₹500 लेकर नोएडा आना और आज एक ग्रुप के तहत छह से ज्यादा कंपनियां चलाना — यह किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन Khush Lifestyle के को-फाउंडर Abhishek Sharma ने The Founder’s Dream पर होस्ट अभिषेक व्यास के साथ बातचीत में इसे बहुत सीधे शब्दों में बताया। यह संघर्ष से सफलता की कहानी सिर्फ पैसे कमाने की नहीं है, बल्कि डिग्री बनाम स्किल्स की बहस, एक कपल के साथ मिलकर बिज़नेस खड़ा करने और फैशन इंडस्ट्री में एक नए मॉडल की भी है।
संघर्ष से सफलता की कहानी: कानपुर से नोएडा तक
Abhishek Sharma मिडिल क्लास परिवार से आते हैं और बचपन से ही आर्थिक तंगी देखी है। उन्होंने खुद बताया कि दिवाली पर नए कपड़े नहीं होते थे और होली पर रंग खरीदने के पैसे नहीं होते थे। यही तंगी उनके अंदर एक भूख बन गई।
12वीं क्लास से ही उन्होंने कमाना शुरू कर दिया था — इंग्लिश स्पीकिंग क्लासेस, ट्यूशन, स्कूलों में समर कैंप, जॉब कंसल्टेंसी और यहां तक कि अपना कैफे भी खोला। कानपुर में संसाधन सीमित लगे तो वे दिल्ली आए, कुछ महीने जॉब की, फिर एक फ्रीलांसिंग एजेंसी शुरू की जो आज पज़ेसिव पंडा प्राइवेट लिमिटेड नाम की आईटी कंपनी बन चुकी है।
“जब मैं नोएडा आया था तो मेरे पास सिर्फ ₹500 थे। आज मैं जो चाहूं वो ले सकता हूं। आई कैन अफोर्ड एवरीथिंग।”
2024 में एक ऐसा दौर भी आया जब उनकी एडटेक कंपनी लर्निंग सेंस भारी कर्ज में डूब गई थी और मैनेजमेंट टीम बंद करने की सलाह दे रही थी। उन्होंने कैश फ्लो मैनेज न कर पाने की गलती मानी, लेकिन कंपनी बंद नहीं की। यही टर्निंग पॉइंट बना और आज उनके ग्रुप का 90% रेवेन्यू लर्निंग सेंस से ही आता है।
डिग्री बनाम स्किल्स: असली बहस क्या है
इस एपिसोड का सबसे तीखा हिस्सा डिग्री और स्किल्स की बहस है। Abhishek का मानना है कि भारत में जॉब्स की कमी नहीं है, कमी स्किल की है।
“द ओनली प्रॉब्लम इज़ कि कंपनीज़ को जो स्किल चाहिए वो आप में है नहीं। स्कूल्स में पढ़ाई नहीं जाती, कॉलेज में पढ़ाई नहीं जाती।”
वे अपने अनुभव से एक किस्सा बताते हैं — 18 साल की उम्र में उन्होंने American Express में एक शानदार इंटरव्यू दिया, लेकिन सिर्फ इसलिए ऑफर नहीं मिला क्योंकि वे ग्रेजुएट नहीं थे। यही अनुभव आज उनकी हायरिंग सोच में झलकता है।
“कंपनीज़ को ना यह कल्चर अडॉप्ट करना पड़ेगा कि अगर किसी के पास वैलिड डिग्री नहीं है बट अगर सामने वाला स्किल्ड है, तो आपको उसको अपॉर्चुनिटी देनी पड़ेगी।”
वे बताते हैं कि उनकी अपनी कंपनी में 250 से ज्यादा लोग काम करते हैं, जिनमें से करीब 70% डिग्री होल्डर नहीं हैं, फिर भी उनका परफॉर्मेंस बेहतर है। हालांकि वे यह भी साफ करते हैं कि डिग्री की वैल्यू पूरी तरह खत्म नहीं होगी — असली समाधान एजुकेशन सिस्टम में प्रैक्टिकल लर्निंग जोड़ना है, ना कि सिर्फ किताबी थ्योरी। हर स्टार्टअप कैसे शुरू करें सोचने वाले युवा के लिए यह पॉइंट खास मायने रखता है, क्योंकि सही स्किल के बिना कोई भी बिज़नेस आइडिया टिकता नहीं।
ChatGPT से सीखना बनाम प्रोफेशनल कोर्स
AI टूल्स पर बात करते हुए वे मानते हैं कि सीखने के लिए ChatGPT बेहतरीन है, लेकिन करियर बनाने के लिए मेंटर, रोडमैप और सर्टिफिकेशन जरूरी हैं — जो सिर्फ अच्छी इंडस्ट्रीज ही दे सकती हैं। यही सोच उनकी एडटेक कंपनी लर्निंग सेंस के पीछे है, जहां डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे 1000+ कोर्स प्रैक्टिकल तरीके से सिखाए जाते हैं, साथ में असली कंपनी से छह महीने की इंटर्नशिप भी दी जाती है।
Khush Lifestyle की शुरुआत कैसे हुई
Khush Lifestyle की कहानी दिलचस्प है क्योंकि यह किसी मार्केट रिसर्च से नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की एक निजी दिक्कत से निकली। खुशी शर्मा बताती हैं कि जब वे शॉपिंग पर जाती थीं तो हर बार वही पुराने, रिपीट होते कलेक्शन मिलते थे, कुछ नया अपग्रेड नहीं होता था।
यही समस्या दोनों को लगी कि सिर्फ उनकी नहीं, बहुत से लोगों की है। इसी से Khush Lifestyle का आइडिया निकला — एक कपल बिल्ट ब्रांड, जिसमें हर सोमवार नया कलेक्शन आता है। शुरुआत सिर्फ दो-तीन लोगों की टीम से हुई थी, और चार महीने में यह टीम 100 से ज्यादा लोगों की हो चुकी है, ₹50 लाख से ज्यादा की सेल हो चुकी है और कंपनी प्रॉफिटेबल भी हो गई है।
अभी दिल्ली NCR में 90 मिनट डिलीवरी की तैयारी चल रही है, जिसे धीरे-धीरे पूरे भारत में ले जाने की योजना है। उनके मुताबिक ब्लिंकिट या Myntra जैसे प्लेटफॉर्म्स तेज डिलीवरी तो देते हैं, लेकिन वैरायटी सीमित है — यही गैप वे भरना चाहते हैं।
कम्युनिटी फीचर और डिज़ाइनर्स के लिए रॉयल्टी प्रोग्राम
Khush Lifestyle की ऐप में अगले दो-तीन महीनों में दो नए फीचर लॉन्च होने वाले हैं। पहला है कम्युनिटी फीचर, जहां क्रिएटर्स कपड़े खरीदकर रील या पोस्ट डाल सकेंगे, और उनके व्यूज या उनकी लिंक से हुई खरीद पर उन्हें कमीशन मिलेगा — बिल्कुल Instagram या YouTube की तरह। इससे एंड यूजर को अलग-अलग बॉडी टाइप और लाइटिंग में असली रिव्यू देखने का मौका मिलेगा, जो सिर्फ प्रोफेशनल फोटो से नहीं मिलता।
दूसरा और ज्यादा अनोखा फीचर है डिज़ाइनर रॉयल्टी प्रोग्राम। इसमें ऐप पर अपलोड हर डिज़ाइन के नीचे डिज़ाइनर का नाम दिखेगा, और वह कपड़ा जितनी बार भी बिकेगा, डिज़ाइनर को लाइफटाइम रॉयल्टी मिलेगी।
“हम इसको ओपन सोर्स बना रहे हैं। वी आर नॉट लिमिटिंग दिस टू खुश डिज़ाइनर्स ओनली… आप डिज़ाइनर का प्रोफाइल क्रिएट करो, यू सबमिट योर डिज़ाइन, हमारी टीम आपसे कोऑर्डिनेट करेगी।”
Abhishek के मुताबिक अगर किसी डिज़ाइनर को 0.5% रॉयल्टी भी मिले और कंपनी की मासिक सेल्स ₹100-150 करोड़ हो, तो उस डिज़ाइनर के हिस्से में अच्छी-खासी कमाई आ सकती है। इस पर डिज़ाइनर्स के साथ चर्चा और एक Google सर्वे भी किया गया, जिसका रिस्पॉन्स पॉजिटिव रहा।
अगले 4-5 साल का विज़न: EV से लेकर इस्लामिक मार्केटप्लेस तक
Khush Lifestyle के अलावा टीम EV सेगमेंट पर भी काम कर रही है — पहले टू-व्हीलर्स, और पांच साल बाद कार्स लॉन्च करने की योजना है। एक और प्रोजेक्ट है Amazon-Flipkart जैसा मार्केटप्लेस, लेकिन खासतौर पर मुस्लिम कम्युनिटी के लिए, जहां अबाया, हिजाब, प्रेयर मैट्स जैसी चीजें एक ही जगह उपलब्ध होंगी। Abhishek इसे “बिल्कुल अनटच कम्युनिटी” बताते हैं जिसके लिए अब तक कोई डेडिकेटेड प्लेटफॉर्म नहीं बना।
पांच साल बाद खुद को कैसे याद किया जाना चाहें, इस सवाल पर उनका जवाब साफ था — किसी एक इंसान की भी जिंदगी बदल पाना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। यह सोच उनकी अपनी शुरुआत से जुड़ी है, जब उन्हें खुद अपॉर्चुनिटी नहीं मिली थी।
फाउंडर बनने वालों के लिए सीख
बातचीत के आखिर में Abhishek ने साफ मैसेज दिया, जो हर उद्यमी बनने की सोच रखने वाले के काम आ सकता है।
“फोकस ऑन योरसेल्फ, और मतलब हर टाइटल से आपको दूर होना पड़ेगा… सब चीजों को आपको सेकेंडरी बनाना पड़ेगा। प्राइमरी आपको अपने आप को रखना पड़ेगा।”
- स्किल पर भरोसा रखें, सिर्फ डिग्री पर निर्भर न रहें।
- पीपल मैनेजमेंट किसी भी फाउंडर की सबसे बड़ी स्किल है — बाकी काम सही टैलेंट हायर करके पूरा किया जा सकता है।
- कैश फ्लो मैनेज करना सीखना जरूरी है, वरना बड़ी गलतियां भारी पड़ सकती हैं।
- बिज़नेस आइडिया अक्सर अपनी ही रोज़मर्रा की समस्या से निकलता है, जैसे Khush Lifestyle का हुआ।
अगर आप भी उद्यमियों की कहानियाँ से सीखकर अपना रास्ता बनाना चाहते हैं, तो Abhishek Sharma की यह भारतीय उद्यमी की कहानी और उनकी फाउंडर की जर्नी बताती है कि संसाधन ना होना बहाना नहीं हो सकता। जो लोग खुद पर काम करना और डर के बावजूद फैसले लेना सीखना चाहते हैं, उनके लिए सेल्फ ग्रोथ से जुड़े ऐसे ही अनुभव काफी काम आ सकते हैं।
होस्ट अभिषेक व्यास के साथ पूरी बातचीत देखिए द फाउंडर्स ड्रीम यूट्यूब चैनल पर, और हर हफ़्ते नए फाउंडर इंटरव्यू के लिए सब्सक्राइब कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Abhishek Sharma कौन हैं?
Abhishek Sharma, Khush Lifestyle के को-फाउंडर हैं और अभिषेक इंटरनेशनल ग्रुप के तहत लर्निंग सेंस (एडटेक), पज़ेसिव पंडा (आईटी) और विगोर (सोशल मीडिया ऐप) जैसी कंपनियां भी चलाते हैं।
Khush Lifestyle की शुरुआत कैसे हुई?
Abhishek और उनकी पार्टनर खुशी शर्मा को शॉपिंग करते वक्त बार-बार वही पुराने कलेक्शन मिलते थे, नयापन नहीं मिलता था, इसी प्रॉब्लम से उन्हें अफोर्डेबल और वैरायटी वाला क्लोथिंग ब्रांड शुरू करने का आइडिया मिला।
क्या डिग्री के बिना जॉब मिल सकती है?
Abhishek Sharma के मुताबिक उनकी कंपनी में 70% लोग डिग्री होल्डर नहीं हैं फिर भी उनकी परफॉर्मेंस डिग्री होल्डर्स से बेहतर है, बशर्ते कंपनियां स्किल के आधार पर अपॉर्चुनिटी देने का कल्चर अपनाएं।
Khush Lifestyle का डिज़ाइनर रॉयल्टी प्रोग्राम क्या है?
इस प्रोग्राम में ऐप पर अपलोड हर डिज़ाइन के साथ डिज़ाइनर का नाम दिखेगा और वह डिज़ाइन जितनी बार बिकेगा, डिज़ाइनर को लाइफटाइम रॉयल्टी मिलेगी, यह ओपन सोर्स होगा यानी बाहर के डिज़ाइनर्स भी जुड़ सकते हैं।
Khush Lifestyle का अगले कुछ महीनों का प्लान क्या है?
कंपनी अगले दो-तीन महीनों में कम्युनिटी फीचर और डिज़ाइनर रॉयल्टी प्रोग्राम लॉन्च कर रही है, साथ ही दिल्ली एनसीआर में 90 मिनट डिलीवरी और आगे चलकर EV सेगमेंट में एंट्री की भी योजना है।


