Akash Gupta on The Founder's Dream podcast

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क्या AI आपकी सेल्स टीम की जगह ले सकता है, या यह सिर्फ एक सपोर्टिंग हाथ है? द फाउंडर्स ड्रीम के होस्ट अभिषेक व्यास ने इसी सवाल के साथ बातचीत शुरू की InLobo AI के फाउंडर Akash Gupta से। Akash Gupta की सफलता की कहानी दरअसल महंगी मार्केटिंग एजेंसियों से मिली नाकामी से शुरू होती है, जिसने उन्हें अपना खुद का सेल्स ऑटोमेशन सिस्टम बनाने पर मजबूर किया। जो लोग यह जानना चाहते हैं कि स्टार्टअप कैसे शुरू करें और सीमित संसाधनों में बिजनेस कैसे बढ़ाएं, उनके लिए यह कहानी एक प्रैक्टिकल गाइड है।

Akash Gupta की सफलता की कहानी: महंगी एजेंसियों से मिला सबक

Akash Gupta ने पहले होम इंस्पेक्शन का बिजनेस खड़ा किया था, जो अब भारत के 28 शहरों में सेवाएं दे रहा है। समस्या तब शुरू हुई जब कस्टमर तक पहुंचने के लिए उन्हें मेटा एड्स चलानी पड़ी। शुरुआत में वे एक एजेंसी के पास गए, जिसने भारी पैसा चार्ज किया और लीड भी खराब क्वालिटी की दी।

उन्होंने बताया कि तीन महीने में ₹3.5 लाख खर्च होने के बावजूद लीड कॉस्ट ₹350 के आसपास अटकी रही, जबकि यह कोई रियल एस्टेट का महंगा प्रोडक्ट नहीं बल्कि साधारण होम इंस्पेक्शन सर्विस थी। एक फ्रीलांसर और फिर एक और व्यक्ति को आजमाने के बाद भी नतीजा वही रहा।

एंड ऑफ द डे हमने कहा भाई अपना हाथ जगन्नाथ खुद ही करना पड़ेगा। दिमाग तो खुद ही लगाना पड़ेगा।

अपनी ही टीम के एक सदस्य को ऑनलाइन कोर्स दिलवाकर उन्होंने इन-हाउस एड चलानी शुरू की, जहां से धीरे-धीरे रिजल्ट आने लगे। यही अनुभव आगे चलकर InLobo AI की नींव बना।

AI और इंसान में असली फर्क क्या है

Akash Gupta का कहना है कि AI और इंसान के बीच सबसे बड़ा फर्क सीखने की निरंतरता में है। जो इंसान पढ़ाई खत्म होते ही सीखना बंद कर देता है, वह एक स्तर पर रुक जाता है, जबकि AI उतना ही आगे बढ़ता है जितना डेटा और वैल्यू उसमें डाली जाती है। एक AI एंटरप्रेन्योर के तौर पर वे खुद भी हर दिन कुछ नया सीखने की इसी आदत को अपने काम का हिस्सा मानते हैं।

एआई कोई हवा नहीं है। एआई और नॉर्मल पीपल में डिफरेंस है खाली कि कौन डेली कितना लर्न कर रहा है।

वे इस बात पर भी जोर देते हैं कि AI से डरने की जरूरत नहीं क्योंकि इंसान की समझ और अनुभव ही असली काम करते हैं। लाइफ के स्ट्रगल से जो सीख मिलती है, वह AI कभी खुद नहीं सीख सकता — उसे वही दोहराना होता है जो प्रॉम्प्ट में लिखकर दिया जाए।

एआई को आप चला रहे हो। एआई आपको नहीं चला सकता।

InLobo AI कैसे काम करता है: लीड जनरेशन से लेकर WhatsApp बॉट तक

InLobo AI असल में एक सेंट्रलाइज्ड इकोसिस्टम है जो लीड जनरेशन को एक्सेल शीट से निकालकर रियल-टाइम पर टीम तक पहुंचाता है। सेल्सफोर्स या लीडस्क्वेयर जैसे प्लेटफॉर्म भी CRM बनाते हैं, पर वे अलग-अलग काम के लिए अलग वेंडर मांगते हैं — Akash इसे “वन स्टॉप सॉल्यूशन” कहते हैं।

उनके मुताबिक पांच स्टेप में यह सिस्टम काम करता है: पहले एड रन करना, फिर लीड फेच करना, WhatsApp API के जरिए लीड को एंगेज करना, लीड को क्वालिफाई करना, और आखिर में सेंट्रलाइज्ड टू-वे कॉलिंग से मॉनिटर कर कन्वर्जन तक पहुंचाना। इसी तरह के AI पर आधारित सेल्स सिस्टम की बारीकियां अन्य फाउंडर्स के साथ हुई बातचीत में भी सामने आई थीं, जहां बिजनेस ऑटोमेशन को बढ़ाने के तरीके चर्चा में आए थे।

WhatsApp के मोर्चे पर InLobo AI बॉट्स बनाता है जो रात के दो बजे आई लीड को भी तुरंत जवाब देते हैं। लीड नर्चरिंग के लिए एक ऑटोमेटिक फ्लो है — पहले दिन रिमाइंडर, फिर तीन दिन तक फॉलो-अप, और फिर 21 दिन बाद दोबारा संपर्क, ताकि कस्टमर ज्यादा मैसेज से परेशान होकर ब्लॉक न करे।

  • मेटा के साथ रियल-टाइम लीड सिंक, एक्सेल शीट की जगह ऐप में सीधा डेटा
  • टू-वे कॉलिंग जिसमें नंबर मास्क होता है और बातचीत रिकॉर्ड होती है
  • WhatsApp API के जरिए सेंट्रलाइज्ड टीम कम्युनिकेशन
  • डिटेक्टिव मोड — मैनेजर को हर लीड के रिस्पॉन्स टाइम की जानकारी

AI कॉलिंग: उम्मीद और हकीकत के बीच का फासला

अभिषेक व्यास ने पूछा कि क्या AI सेल्स कॉल भी खुद कर सकता है। Akash साफ कहते हैं कि डायरेक्ट सेलिंग में AI अभी कमजोर है, और यह “हसीन सपना” जैसा लगता है जिसे अभी टेस्ट एंड ट्रायल मोड में रखा गया है।

उनका मानना है कि AI कॉलिंग का सही इस्तेमाल कस्टमर सपोर्ट और इंक्वायरी हैंडलिंग में है, न कि नए ग्राहक से पहली बातचीत में, क्योंकि वहां इंसानी धैर्य और समझ ज्यादा मायने रखती है। एक मॉडल को सही तरीके से ट्रेन करने में तीन से चार महीने लगते हैं, और पूरा सिस्टम खड़ा करने में करीब एक साल — साथ ही इसमें निवेश भी काफी ज्यादा है।

वे अमेरिका का उदाहरण देते हैं जहां कई बड़ी कंपनियों ने AI लगाकर टीम हटाई, फिर नतीजे ठीक न आने पर दोबारा इंसानों को हायर किया।

जिसके पास पैसा होता है ना फूंक देता है।

छोटे बिजनेस के लिए सबक: प्रोसेस पहले, टीम बाद में

Akash की सलाह साफ है — बड़े सपने देखने से पहले छोटी जीत इकट्ठा करो। अगर टीम में दो-तीन लोग ही हैं, तो फाउंडर खुद हर लीड पर सही समय पर कॉल करे, पैसा आना शुरू हो, फिर दो बच्चों को ट्रेन कर आगे बढ़ाया जाए।

आपकी चाहतें खून मांगती हैं। आपकी मेहनत का खून मांगती है। तब जाके मिलता है।

वे यह भी मानते हैं कि किसी भी नए मेटा एड अकाउंट से दिन-एक में नतीजे की उम्मीद करना गलती है — रिजल्ट आने में कम से कम डेढ़ से तीन महीने लगते हैं। इसी तरह लीड की “एक्सपायरी” सिर्फ पांच मिनट की होती है, इसलिए रियल-टाइम रिस्पॉन्स ही सबसे बड़ा फैक्टर है।

  • छोटे बजट से शुरुआत करें, ₹1000-1500 एक कैटेगरी के लिए काफी हैं
  • लीड पर रिस्पॉन्स टाइम को रोज़ ट्रैक करें
  • टीम बढ़ाने से पहले प्रोसेस और CRM मजबूत करें
  • गलतियों से सीखें — हर बिजनेस में कुछ प्रयोग असफल भी होते हैं

इस तरह की ईमानदार, बिना दिखावे वाली बातचीत ही असल में काम आती है, और इसी वजह से असली फाउंडर इंटरव्यू AI से बने जेनेरिक कंटेंट से अलग खड़े होते हैं।

निष्कर्ष: धीरे-धीरे, पर पक्का आगे बढ़ना

Akash Gupta की सफलता की कहानी किसी रातों-रात मिली कामयाबी की नहीं, बल्कि लगातार प्रयोग और नाकामियों से सीखने की है। उनका मानना है कि भारत में बिजनेस के लिए अभी सबसे अनुकूल समय है, और जो तीन-चार साल का संघर्ष झेल लेता है, उसे रोकने वाला कोई नहीं।

होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

InLobo AI क्या है?

InLobo AI, Akash Gupta की कंपनी Pro हाउ पॉइंट टेक सॉल्यूशन का एक ब्रांड है जो बिजनेस के लिए लीड फेचिंग, WhatsApp कम्युनिकेशन, टू-वे कॉलिंग और सेल्स मॉनिटरिंग को एक ही प्लेटफॉर्म पर सेंट्रलाइज करता है।

क्या AI इंसानों की जगह सेल्स टीम को रिप्लेस कर सकता है?

Akash Gupta के मुताबिक AI अभी डायरेक्ट सेलिंग में कमजोर है और इसका सही इस्तेमाल कस्टमर सपोर्ट और लीड क्वालिफिकेशन में होता है, जबकि असली कन्वर्जन का काम इंसान ही बेहतर करता है।

Akash Gupta को मेटा एड्स में क्या सबसे बड़ी समस्या आई थी?

शुरुआत में मार्केटिंग एजेंसियों ने मोटा पैसा लेकर भी खराब क्वालिटी की लीड दी, जिससे लीड कॉस्ट ₹350-400 तक पहुंच गई और नतीजा कुछ नहीं निकला।

AI कॉलिंग का सही इस्तेमाल कहां होता है?

Akash Gupta बताते हैं कि AI कॉलिंग का राइट यूज़ कस्टमर सपोर्ट और इंक्वायरी में है, डायरेक्ट सेलिंग में अभी यह ह्यूमन जितना असरदार नहीं है।

छोटे बिजनेस को AI में निवेश करने से पहले क्या करना चाहिए?

पहले एक मजबूत प्रोसेस और CRM सिस्टम बनाना चाहिए, फिर धीरे-धीरे टीम बढ़ाते हुए AI टूल्स को जोड़ना चाहिए, एक साथ बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए।

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About the Host

Abhishek Vyas, creator of The Founder’s Dream, India’s top Hindi business podcast, delivers powerful storytelling and viral conversations with leading founders and creators. His show helps guests share authentic journeys, expand their brands, and connect with millions of engaged listeners.

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