीं है। कोई भी ब्रांड डेवलप होता है ना उसका सबसे ज्यादा पैसा लगता है R&D के ऊपर।”
उनके मुताबिक R&D के बाद ट्रायल होता है, फिर पैकेजिंग, ब्रांड कंसिस्टेंसी और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट जैसे खर्च जुड़ते जाते हैं, जिससे कीमत बढ़ती है। समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता कि उनकी स्किन के लिए कौन सा इंग्रेडिएंट चाहिए। Sunil ने सुझाव दिया कि लोग अपनी प्रॉब्लम के बारे में ChatGPT से भी मुख्य इंग्रेडिएंट पूछ सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।
AI स्किन एनालिसिस बनाम डर्मेटोलॉजिस्ट
Koss Beauty अपने स्टोर्स में एक AI स्किन एनालिसिस मशीन इस्तेमाल करती है, जो चेहरे पर मौजूद दिक्कतें जैसे डार्क स्पॉट्स, पिगमेंटेशन और सन डैमेज तुरंत दिखा देती है। Sunil ने बताया कि उन्होंने डॉक्टर और मशीन के नतीजों की तुलना करके ट्रायल भी लिए हैं।
“99% तो इक्वल मशीन भी दिखा रही है और वो भी दिखा रहा है… 2 लाख प्लस कस्टमरों को आज बेनिफिट भी हुआ है।”
फर्क सिर्फ इतना है कि मशीन 20-25 ऐसी बारीक समस्याएं भी दिखा देती है जो इंसानी आंख नहीं पकड़ पाती, और यह डॉक्टर की कंसल्टेंसी फीस भी बचाती है। लेकिन Sunil यह मानने से इनकार करते हैं कि AI डॉक्टर की जगह ले लेगी — दोनों अपनी जगह जरूरी हैं।
10 स्टेप स्किनकेयर रूटीन का सच
आजकल 10, बल्कि 20 स्टेप तक की स्किनकेयर किट बिक रही हैं। Sunil इसे पूरी तरह गलत मानते हैं।
- असल रूटीन में सिर्फ चार चीजें काफी हैं – फेस वॉश, सीरम, नाइट जेल और सनस्क्रीन।
- एक प्रोडक्ट में औसतन 25 इंग्रेडिएंट्स होते हैं, तो 10 प्रोडक्ट मिलाने का मतलब है चेहरे पर 250 केमिकल एक साथ।
- नियासिनामाइड सिर्फ ब्राइटनिंग करता है, पूरी तरह गोरा नहीं बनाता।
- रेटिनॉल सिर्फ रात में लगाना चाहिए, दिन में नहीं क्योंकि यह सन के साथ काम नहीं करता।
- 35 साल की उम्र के बाद ही एंटी-एजिंग रूटीन शुरू करना चाहिए।
“वापस बोल दो इस बात को – नियासिनामाइड सिर्फ ब्राइटनिंग करता है।”
सनस्क्रीन को लेकर भी उन्होंने साफ किया कि यह सिर्फ धूप में नहीं, घर के अंदर भी लगानी चाहिए क्योंकि UV रेज़ घर के अंदर भी पहुंचती है, और यह महिला-पुरुष दोनों के लिए जरूरी है।
ट्रेंड फॉलो करना बनाम साइंस-बेस्ड प्रोडक्ट
Sunil बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि Koss Beauty कभी ट्रेंड के पीछे नहीं भागती। जब मार्केट में विटामिन सी या नियासिनामाइड का ट्रेंड चलता है, तो हर ब्रांड वही बनाने लगता है, लेकिन उनकी कंपनी इससे अलग राह पर चलती है।
“हम ऐसा नहीं कि लोगों ने विटामिन सी बना दिया तो मेरी कंपनी विटामिन सी बना देगी… हम लोगों को एक डॉक्टर और साइंस के साथ एक टू इयर्स का प्रोसेस के साथ प्रोडक्ट डेवलपमेंट के बाद में हम प्रोडक्ट मार्केट के अंदर डाल रहे हैं।”
उनका सबसे मजबूत प्रोडक्ट एज़ेलिक 10 सीरम है, जिसके बारे में वे दावा करते हैं कि भारत में किसी और ब्रांड के पास इसे इस्तेमाल करने का लाइसेंस नहीं है। यह एक्ने को जड़ से ठीक करने का काम करता है।
सैलून फ्रेंचाइजी मॉडल और बिजनेस का विस्तार
Koss Beauty का 80% बिजनेस B2B है यानी सैलून प्रोडक्ट्स के जरिए। कंपनी के पास सैलून सीरीज़ में 250 से ज्यादा SKU हैं और अब तक 12 फ्रेंचाइजी बेची जा चुकी हैं। Sunil ने बताया कि वे ऑनलाइन सेल्स पर कम और ग्राउंड सेल्स पर ज्यादा भरोसा करते हैं क्योंकि स्किनकेयर में फिजिकल ट्रायल जरूरी है।
फ्रेंचाइजी मॉडल में पार्टनर को सिर्फ जगह (1000 वर्ग फीट), निवेश और एक ट्रांजैक्शन संभालने वाला बंदा देना होता है, बाकी मार्केटिंग, सेल्स स्टाफ और ऑपरेशन कंपनी खुद संभालती है। Sunil के मुताबिक एक साल में न्यूनतम 30% ROI मिलता है और तीन साल में निवेश वापस मिलने की गारंटी दी जाती है। अगले दो साल में कंपनी का लक्ष्य 250 से ज्यादा स्टोर खोलने का है।
नए फाउंडर्स के लिए सलाह
बातचीत के अंत में Sunil ने हर उस व्यक्ति को सलाह दी जो स्टार्टअप कैसे शुरू करें सोच रहा है। उनके मुताबिक पहले किसी एक इंडस्ट्री को अच्छी तरह रिसर्च करना जरूरी है, और उसी में उतरना चाहिए जिसमें कम से कम 70% पकड़ हो, सिर्फ ट्रेंड देखकर फाउंडर बनना खतरनाक है।
“गुजरात की हवा में सर रिस्क लेना है… लेकिन वो कैलकुलेटेड होना चाहिए। कैलकुलेटेड रिस्क होना चाहिए तो धंधा बन जाता है।”
हर उद्यमी की सफलता की कहानी के पीछे यही कैलकुलेटेड रिस्क और एक साफ प्रॉब्लम-सॉल्यूशन सोच काम करती है। अगर आप खुद की फाउंडर की जर्नी शुरू करने की सोच रहे हैं, तो द फाउंडर्स ड्रीम की सेल्फ ग्रोथ सीरीज़ में ऐसे ही और व्यावहारिक सबक मिलेंगे।
होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹500 और ₹5000 की स्किनकेयर क्रीम में क्या फर्क होता है?
Sunil Chaudhari के मुताबिक सस्ता होने का मतलब खराब होना नहीं और महंगा होने का मतलब बेहतर होना नहीं है। कीमत में R&D, ट्रायल, पैकेजिंग और ब्रांड कंसिस्टेंसी का खर्च जुड़ता है, इसलिए सही इंग्रेडिएंट पहचानना ज्यादा जरूरी है।
क्या AI स्किन एनालिसिस डॉक्टर की जगह ले सकती है?
Sunil के अनुसार AI मशीन और डर्मेटोलॉजिस्ट करीब-करीब एक जैसा ही काम करते हैं, लेकिन मशीन 20-25 ऐसी छोटी समस्याएं भी दिखा देती है जो इंसानी आंख से पकड़ना मुश्किल होता है, साथ ही यह डॉक्टर की कंसल्टेंसी फीस भी बचाती है।
Koss Beauty की शुरुआत कैसे हुई?
Sunil Chaudhari दस साल मॉडलिंग इंडस्ट्री में रहे, जहां मॉडल्स को मेकअप के बाद एलर्जी और पिंपल्स की समस्या होती देखी। इसी गैप को देखकर उन्होंने डर्मेटोलॉजिस्ट के साथ मिलकर प्रॉब्लम-सॉल्यूशन आधारित Koss Beauty ब्रांड बनाया।
क्या 10 स्टेप स्किनकेयर रूटीन जरूरी है?
नहीं, Sunil Chaudhari कहते हैं कि असल में सीरम, नाइट जेल, सनस्क्रीन और फेस वॉश यही चार चीजें रूटीन के लिए काफी हैं, बाकी ट्रेंड के नाम पर बेचे जा रहे स्टेप जरूरी नहीं हैं।
सनस्क्रीन कब और किसे लगानी चाहिए?
Sunil के मुताबिक सनस्क्रीन धूप के साथ-साथ घर के अंदर भी लगानी चाहिए क्योंकि UV रेज घर के अंदर भी पहुंचती हैं, और यह महिला-पुरुष दोनों के लिए जरूरी है।


