क्या कलयुग सच में सबसे बुरा दौर है, या फिर यह देखने के नजरिए की बात है? इस Vipul Shah इंटरव्यू में लेखक विपुल शाह ने द फाउंडर्स ड्रीम के होस्ट अभिषेक व्यास के साथ जैन दर्शन, रुद्राक्ष, मल्टीवर्स और प्राचीन कॉस्मोलॉजी पर खुलकर बात की। अगर आप जानना चाहते हैं कि Vipul Shah कौन हैं और वे Walmart में डायरेक्टर रहते हुए कैसे प्राचीन भारतीय ज्ञान पर रिसर्च करते हैं, तो द फाउंडर्स ड्रीम का यह बिजनेस पॉडकास्ट हिंदी एपिसोड आपके लिए है। साथ ही उन्होंने अपने बचपन के एक्सट्रीम अनुभव, धर्मों के बदलते इतिहास और आज की जनरेशन की मानसिकता पर भी अपनी राय रखी।
Vipul Shah इंटरव्यू में बचपन के एक्सट्रीम अनुभव और टर्निंग पॉइंट
विपुल शाह शुरुआत से ही अपने बारे में साफ कहते हैं कि उन्होंने हमेशा जिंदगी को एक्सट्रीम तरीके से जिया है। बचपन में वे जैन मुनि के करीब रहकर तत्वार्थ सूत्र और प्रतिक्रमण जैसी चीजें सीख रहे थे, यहां तक कि दीक्षा लेने के कगार पर भी पहुंच गए थे। लेकिन इसके बाद उनकी जिंदगी ने पूरी तरह दूसरा मोड़ लिया।
आई ऑलवेज बिलीव इन लिविंग इन एक्सट्रीम्स कि बचपन में आई वाज़ काइंड ऑफ़ स्टडिंग अबाउट जैनिज्म। एक आचार्य मुनि से बहुत क्लोज हो गया था। मैं ऑन द वर्ज ऑफ़ आई वाज़ अबाउट टू टेक अ दीक्षा।
क्लास नाइन में एक लड़की के लिए घर से भाग जाने की घटना भी उन्होंने बिना झिझक साझा की। उस समय परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने एक्सट्रीम कदम उठाया था, लेकिन आज वे इसे पछतावे की तरह नहीं बल्कि एक सीख की तरह देखते हैं। अपने भाई के साथ हुई उस भावुक रात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यही अनुभव उन्हें आज का इंसान बनाता है। इसी घटना से निकली उनकी सीख है:
बिलीव इन सेकंड चांसेस कि आपके सराउंडिंग में हमेशा आपके अपने होते हैं। कभी-कभी आपको लगता है कि कोई नहीं है बट फिर भी होते हैं हमेशा।
रुद्राक्ष और ॐ का निशान: विपुल शाह की नज़र से
पॉडकास्ट की शुरुआत में ही दोनों ने अपने-अपने रुद्राक्ष का जिक्र किया। विपुल शाह बताते हैं कि अगर रुद्राक्ष को अंगूठे से जोर से दबाया जाए तो अंगूठे पर जो निशान बनता है, वह ॐ के आकार जैसा दिखाई देता है। उनका तर्क है कि यह सिर्फ अंधविश्वास नहीं बल्कि ॐ की वाइब्रेशन से जुड़ा एक लॉजिकल अनुभव है जो मन को शांत करता है और भीतर की एनर्जी को क्लींज करता है।
मल्टीवर्स, जंबूद्वीप और प्राचीन कॉस्मोलॉजी पर विपुल शाह की रिसर्च
विपुल शाह की दिलचस्पी गुजरात के पालीताना में बने जंबूद्वीप के मॉडल से शुरू हुई, जिसे उन्होंने 2011 में देखा था। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि यह वही ज्ञान है जो उन्होंने बचपन में जैन मुनि से सीखा था, सिर्फ नाम अलग-अलग हैं। उनका मानना है कि हर इंसान के भीतर एक अलग ब्रह्मांड चलता है, और यही बात ओम सोहम के कॉन्सेप्ट से भी जुड़ती है।
यहां पर आपके अंदर में एक आपका ब्रह्मांड है। मेरे अंदर में एक मेरा ब्रह्मांड है… यही मल्टीवरिवर्स का कांसेप्ट है कि आपके अंदर में एक अपना ब्रह्मांड चल रहा है।
उन्होंने भरत क्षेत्र, चक्रवर्ती सम्राट और सम्राट अशोक के संदर्भ में भी बात की, जहां उनकी किताब की काल्पनिक कहानी असली प्राचीन अवधारणाओं पर टिकी है। जिन पाठकों को इस तरह की आध्यात्मिक गहराई और सेल्फ ग्रोथ से जुड़ी बातों में दिलचस्पी है, उनके लिए सेल्फ ग्रोथ पर द फाउंडर्स ड्रीम के अन्य लेख भी काफी काम के साबित हो सकते हैं। यही Vipul Shah की सफलता की कहानी को और गहराई से समझने में मदद करता है, क्योंकि उनकी रिसर्च सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं बल्कि उनकी निजी सोच का हिस्सा बन चुकी है।
कलयुग सच में सबसे बुरा युग है? Vipul Shah इंटरव्यू का जवाब
इस Vipul Shah इंटरव्यू का सबसे दिलचस्प हिस्सा कलयुग को लेकर उनकी सोच है। उनका कहना है कि युग देखने के नजरिए की बात है — एक ही जगह बैठे दो लोग अलग-अलग युगों में हो सकते हैं, यह सिर्फ मन की स्थिति पर निर्भर करता है। लेकिन कलयुग की एक खासियत वे खास तौर पर बताते हैं:
कलयुग में यह बोला जाता है कि अगर आप एक पुण्य करते हो वो लाखों गुना ज्यादा होता है। त्रेता युग या सतयुग में लाख पुण्य करने से ज्यादा एक पुण्य का वैल्यू होता है। क्योंकि आप एक ऐसे एनवायरमेंट में हो जहां पे आप कांस्टेंटली डिस्ट्रैक्टेड हो।
यानी बुराई, झूठ और डिस्ट्रैक्शन से भरे माहौल में एक छोटा सा अच्छा काम करना भी बड़ी बात है। विपुल शाह सोशल मीडिया और AI के दौर को इसी कलयुग के विस्तार के तौर पर देखते हैं, जहां इंसान का माइंड बहुत आसानी से मैनिपुलेट किया जा सकता है।
धर्मों का इतिहास कैसे बदला — मैक्स मूलर और डॉ. अंबेडकर की कहानी
विपुल शाह ने क्रिश्चियनिटी, इस्लाम, जैन धर्म और उपनिषदों का अध्ययन करने के बाद एक समान बात नोट की — हर मूल धर्मग्रंथ इंसानियत और भलाई की बात करता है, कहीं भी युद्ध या जबरदस्ती की शिक्षा नहीं मिलती। उनके मुताबिक समय के साथ राजाओं और शासकों ने अपनी सुविधा के हिसाब से इतिहास और धर्मग्रंथों की व्याख्या बदली।
इसी संदर्भ में उन्होंने मैक्स मूलर का उदाहरण दिया, जिन्होंने भारतीय ज्ञान पर गहरी रिसर्च करके किताबें लिखीं, लेकिन बाद में अंग्रेजों ने उस ज्ञान को हथियार बनाकर इस्तेमाल किया। दूसरी तरफ डॉ. अंबेडकर की कहानी भी उन्हें प्रेरित करती है, जिन्होंने नासिक के कालाराम मंदिर में दलितों को प्रवेश दिलाने की लड़ाई लड़ी और बाद में गौतम बुद्ध की जीवनी को नई पीढ़ी के लिए सरल बनाकर नव्यायान लिखी। यही दो किस्से उनकी अपनी लेखन यात्रा की प्रेरणा बने।
जेन-जी, अटेंशन की भूख और AI का सही इस्तेमाल
बातचीत के आखिरी हिस्से में विपुल शाह ने आज की युवा पीढ़ी की मानसिकता पर बेबाक राय दी। उनका मानना है कि यह जनरेशन सिर्फ अटेंशन की भूख में शब्दों और आंदोलनों को गलत तरीके से इस्तेमाल कर रही है।
मुझे लगता है कि सिर्फ यह जो यंगर जनरेशन है सिर्फ इनको अटेंशन का ज्यादा भूख है क्योंकि अटेंशन मिलता नहीं है। अटेंशन कमाना पड़ता है।
AI को लेकर उनकी सलाह साफ है — टूल का इस्तेमाल करो, लेकिन अपनी क्रिएटिविटी मत छोड़ो। पहले यह समझो कि तुम्हें क्या हासिल करना है, फिर AI से सवाल पूछो। इसी तरह की उद्यमशीलता और करियर से जुड़ी गहराई वाली बातचीतों के लिए द फाउंडर्स ड्रीम की एंटरप्रेन्योरियल जर्नी सीरीज भी देखी जा सकती है, जहां अलग-अलग क्षेत्रों के लोग अपने अनुभव साझा करते हैं।
Vipul Shah इंटरव्यू से मिलने वाली सीखें
यह सिर्फ एक इंटरव्यू नहीं बल्कि एक मोटिवेशनल पॉडकास्ट एपिसोड की तरह भी काम करता है, जिससे निकलने वाली सीखें कुछ इस तरह हैं:
- हर इंसान की अपनी एक इंडिविजुअल पर्सपेक्टिव और अपना एक युग होता है।
- कलयुग में किया गया छोटा सा अच्छा काम भी बड़ी वैल्यू रखता है।
- धर्मग्रंथों की मूल शिक्षा हमेशा इंसानियत और भलाई की रही है, समय के साथ व्याख्या बदली है।
- AI को असिस्टेंट की तरह इस्तेमाल करो, अपनी क्रिएटिविटी और सवाल पूछने की आदत मत छोड़ो।
- दूसरी लाइफ का मौका हमेशा मौजूद है, अपने आसपास के लोगों पर भरोसा रखना जरूरी है।
होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत के लिए द फाउंडर्स ड्रीम पर जाइए, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Vipul Shah कौन हैं?
विपुल शाह एक लेखक हैं जो जंबूद्वीप सीरीज नाम से किताबें लिख रहे हैं और प्राचीन भारतीय ज्ञान, जैन दर्शन और कॉस्मोलॉजी पर रिसर्च करते हैं, साथ ही वे Walmart में डायरेक्टर के तौर पर भी काम करते हैं।
रुद्राक्ष को लेकर विपुल शाह की क्या मान्यता है?
विपुल शाह के अनुसार रुद्राक्ष को अंगूठे से दबाने पर जो निशान बनता है वह ॐ के आकार जैसा दिखता है, और उसकी वाइब्रेशन व्यक्ति के अंदर पॉजिटिव एनर्जी और मानसिक शांति लाती है।
कलयुग के बारे में विपुल शाह क्या कहते हैं?
उनका कहना है कि कलयुग में किया गया एक पुण्य, सतयुग या त्रेता युग में किए गए लाखों पुण्यों से ज्यादा मूल्यवान माना जाता है क्योंकि यह एक ऐसे माहौल में किया जाता है जहां लगातार बुराई और डिस्ट्रैक्शन मौजूद है।
विपुल शाह की जंबूद्वीप सीरीज किस बारे में है?
यह एक फिक्शन सीरीज है जो प्राचीन कॉस्मोलॉजी, जंबूद्वीप और भरत क्षेत्र जैसी अवधारणाओं पर आधारित है, जिसमें असली प्राचीन ग्रंथों की जानकारी को बिना तोड़े-मरोड़े काल्पनिक पात्रों के जरिए पेश किया गया है।
यह एपिसोड किस पॉडकास्ट पर आया है?
यह बातचीत द फाउंडर्स ड्रीम (TFD पॉडकास्ट) पर होस्ट अभिषेक व्यास के साथ हुई है।



1 Comment