S. Prakash on The Founder's Dream podcast

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यह S. Prakash इंटरव्यू द फाउंडर्स ड्रीम पॉडकास्ट पर हुई एक ऐसी बातचीत है जो कर्म और पुनर्जन्म के सवालों से शुरू होकर एजिंग की बायोकेमिस्ट्री तक जाती है। होस्ट अभिषेक व्यास ने शुरुआत में ही एक सीधा सवाल पूछा — “मैंने पिछले जन्म में क्या पाप किए, क्या पुण्य किए?” — और इसी सवाल के इर्द-गिर्द पूरी बातचीत का पहला हिस्सा घूमता रहा। एस्ट्रोलॉजर एस. प्रकाश मेडिकल एस्ट्रोलॉजी पढ़ाते हैं, उनकी अपनी एकेडमी है, और उन्होंने इंसुलिन रेजिस्टेंस, गट-ब्रेन एक्सिस और एजिंग पर किताबें लिखी हैं जो मेडिकल कॉलेज की लाइब्रेरी तक पहुंच चुकी हैं।

S. Prakash इंटरव्यू: कर्म, पाप-पुण्य और जीवन की विडंबना

बातचीत की शुरुआत में ही प्रकाश जी एक उलझन सामने रखते हैं — अगर पिछले जन्म के पाप-पुण्य याद ही नहीं रहते तो आज जानबूझकर अच्छा काम करने का क्या मतलब है? वे इसे जीवन का एक पैराडॉक्स मानते हैं:

“ये ना लाइफ की एक आईनी है। ये एक विडंबना है। अगर मैं खुद से कहूं कि मुझे कोई पाप करना है… तो मुझे उस चीज से भी डर है।”

इसी बात को समझाने के लिए वे महाभारत के धृतराष्ट्र का उदाहरण देते हैं — सौ पुत्र और राजपाट मिलने के बावजूद जन्म से नेत्रहीन रहना और सभी संतानों का अंत देखना। प्रकाश जी के अनुसार कृष्ण भगवान ने इसे धृतराष्ट्र के सौ जन्म पहले के कर्मों से जोड़ा — एक पक्षी के अंडे फोड़ने और उसकी आंखें फोड़ने की घटना से। यही तर्क वे भीष्म पितामह के किस्से से भी जोड़ते हैं, जहां अनजाने में सांप को झाड़ी में फेंकने की सजा भी भुगतनी पड़ी। उनका निष्कर्ष सीधा है — “अनजाने में भी किया गया पाप की भी अगर सजा मिलेगी… कोर्ट भी छोड़ देता है आजकल, भगवान ने नहीं छोड़ा भीष्म पितामह जी को।”

भाग्य बनाम स्वतंत्र इच्छा: “हमसे करवाया जाता है”

इस S. Prakash इंटरव्यू का सबसे दिलचस्प मोड़ तब आता है जब सवाल उठता है कि अगर सब कुछ पहले से लिखा है तो इंसान की अपनी मर्जी का क्या रोल है। प्रकाश जी अपने निजी अनुभव से जवाब देते हैं — उनकी पिछले दस साल की जिंदगी, जो 2016 से 2021 तक कई मोड़ लेकर बदली, उसे वे खुद नहीं समझ पाते कि कैसे हुई। वे कहते हैं:

“हम कोई भी काम करते नहीं है। हमसे करवाया जाता है। वी आर फोर्स टू डू थिंग्स।”

इसे साबित करने के लिए वे एक साधारण प्रयोग सुझाते हैं — दो मिनट सांस रोककर दिखाओ, या गाड़ी चलाते वक्त स्टीयरिंग छोड़कर दिखाओ। उनका तर्क है कि ज्यादातर चीजें शरीर और परिस्थितियां खुद-ब-खुद तय कर देती हैं, और सड़क पर चलती गाड़ियों की तरह हम कई ऐसे फैक्टर्स के बीच फंसे होते हैं जिन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं। अगर आप भाग्य, कुंडली और भविष्यवाणी से जुड़े ऐसे ही और नजरिए सुनना चाहते हैं तो डॉ. रामेश राही यादव का इंटरव्यू भी इसी दिशा में एक अच्छी शुरुआत है।

मेडिकल एस्ट्रोलॉजी: कुंडली में सेहत के संकेत

प्रकाश जी बताते हैं कि मेडिकल एस्ट्रोलॉजी से किसी व्यक्ति की कुंडली देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसे किडनी, हार्ट या लिवर से जुड़ी समस्या कब हो सकती है। लेकिन वे साफ कहते हैं कि यह बताना कि समस्या ठीक होगी या नहीं, बहुत मुश्किल है — “ठीक होना… बहुत मुश्किल है।” यही वजह है कि वे अपने क्लाइंट्स को हमेशा डॉक्टर से कंफर्म करने की सलाह देते हैं।

उनका कहना है कि आज एस्ट्रोलॉजी बहुत विस्तृत हो चुकी है — वास्तु, न्यूमरोलॉजी, रेकी, आकाशिक रीडिंग जैसे कई आयाम जुड़ चुके हैं, लेकिन वे खुद सिर्फ पारंपरिक, टाइमिंग-आधारित एस्ट्रोलॉजी पढ़ाते हैं। वे यह भी साफ करते हैं कि पंच महापुरुष राजयोग जैसे योग सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान हैं, असल जिंदगी में किसी जातक की नौकरी या शादी की टाइमिंग बताने में उनका खास रोल नहीं होता। वे कहते हैं कि किसी भी ग्रह की न कोई राशि होती है, न शत्रु, न मित्र — “यह सिर्फ एक एस्ट्रोनॉमिकल फिनोमिनन है।” एस्ट्रोलॉजी और प्रेडिक्शन के इस नजरिए को और गहराई से समझने के लिए द फाउंडर्स ड्रीम के टॉप एस्ट्रोलॉजी पॉडकास्ट एपिसोड्स भी देखे जा सकते हैं।

एजिंग की किताब: IT से मेडिकल साइंस तक का सफर

प्रकाश जी बताते हैं कि वे मूल रूप से आईटी बैकग्राउंड से आते हैं और धीरे-धीरे उनका रुझान पहले एस्ट्रोलॉजी, फिर मेडिकल एस्ट्रोलॉजी की तरफ हुआ। जब उन्हें स्टूडेंट्स को हार्ट, किडनी, लिवर जैसे अंगों के बारे में पढ़ाना था, तो उन्हें लगा कि बिना उन अंगों की असल फंक्शनिंग समझे पढ़ाने में मजा नहीं आएगा। इसी सोच ने उन्हें इंसुलिन रेजिस्टेंस और गट-ब्रेन एक्सिस जैसे कठिन विषयों तक पहुंचाया, और आखिर में एंटी एजिंग और लॉन्जिविटी तक।

वे साफ करते हैं कि एस्ट्रोलॉजी और मेडिकल साइंस उनके लिए दो अलग चीजें हैं — “ये तो मेरा एक इंटरेस्ट है। क्योंकि अगर मैं कुछ अच्छा लिख रहा हूं तो मेरा ये था कि मैं आने वाली जनरेशन के साथ शेयर करूं।” यही वजह है कि उनकी तीन किताबें मेडिकल कॉलेज की लाइब्रेरी में रखी गई हैं, और वे भविष्य में गेस्ट लेक्चर देने की इच्छा भी रखते हैं।

एजिंग के पीछे की साइंस: mTOR, AMPK और एपिजेनेटिक नॉइज़

प्रकाश जी हार्वर्ड के जेनेटिक्स प्रोफेसर डेविड सिंक्लेयर की रिसर्च के हवाले से एजिंग को एक सीडी-प्लेयर के उदाहरण से समझाते हैं — शरीर की हर सेल का DNA एक जैसा रहता है, लेकिन एपिजीनोम (वह सॉफ्टवेयर जो तय करता है कौन-सा जीन पढ़ा जाए) धीरे-धीरे गलत सिग्नल देने लगता है। इसी को वे एपिजेनेटिक नॉइज़ कहते हैं, जो खराब फूड, लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, नींद और टॉक्सिन्स की वजह से बढ़ता है। उनके मुताबिक इस पूरी किताब में एजिंग के 12 हॉलमार्क्स बताए गए हैं, जिनमें से पहला एपिजेनेटिक अल्टरेशन है।

फूड को लेकर उनकी बात सबसे व्यावहारिक है:

“फूड एक सिग्नल है। फूड एक इंफॉर्मेशन है। आपने कोई भी फूड खाया… वो एक सिग्नलिंग पाथवे है।”

वे समझाते हैं कि ज्यादा एनिमल प्रोटीन लेने से mTOR नाम का सिग्नलिंग पाथवे ओवरएक्टिव हो जाता है, जो प्रो-एजिंग माना जाता है, जबकि कैलोरी डेफिसिट या टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग से AMPK पाथवे एक्टिवेट होकर ऑटोफेजी — यानी शरीर की सेल्फ-क्लीनिंग प्रक्रिया — को ट्रिगर करता है। फास्टिंग, कोल्ड प्लंज और सोना जैसे नियंत्रित स्ट्रेस (जिसे वे हॉर्मिसिस कहते हैं) भी इसी संतुलन का हिस्सा हैं।

कैलोरी, न्यूट्रिशन और स्ट्रेस मैनेजमेंट

किसी “मैजिक डिटॉक्स ड्रिंक” के सवाल पर प्रकाश जी ईमानदारी से कहते हैं कि वे न्यूट्रिशनिस्ट या डॉक्टर नहीं हैं, इसलिए सही-गलत पर फैसला नहीं दे सकते — लेकिन इतना जरूर समझाते हैं कि किसी भी चीज में डोज़ और ड्यूरेशन का बहुत महत्व होता है, चाहे वह ब्लैक कॉफी हो या रात भर भिगोए हुए बीज। उनका मुख्य संदेश यही है कि स्ट्रेस मैनेजमेंट, नींद और खानपान मिलकर यह तय करते हैं कि शरीर अपनी उम्र से कम या ज्यादा दिखेगा। अगर कर्म, गीता और आध्यात्मिक नजरिए से स्ट्रेस व जीवन को समझना हो, तो सुरेश भवन के साथ क्रिया योग और गीता पर हुई बातचीत भी इसी विषय को आगे बढ़ाती है।

कुल मिलाकर इस S. Prakash इंटरव्यू से निकलने वाले कुछ मुख्य बिंदु ये हैं:

  • कर्म और पुनर्जन्म का सिद्धांत जीवन के कई विरोधाभासों को समझाने की कोशिश करता है, पर उनका कोई सीधा जवाब नहीं है।
  • मेडिकल एस्ट्रोलॉजी बीमारी की संभावना बता सकती है, इलाज की गारंटी नहीं।
  • एजिंग सिर्फ उम्र का आंकड़ा नहीं, बल्कि एपिजेनेटिक सिग्नलिंग का नतीजा है।
  • फूड को सिर्फ कैलोरी नहीं, एक बायोलॉजिकल सिग्नल की तरह समझना जरूरी है।
  • स्ट्रेस, नींद और संतुलित खानपान मिलकर यह तय करते हैं कि शरीर कितनी तेजी से बूढ़ा होता है।

होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

S. Prakash कौन हैं?

एस. प्रकाश एक एस्ट्रोलॉजर हैं जो मेडिकल एस्ट्रोलॉजी और डीएनए एस्ट्रोलॉजी पढ़ाते हैं, उनकी अपनी एकेडमी है और उन्होंने इंसुलिन रेजिस्टेंस, गट-ब्रेन एक्सिस और एजिंग जैसे विषयों पर किताबें लिखी हैं जो मेडिकल कॉलेज की लाइब्रेरी में भी रखी गई हैं।

इस S. Prakash इंटरव्यू में मुख्य विषय क्या हैं?

इस बातचीत में कर्म और पाप-पुण्य, पुनर्जन्म, भाग्य बनाम स्वतंत्र इच्छा, मेडिकल एस्ट्रोलॉजी, एजिंग के पीछे की साइंस, और स्ट्रेस व न्यूट्रिशन का सेहत पर असर जैसे विषयों पर चर्चा हुई है।

क्या मेडिकल एस्ट्रोलॉजी बीमारी ठीक होने की गारंटी देती है?

नहीं, प्रकाश जी के अनुसार कुंडली देखकर यह बताया जा सकता है कि किसी व्यक्ति को किडनी, हार्ट या लिवर से जुड़ी समस्या कब हो सकती है, लेकिन यह ठीक होगी या नहीं यह बताना बहुत मुश्किल है और इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

एजिंग पर लिखी किताब में प्रकाश जी ने क्या समझाया है?

उन्होंने एपिजेनेटिक अल्टरेशन, mTOR और AMPK जैसे पाथवे, कैलोरी और प्रोटीन का रोल, और डेविड सिंक्लेयर की रिसर्च के आधार पर एजिंग के 12 हॉलमार्क्स समझाए हैं, और बताया है कि फूड, स्ट्रेस व लाइफस्टाइल एपिजेनेटिक नॉइज़ का कारण कैसे बनते हैं।

क्या प्रकाश जी भाग्य और कर्म दोनों में विश्वास करते हैं?

हां, वे मानते हैं कि जीवन में एक पैराडॉक्स है — एक तरफ सब कुछ पहले से तय लगता है, दूसरी तरफ हर इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देना है, और वे खुद कहते हैं कि यह उलझन स्वाभाविक है जिसका कोई सीधा जवाब नहीं है।

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About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

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